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कोयला का अवैध कारोबार अब धनबाद के बजाय चांडिल, रांची, रामगढ़ होते हुए, गुप्ता जी हैं संरक्षक

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Saurav Singh

Ranchi: कोयला तस्करों ने तस्करी का नया रास्ता बनाया है. बंगाल के रानीगंज से पुरुलिया-चांडिल, रांची-रामगढ़-हजारीबाग होते हुए अवैध कोयला लदा ट्रक उत्तर प्रदेश के वाराणसी और बिहार के डेहरी मंडी पहुंच रहा है.

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सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार रोजाना 50 से 60 अवैध कोयला लदे ट्रक इन रास्तों से होते हुए वाराणसी और डेहरी मंडी पहुंच रहे हैं. पुलिस की नाक के नीचे से धड़ल्ले से अवैध कोयले की तस्करी हो रही है, लेकिन इस मामले में पुलिस अनजान है.

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के लाला और झारखंड के गुप्ता जी इस कारोबार को संरक्षण दे रहे हैं. लाला और गुप्ता अपने-अपने राज्यों में पुलिस को मैनेज करने का काम करते हैं.

अवैध कोयले का यह कारोबार प्रतिदिन डेढ़ से दो करोड़ रुपया का हो रहा है. जानकारी के अनुसार इन दिनों बंगाल के रानीगंज से बड़े पैमाने पर अवैध कोयले की तस्करी हो रही है. लोकल लिंक और कुछ पुलिसवालों के सहयोग से यह काला खेल चल रहा है.

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वाराणसी व डेहरी मंडी कोयला खपाने का सबसे बड़ा केंद्र

जानकारी के अनुसार पश्चिम बंगाल के रानीगंज में बड़े पैमाने पर अवैध उत्खनन व कोयला चोरी का काम तो चल ही रहा है, इसके अलावा बांकुड़ा जिले के मेजिया अर्थग्राम में भी बड़े पैमाने पर अवैध कोयला खदान चलते हैं, और सभी कोयले रानीगंज होते हुए ही निकलते हैं.

बंगाल का अवैध कोयला वाराणसी और डेहरी के मंडी में डिस्को पेपर (पेड) के माध्यम से खपाया जा रहा है. यह मंडी अवैध कोयला खपाने का सबसे बड़ा केंद्र है.

बंगाल से रोजाना 50-60 ट्रक अवैध कोयले बनारस मंडी और डेहरी मंडी में पुरुलिया-चांडिल-रांची-रामगढ़- हजारीबाग रास्ते भेजे जा रहे हैं. अवैध कोयले का यह कारोबार हर दिन डेढ़ से दो करोड़ का हो रहा है.

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कोलियरी क्षेत्र से जुड़े कुछ बड़े नाम जारी करते हैं डिस्को पेपर (पेड) 

जानकारी के मुताबिक जिस तरह वैध कोयला ले जाने के लिए ईसीएल द्वारा चालान दिया जाता है. उसी प्रकार अवैध कोयला ले जाने के लिए डिस्को पेपर (पेड)चलता है.

बंगाल में वैध कोयला ले जाने के लिए पेड की प्रथा ममता बनर्जी के पहले कार्यकाल में रोक दी गयी थी, लेकिन ममता बनर्जी के दूसरे कार्यकाल में यह फिर से शुरू हो गयी है.

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कोलियरी क्षेत्र से जुड़े कुछ बड़े नाम यह पेड जारी करते हैं. जिन गाड़ियों के पास पेड या पास होता है, उसे अन्य किसी भी परमिट की जरूरत नहीं होती हैत. रात के अंधेरे में अवैध कोयला लदे ट्रक बंगाल के रानीगंज से झारखंड के रास्ते मंडी को जाती हैं.

ट्रकों पर लगभग 35 टन लोड रहता है कोयला

पश्चिम बंगाल के रानीगंज से झारखंड के रास्ते मंडी भेजे जाने वाले अवैध कोयला लदे ट्रकों में ओवर लोड रहता है. ट्रकों पर लगभग 35 टन कोयला लोड रहता है. वहीं सभी ट्रकों को तिरपाल से ढक दिया जाता है और बंगाल का अवैध कोयला झारखंड के रास्ते यूपी और बिहार की मंडियों में खपाया जाता है.

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बंगाल के अवैध कोयले का रेट प्रति टन 2200 से 2500 रुपये है

जानकारी के मुताबिक बंगाल के अवैध कोयले का रेट प्रतिटन 2200 से 2500 रुपये के बीच है. 1400 रुपये प्रतिटन पेड (डिस्को पेपर) का लगता है. इसमें रंगदार, विधायक, नेता, पत्रकार व पुलिस को मैनेज किया जाता है.

बंगाल का अवैध कोयला झारखंड में प्रवेश करने पर मध्यस्थता कराने वाले को प्रतिटन 500 रुपये मिलते हैं. इस खेल में थाना, वरीय पुलिस अधिकारियों, आरटीओ को भी मैनेज किया जाता है. बंगाल के अवैध कोयले को यूपी और बिहार की मंडी में 9000 से लेकर 10,000 रुपया प्रति टन बेचा जा रहा है.

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