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एसडीओ से लेकर मजिस्ट्रेट तक ने की जांच, फिर भी कोचिंग संस्थानों ने दुरुस्त नहीं किया फायर फाइटिंग सिस्टम

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Ranchi : रांची के कोचिंग संस्थानों में आगजनी की घटनाओं से निपटने की समुचित व्यवस्था नजर नहीं आती. दरअसल, सूरत के तक्षशिला कॉम्पलेक्स में हुई आगजनी की घटना में 20 से अधिक स्टूडेंट्स की मौत के बाद रांची जिला प्रशासन ने शहर के कोचिंग संस्थानों में फायर फाइटिंग सिस्टम की जांच का सिलसिला शुरू किया था.

एसडीओ से लेकर मजिस्ट्रेट तक ने की थी जांच

शहर के कोचिंग हब माने जाने वाले सर्कुलर रोड के हरिओम टावर, जगन्नाथ टावर, क्लब रोड स्थित सिटी सेंटर में जांच की गयी. खुद एसडीओ गरिमा सिंह, मजिस्ट्रेट सागर कुमार, अग्निशमन सेंटर आड्रे हाउस के प्रभारी रणधीर कुमार सहित कई पदाधिकारियों ने जांच की थी और सभी कोचिंग संस्थानों को फायर फाइटिंग सिस्टम दुरुस्त करने को कहा था.

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इसके बावजूद शहर के कोचिंग संस्थानों ने इसे गंभीरता से नहीं लिया. जांच के 20 से अधिक दिन गुजर जाने के बाद भी स्थिति जस की तस है. जांच करने के बाद जिला प्रशासन से लेकर नगर निगम व अग्निशमन विभाग भी शांत बैठा हुआ है.

एक भी संस्थान ने दुरुस्त नहीं किया सिस्टम

25 मई को सूरत की घटना के बाद 27 मई जिला प्रशासन ने जांच की थी. जिला पदाधिकारियों ने दो घंटे से अधिक का समय हरिओम टावर में देकर 50 से अधिक कोचिंग संस्थानों की जांच की.

इस दौरान वहां मौजूद कमियों की सूची तैयार की गयी थी. इस जांच के बाद 31 मई को नगर निगम की ओर से टाउन प्लानर व दो अन्य अधिकारों ने जांच करते हुए संस्थानों को 15 दिनों में फायर फाइटिंग सिस्टम ठीक करने को कहा था.

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लेकिन हरिओम टावर में लगे अग्निशमन यंत्र की स्थिति ठीक वैसी ही है, जैसी 15 दिनों पहले जांच के दौरान पायी गयी थी.

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हरिओम टावर में थी ये कमियां

– 50 से अधिक कोचिंग संस्थानों में नहीं था इमरजेंसी निकासी दरवाजा.
– प्लाइवूड से तैयार किये गये थे कमरे, जिसमें आग तेजी से फैलती है.
– किसी भी कोचिंग संस्थान में अलग से नहीं था अग्निशमन यंत्र.
– हरिओम टावर में लगे अग्निशमन यंत्र बेकार पड़े हुए थे.
– इमरजेंसी में पानी निकालने वाली पाइप पूरी तरह सड़ चुका था.
– लिफ्ट भी सही तरीके से नहीं कर रही थी काम.
– किसी भी तरह की आपात स्थिति में सीढ़ी ही बचाव का एकमात्र उपाय.
– सभी फायर फाइटिंग मशीन एक्सपायर हो चुकी थी.

न रिपोर्ट जमा हुई और न नोटिस जारी किये

जिस तामझाम के साथ नगर निगम ने कोचिंग संस्थानों की जांच की. वैसे में उम्मीद जगी कि सिस्टम में सुधार आयेगा. लेकिन व्यवस्था वैसी ही पड़ी हुई है. 31 मई की जांच के बाद अधिकारियों को जांच की रिपोर्ट सौंप कर सभी कोचिंग संस्थानों को नोटिस जारी करना था.

जांच तो हुई लेकिन अब तक किसी तरह की कार्रवाई नहीं हुई. तमाम संकरी गलियों व ऊंचे-ऊंचे ब्लीडिंग में चलने वाले कोचिंग संस्थान धड़ल्ले से अपनी दुकान चला रहे  हैं.

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