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सामाजिक कार्यकर्ता फादर स्टेन स्वामी के घर कुर्की कार्रवाई की झारखंड जनाधिकार महासभा ने की निंदा

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Ranchi: सोमवार (21 अक्टूबर) को खूंटी पुलिस ने फादर स्टेन स्वामी के घर की कुर्की जब्ती की. इस पुलिसिया कार्रवाई की झारखंड जनाघिकार महासभा ने निंदा की है. यह कार्रवाई पत्थलगड़ी को लेकर फेसबुक पर उनके विवादित टिप्पणी करने को लेकर दर्ज देशद्राह के केस में की गई है.

ज्ञात हो कि खूंटी पुलिस ने रांची, नामकुम के बगाइचा परिसर स्थित स्टेन स्वामी के निवास पर कुर्की की कार्रवाई की. पुलिस ने उनके कमरे से दो टेबल, तीन कुर्सी, एक अलमारी और एक गद्दा जब्त किया है.

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महासभा ने की कुर्की कार्रवाई की निंदा

झारखंड जनाघिकार महासभा ने पुलिस की कार्रवाई की निंदा की है. सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धीजीवियों, जो भाजपा सरकारों की नीतियों की आलोचना करते रहे हैं को प्रताड़ित किये जाने पर चिंता जताई.

साथ ही कहा कि इस प्रकार की कार्रवाई असहमति की आवाजों को दबाने एवं वंचित समूहों के अधिकारों के लिए कार्यरत लोगों में भय पैदा करने के लिए सरकार द्वारा किया गया प्रयास हैं.

विधान सभा चुनाव के ठीक पहले 83-वर्षीय स्टेन को भगोड़ा घोषित करने और कुर्की कार्रवाई को महासभा ने भाजपा द्वारा भ्रम फैला कर चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश बताया है.

पत्थलगड़ी को लेकर विवादित टिप्पणी का मामला

पुलिस ने कुर्की की कार्रवाई, फादर स्टेन स्वामी (व 19 अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं व बुद्धिजीवियों) के विरुद्ध दर्ज देशद्रोह के मामले में की है. दरअसल जुलाई 2018 में खूंटी पुलिस ने पत्थलगड़ी मुहिम में लोगों को भड़काने के आरोप में उनपर देशद्रोह का मामला दर्ज किया था. प्राथमिकी स्टेन स्वामी के द्वारा किए गए फेसबुक पोस्ट के आधार पर दर्ज की गयी थी.

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इन पोस्ट्स में मुख्यत: पत्थलगड़ी गावों में सरकार की कार्रवाई व आदिवासियों के अधिकारों पर हो रहे हमलों के विरुद्ध टिपण्णी की गयी थी. देशद्रोह के आरोप के साथ-साथ उनपर सूचना प्रोद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 66A अंतर्गत भी मामला दर्ज किया गया है. मज़ेदार बात है कि सर्वोच्च न्यायालय ने धारा 66A को 2015 में ही निरस्त कर दिया था.

कब क्या हुआ

स्टेन स्वामी समेत (अलोका कुजूर, राकेश रोशन किरो एवं विनोद कुमार) चार लोगों पर फेसबुक पोस्ट्स सम्बंधित मामले में आरोपित बनाये जाने के बाद अगस्त 2018 में आरोपितों ने प्राथमिकी को खारिज करने की अपील उच्च न्यायालय में की.

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जब उच्च न्यायालय में इस मामले में सुनवाई चल रही थी, उसी दौरान खूंटी कोर्ट ने 19 जून 2019 को, स्थानीय पुलिस की दलील के आधार पर चारों खिलाफ के विरुद्ध गिरफ्तारी का वारंट जारी कर दिया.

इतना ही नहीं वारंट निर्गत होने से पहले न तो खूंटी पुलिस ने आरोपियों के घर जाकर उनकी उप्लब्धता के विषय में पूछताछ की और न ही उन्हें इस सम्बन्ध में किसी प्रकार का नोटिस भेजा. इससे वारंट की वैध्यता पर ही सवाल उठता है.

चारों अभियुक्तों ने गिरफ्तारी वारंट के विरुद्ध उच्च न्यायलय में अपील दायर की थी. इसके बाद 22 जुलाई 2019 को खूंटी कोर्ट ने पुलिस की दलील पर स्टेन को भगोड़ा घोषित कर दिया.

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इसके विरुद्ध भी स्टेन ने उच्च न्यायालय में अपील दायर की. वहीं 24 सितम्बर को खूंटी कोर्ट ने कुर्की का आदेश दे दिया. स्टैन के वकील ने इस विरोधाभास को न्यायालय के समक्ष रखा है कि जिस दौरान खूंटी पुलिस ने स्टेन को भगोड़ा घोषित किया था, उसी दौरान वे भीमा-कोरेगांव मामले में अपने आवास पर मौजूद रहकर जांच में पूर्ण सहयोग कर रहे थे. इससे यह स्पष्ट समझ में आता है कि न वे भागे हुए थे और न ही जांच में सहयोग करने से मना कर रहे थे.

जब न्यायालय ने इस विषय पर सरकारी वकील से स्पष्टता मांगी, तो वकील द्वारा समय की मांग की गयी. न्यायालय ने अगली सुनवाई (23 अक्टूबर) को इस पर स्पष्ट जवाब मांगा है.
मामले पर झारखंड जनाघिकार महासभा ने कहा कि सुनवाई से ठीक दो दिनों पहले हुई ये कुर्की सामाजिक कार्यरकर्ता स्टेन द्वारा उनकी गिरफ्तारी वारंट को निरस्त करने की अपील को निष्फल करवाने की पुलिस द्वारा एक कोशिश लगती है.

कौन है स्टेन स्वामी

स्टैन झारखंड के एक जाने-माने सामाजिक कार्यकर्ता हैं. वे कई वर्षों से राज्य के आदीवासी व अन्य वंचित समूहों के लिए कार्य कर रहे हैं. उन्होंने विशेष रूप से विस्थापन, संसाधनों की कंपनियों द्वारा लूट, विचाराधीन कैदियों, पेसा कानून, व वन अधिकार अधिनियम, व सम्बंधित कानूनों पर काम किया है.

स्टेन ने समय-समय पर सरकार के भूमि अधिग्रहण कानूनों में संशोधन करने के प्रयासों की आलोचना भी की है. झारखंड जनाधिकार महासभा का उनके कार्य का सम्मान करती है.

साथ ही महासभा ने मांग की है कि स्टेन व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं पर लगे देशद्रोह व अन्य झूठे मुकदमे वापस लिए जाए एवं प्राथमिकी को रद्द किया जाए. साथ ही, पत्थलगड़ी गावों में मानवाधिकार उल्लंघन एवं स्टेन स्वामी व अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं पर झूठा मुकदमा बनाने के लिए ज़िम्मेवार खूंटी पुलिस के विरुद्ध कार्रवाई की जाए.

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