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#Jharkhand के 5245 प्राइवेट स्कूलों को फिर से लेनी होगी मान्यता, RTE संशोधन ने विद्यालयों की मुश्किलें बढ़ायी

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Ranchi: झारखंड सरकार ने इस वर्ष शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन किया है. जिसके तहत राज्य में संचालित प्राइवेट स्कूल को फिर से मान्यता लेनी होगी.

सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, राज्य में 5245 प्राइवेट स्कूल संचालित हो रहे हैं. इसमें से 4740 ऐसे स्कूल हैं, जिन्होंने किसी भी बोर्ड से मान्यता नहीं ली है.

लेकिन शिक्षा का अधिकार में संशोधन किये जाने के बाद नये नियम के तहत ही विद्यालयों मान्यता लेने को कहा गया है. इसके लिए 30 नवंबर 2019 तक आवेदन करना है.

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सरकार की ओर से किये गये संशोधन ने प्राइवेट स्कूलों की परेशानी बढ़ा दी है. शिक्षा के अधिकार अधिनियम में जो संशोधन किये गये हैं, उसके अनुसार राज्य के आधे से अधिक स्कूलों को मान्यता नहीं मिल पायेगी.

एक वर्ष के भीतर निरीक्षण करा कर लेना है रजिस्ट्रेशन

विभाग की ओर से जारी नियमावली के मुताबिक, नये नियम के अनुसार विद्यालयों को मान्यता लेने के लिए एक वर्ष का समय दिया गया है.

इस अवधि में निजी विद्यालयों को फिर से मान्यता के लिए आवेदन देना होगा. विद्यालयों को एक वर्ष के अंदर निरीक्षण भी कराना होगा.

इससे पूर्व की शिक्षा के अधिकार नियमावली 2010 के अनुसार, स्कूलों को मान्यता लेने के लिए तीन वर्ष का समय दिया गया था. तीन वर्ष की अवधि की समाप्ति के बाद मात्र 200 स्कूलों ने ही मान्यता ली.

क्यों अटक रहा है पेंच

विभाग की ओर से जारी नियमावली में बड़ा पेंच स्कूलों की जमीन को लेकर है. नयी नियमावली में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी (कक्षा एक से पांच) व माध्यमिक (कक्षा छह से आठ) स्कूलों के संचालन के लिए जमीन के विस्तार को बढ़ा दिया गया है.

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अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी स्कूल के संचालन के लिए 60 डिसमिल व शहरी क्षेत्रों में संचालन के लिए 40 डिसमिल जमीन अनिवार्य है.

इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक स्कूल संचालन के लिए 1 एकड़ व शहरी क्षेत्रों में संचालन के लिए 0.75 एकड़ जमीन जरूरी है.

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राज्य में संचालित हो रहे प्राइवेट स्कूलों में लगभग 50 फीसदी स्कूलों के पास जमीन विस्तार को लेकर समस्या है. यह समस्या शहरी क्षेत्र के प्राइवेट स्कूलों में ज्यादा है.

इसके अलावा नयी शिक्षा नियमावली में क्लास रूम के साइज को तय किया गया है. प्राइवेट स्कूलों का कहना है, ऐसे में तो हमें फिर से क्लासरूम बनाने पड़ेंगे.

वहीं कुल जमीन का दो तिहाई हिस्सा स्पोटर्स व अन्य गतिविधियों के लिए रखने को कहा गया है. शहरी क्षेत्र में संचालित हो रहे स्कूलों में नयी नियमावली के अनुसार ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा है.

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प्राइवेट स्कूलों की मानें तो संशोधित नियमावली की कई बातें अव्यवहारिक हैं. स्कूल प्रबंधकों का मानना है कि नयी शर्तों को पूरा नहीं किया जा सकता है.

वे तो यह भी कहते हैं कि पूर्व में किये आवेदनों पर तय समय में निर्णय नहीं लिया गया तो इस बार कैसे संभव है कि राज्य के 5 हजार से अधिक स्कूलों का निरीक्षण सरकार मान्यता दे ही देगी.

बिना मान्यता के स्कूलों में पढ़ रहे 12,16,398 विद्यार्थी

राज्य में 2010 के शिक्षा के अधिकार नियमावली के तहत, लगभग 200 स्कूलों को मान्यता मिल पायी. इसके बाद प्राइवेट स्कूलों की संख्या बढ़ती ही गयी.

राज्य में अभी बिना मान्यता के 4740 स्कूल संचालित हो रहे हैं, जहां 12,16,398 विद्यार्थी पढ़ाई कर रहे हैं. आंकड़ों के अनुसार, ऐसे स्कूलों की संख्या में बढ़ोत्तरी ही हो रही है. वहीं छात्रों की संख्या में भी इजाफा हुआ है.

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