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खूंटकटी ग्रामसभा की बैठक में तय हुआ- किसे देना है वोट, रेस में हैं अर्जुन व कालीचरण

कांग्रेस और बीजेपी के लिए गले की फांस बना पांचवीं अनुसूची

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Pravin Kumar

Ranchi : ओकोए अलेआ: लड़ाई रे ओमेआ देंगा अले इनि: वोट ले ओमाईआ मेनदो एनकन जेता होड़ो खुंटीआते कको लड़ाई तना.

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उपरोक्त इन पंक्तियों का मतलब है – जो हमारी लड़ाई में साथ देता है, उन्हें वोट करेंगे. यह कहना है मुरहू प्रखंड के गयगये गांव के वृद्ध बिरसा मुंडा का. पांचवी अनुसूची को आजादी के 70 साल के बाद भी लागू नहीं किया जाना सरकार और सिस्टम के प्रति गुस्सा को भी दिखाता है. उपर से इलाके में बुनियादी सुविधा का अभाव भी मतदाताओं की खामोशी की बड़ी वजह है.

जबकि दूसरी ओर खूंटी में शह मात का खेल जारी है. जहां एक ओर कड़िया मुंडा की विरासत को आगे बढ़ाने में अर्जुन मुंडा भाजपा के उम्मीदवार के रूप में पसीना बहा रहे हैं. तो वहीं दूसरी ओर कांग्रेसी उम्मीदवार कालीचरण मुंडा महागठबंधन के सहारे अपनी जीत सुनिश्चित करने में लगे हुए हैं.

जबकि झारखंड पार्टी भी अपनी पहचान को वापस पाने के लिए तोरपा, कोलेबिरा और सिमडेगा विधानसभा क्षेत्र में पसीना बहा रहा है. तो सेंगल भी कोलबिरा और सिमडेगा में दम लगा रहा है. वहीं ग्रामीण चुनावी माहौल से दूर अपनी ही दिनचर्या में व्यस्त हैं. खूंटी लोकसभा का एक बड़ा हिस्सा, जिसने ग्रामसभा की बैठक भी की थी, लेकिन वोट किस प्रत्याशी को देना है ये तय नहीं किया था.

लेकिन गुरूवार को खूंटकटी गांव में होने वाली होने वाली ग्रामसभा की बैठक में तय कर लिया है कि किस उम्मीदवार को ग्रामीम अपना वोट देंगे.

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वहीं कस्बायी मतों पर भाजपा का प्रभाव देखा जा रहा है. लेकिन ग्रामीण इलाकों में वोटरों की खामोशी चुनाव को रोचक बना रही है. जिन इलाकों में चर्च का प्रभाव है, वहां कांग्रेस के साथ सेंगल पार्टी, झारखंड पार्टी के उम्मीदवार भी ज्यादा वोट लाने के प्रयास में लगे हुए हैं.

खूंटी लोकसभा क्षेत्र में जहां 66 फीसदी एसटी आबादी है, तो वहीं 6 फीसदी के करीब एससी आबादी है, शेष पिछड़ा और सामन्य वर्ग की आबादी है. लोकसभा क्षेत्र के यदि धार्मिक आधार पर देखें तो इलाके में हिन्दु धर्म मानने वालों की संख्या 34.18 फीसदी है.

वहीं ईसाईयों की कुल आबादी 29.25 है, जिसमें सबसे अधिक रोमन चर्च के अनुयायी हैं. वहीं 1.71 फीसदी लोकसभा क्षेत्र में मुस्लिम आबादी है और अन्य धर्म या सरना धर्म मानने वालों की संख्या 32.57 प्रतिशत है.

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घाघरा की आश्रिता मुंडा कहती हैं, मैं वोट देने जाऊंगी अभी ग्रामसभा में तय हो गया है कि गांव के लोग किसे वोट देगें. आश्रिता मुंडा का कहना है कि उसे पत्थलगड़ी के दौरान पुलिस और ग्रामीणों की   झड़प में पुलिस के द्वारा पीटा गया था.

उस वक्त वो गर्भवती थी और खूंटी के घाघरा में पुलिस के द्वारा किए गए बल प्रयोग के एक सप्ताह बाद ही प्रीमेच्योर बच्ची को जन्म दिया. आश्रिता का कहना है कि बच्ची का पैर जन्म से ही मुड़ा हुआ है.

वो कहती है कि क्या सरकार हमारी बच्ची के इलाज में सहायता नहीं करेगी, साथ ही कहा कि क्या कसूर था जो इस नवजात का जो पुलिस की पिटायी की शिकार बनी.

ग्रामसभा की बैठक में तय हुआ- किसे वोट देना है

खूंटी लोकसभा क्षेत्र के खुंटकटी गांव में ग्रामसभा की बैठक बृहस्पतिवार को होती है. अमूमन इस इलाके में हर बृहस्पतिवार को ग्रामसभा की बैठक की होती है. यह सप्ताहिक बैठक 100  गांवों में निरंतर होता रहता है. इस इलाके में मुंडाओं का सामाजिक तानाबाना काफी मजबूत है. इसे इलाके के छ: दर्जन से अधिक गांवों में पथलगड़ी भी किया गया था.

जहां पांचवी अनुसूची को लागू करने की मांग अभी भी लोगों के जेहन में है. सोसोडीह, कुंडी, खंटगा, घाघरा, कुदड़ी,बरूडीह, संगा,कोचांग, डोलडा, बीरबांकी जैसे गांव में वोट को लेकर एक बार चर्चा हो चुका है और गुरूवार होने की वजह से बैठक में तय भी कर लिया गया है कि किसे वोट देना है.

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