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श्रम विभाग : एडवाइजरी कमेटी की बैठक महज खानापूर्ति, न प्रोसिडिंग और न ही हुई कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने दिया था एडवाइजरी कमेटी की बैठक कर न्यूनतम मजदूरी तय करने का निर्देश

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Ranchi :  न्यूनतम मजदूरी दर निर्धारण को लेकर पिछले पांच सालों में राज्य में कोई पहल नहीं की गई. श्रम नियोजन विभाग की सुस्ती का हाल ये है कि विभाग न्यूनतम मजदूरी को लेकर होने वाली बैठकों की प्रोसिडिंग तक नहीं बना पाई है. सुप्रीम कोर्ट की ओर से अक्टूबर 2018 के अंत में निर्देश दिया गया था कि सभी राज्य सरकार एडवाइजरी कमेटी की बैठक कर जल्द से जल्द न्यूनतम मजदूरी का निर्धारण कर लें.

जिसके बाद तीन महीने की अवधि खत्म होने के मात्र तीन दिनों पहले आनन-फानन में राज्य में 28 जनवरी 2019 को श्रम विभाग की ओर से एडवाइजरी कमेटी की बैठक की गई. यह बैठक महज एक खानापूर्ति की ही तरह थी. जिसमें अलग-अलग श्रम संगठन, विभागीय अधिकारी और बड़ी कंपनियों के मालिक मौजूद थे. वहीं बैठक के बाद विभाग ने इसपर कोई कार्रवाई नहीं की.

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जबकि सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्य सरकारों को इसके लिए तीन माह का समय दिया गया था. ऐसे में राज्य में पांच माह बीत जाने के बाद भी इसपर कोई कार्रवाई नहीं की गई. राज्य के विभिन्न श्रम संगठनों की ओर से इस संबध में कई बार आंदोलन भी किया गया.

सुप्रीम कोर्ट ने उक्त निर्देश दिल्ली में आम आदमी पार्टी के न्यूनतम मजदूरी में 37 फीसदी इजाफा करने पर कंपनियों के मालिक पक्ष की ओर से की गई याचिका को खारिज करते हुए दिया था.

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प्रोसिडिंग तक नहीं बनी है

28 जनवरी को विभाग की ओर से की गई बैठक की प्रोसिडिंग भी अब तक नहीं बन पाई है. कई श्रम संगठनों के प्रतिनिधियों से जब बात की गई तो उन्हेांने कहा कि बैठक की प्रोसिडिंग तक नहीं मिल पाई है. जबकि अब तक मिनट टू मिनट प्रोसिडिंग मिल जानी चाहिए थी.

साथ ही बैठक में किन-किन विषयों पर बात हुई, क्या निर्णय लिए गए आदि के विवरण विभाग की ओर से सरकार को सौंप देना चाहिए. श्रम विभाग के एक वरीय अधिकारी ने जानकारी दी कि मामला अभी डंप है. अधिकारी ने कहा कि, अनौपचारिक रूप से बता रहे हैं कि इस संबंध में कोई काम नहीं किया जा रहा है.

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चुनाव के कारण मामला रोक दिया गया है. जब उनसे पूछा गया कि फिर तो विधानसभा चुनाव के बाद ही कार्य किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि ऐसा भी नहीं है. जानकारी हो कि बैठक को तीन महीने हो चुके हैं. जबकि राज्य के ही अन्य विभाग हैं, जो विभागीय कार्यों का निबटारा कर रहे हैं.

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18,000 न्यूनतम मजदूरी तय करने की है मांग

कई आंदोलनों में राज्य के श्रम संगठनों ने राज्य में न्यूनतम मजदूरी 18,000 करने की मांग की है. एडवाइजरी कमेटी की बैठक में भी इस बात पर चर्चा की गई थी. सीटू महासचिव प्रकाश विप्लव ने जानकारी दी कि सभी संगठनों ने न्यूनतम मजदूरी 18,000 करने की मांग की, जिसे मालिक पक्ष की ओर से सिरे से नकारा गया.

ऐसे में विभाग का फैसला काफी अहम है कि कितनी फीसदी विभाग इसमें इजाफा करती है. श्रम समवर्ती सूची में आती है. ऐसे में राज्य सरकार को इसपर जल्दी निर्णय लेना चाहिए.

चुनाव के पूर्व ही बैठक हो गई थी, ऐसे में प्रोसिडिंग तक नहीं बनना आश्चर्य की बात है. वहीं एक्टू के महासचिव शुभेंदू सेन ने कहा कि विभाग मजदूरों के अधिकारों के प्रति संवेदनशील नहीं है. वर्तमान में न्यूनतम मजदूरी 272 रूपये है. जो काफी कम है. ऐसे में इस मामले में कार्रवाई जल्द करनी चाहिए.

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