न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

स्लम के बच्चों को पढ़ाने वाले ललन लगा रहे 3 साल से शौचालय की फरियाद, अब बोरा और चटाई के भरोसे हैं छात्र

1,543

Chhaya

Ranchi : स्वच्छता अभियान चलाया जा रहा है. लेकिन समझ नहीं आता यह कैसा अभियान है. ये कहना है ललन मिश्रा का. जो थल सेना से 2006 में रिटायर हुए. 2017 ये स्लम बस्ती के बच्चों को पढ़ा रहे हैं. हरमू हाउसिंग कॉलोनी निवासी ललन मिश्रा 26 सालों तक थल सेना में कार्यरत रहे. 2006 के बाद इन्होंने कुछ बिजनेस भी किया. लेकिन उस काम में इनका मन नहीं लगा. फिर कुछ नया और अलग करने की ठानी, फिर क्या था स्लम बस्ती के बच्चों को पढ़ाने का काम इन्होंने शुरू किया.

JMM

हरमू स्थित श्री शिव महिमा मंदिर में दोपहर बाद इनकी क्लास लगती है. अधिकतर बच्चे हरमू बस्ती से ही पढ़ने इनकी क्लास में आते हैं. काफी खेद के साथ ललन बताते हैं कि बच्चों के लिए इन्होंने पढ़ने के लिए एक कमरा तो बना लिया है.

इसे भी पढ़ें – #Dhullu तेरे कारण : विजय झा ने कहा, शोषित और वंचित लोगों के साथ खड़ा रहता हूं, इसलिए परेशान करते हैं ढुल्लू

लेकिन सबसे बड़ी समस्या टॉयलेट की है. जोसबसे ज्यादा परेशानी तो लड़कियों के लिये होती है. इन्होंने बताया कि 2017 में ही नगर निगम से मंदिर के समीप शौचालय बनाने की मांग की गयी थी. अपर नगर आयुक्त को पत्र भी दिया गया.

लेकिन अब तक शौचालय नहीं बना. जबकि इनके पास लगभग पंद्रह बच्चियां पढ़ती हैं. इन्होंने बताया कि नगर निगम की ओर से जब शौचालय का निर्माण नहीं कराया गया तो इन्होंने अपने प्रयास से ही बोरा और चटाई बांधकर बच्चों के लिए शौचालय बनाया है. खीझ खाते हुए इन्होंने कहा कि देश में क्या स्वच्छता अभियान चल रहा पता नहीं.

इसे भी पढ़ें – जानें #JharkhandGovernment की आंगनबाड़ी बहनें राजभवन के सामने क्यों मांग रहीं भीख

एक बच्चे से की शुरूआत

एक बच्चे से की गयी शुरूआत और अब लगभग 35 से 40 बच्चों को पढ़ा रहे ललन. इन्होंने बताया कि सेना से रिटायरमेंट के बाद अक्सर शाम के वक्त ये मंदिर आते थे. जहां स्लम बस्ती के बच्चों को ये मंदिर में फूल, प्रसाद आदि चुनते देखते थे. साल 2017 की बात है, एक दिन इन्होंने एक बच्चे से बात की.

बात के दौरान बच्चे ने बताया कि वो पढ़ना तो चाहता है. लेकिन उसके अभिभावक इस पर ध्यान नहीं देते. बच्चे के पास कॉपी पेंसिल तक नहीं थी. ऐसे में ललन ने हर शाम उस बच्चे को मंदिर के पास बुलाया और खुद कॉपी पेंसिल देकर पढ़ाना शुरू किया और धीरे-धीरे कई बच्चे आने लगे और इन्होंने उनको पढ़ाना शुरू किया.

इसे भी पढ़ें – #JharkhandAssembly उद्घाटन में नेता प्रतिपक्ष का नाम नहीं, जेएमएम ने विधायकों को विशेष सत्र में ना जाने को कहा!

पहले मंदिर के आंगन में पढ़ाते थे, लोगों के सहयोग से बनाया एक कमरा

इन्होंने बताया कि लगभग ढाई साल तक बच्चों को मंदिर के आंगन में पढ़ाते थे. ऐसे में बारिश या आंधी-तूफान से बच्चों को काफी परेशानी होती थी. मंदिर से सड़क सटा है और ऐसे में वहां से गुजरने वाली गाड़ियों के शोर से दिक्क्त होती थी. इसके अलावा बच्चों के दुर्घटनाग्रस्त होने का भय भी था.

ललन मिश्रा ने बताया कि हरमू हाउसिंग कॉलोनी के लोगों ने इसमें काफी सहयोग किया. कुछ ने ईंट दी, किसी ने बालू और सीमेंट दिया तो किसी ने मजदूरी भी दी. ऐसे में बच्चों के पढ़ने के लिए एक कमरा बनाया गया. जिसमें अब बच्चे पढ़ रहे हैं. इस कमरे में रात में मजदूर भी रहते हैं. आसपास के लोगों ने सिर्फ कमरा ही नहीं, बच्चों के बैठने के लिए कारपेट, पेंसिल, कॉपी और खाने पीने की चीजें भी दीं. जिसे बच्चों के लिए उसी कमरे में रखा जाता है.

एक बच्चे का कराया डीएवी कपिलदेव मे एडमिशन

अक्षर ज्ञान होने के बाद ललन मिश्रा ने डीएवी कपिलदेव में एक बच्चे का एडमिशन भी कराया. एडमिशन बीपीएल कोटा से कराया. इन्होंने बताया कि ये बच्चों को स्वच्छता, स्वास्थ्य की भी जानकारी देते हैं. अपने खर्च से बच्चों के बाल कटाते हैं. जहां ये बच्चे क्लास लेते हैं, वहां हमेशा   फर्स्टेड बॉक्स भी भी रखते हैं. जिसमें कुछ छात्र भी इनका सहयोग करते हैं.

स्थानीय निवासी सोनी सिन्हा इन बच्चों को पढ़ाने के साथ, इन्हें योग और व्यायाम भी सीखाती हैं. ललन मिश्रा साल 1980 से 2006 तक सेना में रहे और जूनियर कमिशन के पद से रिटायर हुए.

इसे भी पढ़ें – रांची की धरती से #PMModi ने देश को दी सौगात, तीन योजनाओं की शुरुआत

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like