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पिछली बार नरेंद्र मोदी के खिलाफ लड़ा था चुनाव, इस बार रांची लोकसभा से चुनावी मैदान में

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Kumar  Gaurav

Ranchi: जयप्रकाश प्रसाद, उम्र 47, पता सरिया गिरिडीह. ये नाम आपने शायद पहली बार सुना हो. पर इस नाम से देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र दामोदर दास मोदी का भी नाता है. ऐसा इसलिए क्योंकि अपने चाहने वाले को तो लोग भले भूल जाएं पर खिलाफ बिगूल फूंकने वालों को नजरअंदाज कर पाना बहुत मुश्किल है.

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जयप्रकाश प्रसाद ने 2014 के नरेंद्र मोदी की लहर वाले चुनाव में नरेंद्र मोदी के खिलाफ ही निर्दलीय उम्मीदवार के रूप  में चुनाव लड़ा था. जयप्रकाश का कहना है कि इस बार भी उनकी योजना मोदी के खिलाफ ही चुनाव लड़ने की थी.

पर परिस्थिति की वजह से इसबार रांची से मैदान में हैं. 2014 से लेकर अबतक ये छह बार विभिन्न जगहों से चुनाव, उपचुनाव लड़ चुके हैं. मोदी के खिलाफ चुनाव में इन्हें 44 उम्मीदवारों में से 22वें स्थान पर थे.

जयप्रकाश ने साफ कर दिया कि वे चुनाव अपने आंदोलन को एक दिशा देने के लिए लड़ रहे हैं. चुनाव जीतना इनका मकसद नहीं है.

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“भ्रष्टाचार जिंदाबाद” के नारों से गूंज चुका है बनारस अब गुंजेगी रांची

“भ्रष्टाचार जिंदाबाद” के नारों से रांची की गलियां चुनाव तक गुंजेंगी. भ्रष्टाचार जिंदाबाद जयप्रकाश के चुनावी कैंपेन का नारा होगा.

इनके चुनाव प्रचार का माध्यम इसी बोल पर तैयार किया गया गाना होगा. साथ ही पंपलेट के माध्यम से ये चुनाव करेंगे.

जयप्रकाश ने बताया कि वे डोर टू डोर कैंपेन भी करेंगे. बनारस लोकसभा से 2014 में इन्हें 1361 वोट मिले थे. इनका चुनाव चिन्ह नारियल छाप था.

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30 जनवरी से मोरहाबादी गांधी प्रतिमा के सामने बैठे हैं धरना में

जयप्रकाश से रांची से चुनाव लड़ने का जब प्रमुख कारण पूछा तो उन्होंने बताया कि मैं सरिया में रेलवे ओवरब्रिज के निर्माण की मांग को लेकर 30 जनवरी से धरना में बैठा हूं.

रेलवे की टीम स्वाइल टेस्टिंग 2013 में ही कर चुकी है. पर राज्य सरकार की तरफ से इसे बनवाने की दिशा में अबतक कोई पहल नहीं की गयी है. धरना के 74 दिन बीत जाने के बाद भी अब तक सरकार या प्रशासन की ओर से किसी ने भी सुध नहीं ली.

किसी ने ये तक नहीं जाना कि मेरे पास यहां बैठने की स्वीकृति है भी या नहीं. एक छोटी सी मांग को लेकर धरने पर हूं. सबका साथ सबका विकास वाली ये सरकार से मैं पूछता हूं कि क्या सरिया झारखंड में नहीं है वहां का विकास उनकी प्राथमिकता क्यों नहीं है.

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2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ चुनाव प्रचार के लिए छपवाया गया पर्चा.

संविधान की खामियों को उजागर करना था मकसद

जयप्रकाश प्रसाद से जब हमने जानना चाहा कि मोदी लहर में मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने का मकसद क्या था. इसके जवाब में उन्होंने बताया कि मैंने संविधान की खामियों को उजागर करने के लिए चुनाव लड़ा था.

उन्होंने कहा कि जब आईएएस से लेकर चपरासी तक के लिए योग्यता तय है, तो फिर अनपढ़ हमारा जनप्रतिनिधि क्यों होगा. जब हम अपने घर में क्रिमिनल बैकग्राउंड के लोगों को आने नहीं देते तो हमारा जनप्रतिनिधि क्रिमिनल बैकग्राउंड का क्यों हो.

उन्होंने बताया कि भारत के संविधान को खोखला कर रहे हैं ऐसे लोग.दुष्कर्मी क्या कानून बनाएंगे, क्रिमिनल देश के हित में क्या काम करेंगे.

सातवीं बार लड़ रहे हैं चुनाव

जयप्रकाश प्रसाद का ये सातवां चुनाव हैं. सबसे पहले इन्होंने 2009 में बगोदर विधानसभा से चुनाव लड़ा था. 2011 में जमशेदपूर लोकसभा उपचुनाव लड़ा था. 2014 में नरेंद्र मोदी के खिलाफ बनारस से लोकसभा चुनाव लड़ा था.

उसके बाद बगोदर से विधानसभा चुनाव लड़ा. 2016 में गोड्डा उपचुनाव भी लड़ चुके हैं और अब रांची लोकसभा से निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं.

2014 में बनारत के चुनाव में जयप्रकाश को आवंटित चुनाव चिह्न नारियल छाप.

इंटर पास है जयप्रकाश प्रसाद, 46 लाख की है संपत्ति

इंटर पास जयप्रकाश प्रसाद ने 12 अप्रैल को रांची से पर्चा भर दिया है. इन्होंने चुनाव आयोग को संपत्ति का ब्यौरा दिया है उसमें इनकी कुल चल, अचल संपत्ति करीब 46 लाख की है.

इनके खुद के पास 1.7 लाख नकद और पत्नी के पास 91 हजार रुपये नकद हैं. बैंक में दोनो के पास 2.15 लाख और 65 हजार की एफडी है. 1.80 लाख के जेवरात और 41.75 लाख रुपये की जमीन हैं. इनपर एक भी आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है.

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