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जानें झारखंड के बारे में क्या बोल रहे हैं मीडिया हाउसेस के एग्जिट पोल

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Ranchi: 19 मई को आखिरी फेज का मतदान खत्म होते ही, तमाम मीडिया हाउस के एग्जिट पोल ने अपने आंकड़े पेश करने शुरू कर दिये. सभी ने यह अनुमान जताया है कि इस बार भी बीजेपी के नेतृत्व में एनडीए सरकार बनाने की स्थिति में है. हर राज्य में किसे कितनी सीटें मिलेंगी, यह बताने की कोशिश की गयी है. लेकिन झारखंड की बात करें, तो तमाम मीडिया हाउस के एग्जिट पोल में काफी असमानता है. झारखंड में बीजेपी ने 13 सीटों पर और एक सीट पर सहयोगी पार्टी आजसू ने चुनाव लड़ा है. जबकि महागठबंधन की ओर से 7 सीटों पर कांग्रेस, चार पर झामुमो, दो पर झाविमो और दो सीटों पर राजद ने चुनाव लड़ा है.

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किस चैनल ने दी कितनी सीटें

  • आज तक के एक्जिट पोल की बात करें तो झारखंड में महागठबंधन का सूपड़ा साफ होता दिख रहा है. यहां की 14 सीटों में से एनडीए को 12 से 14 सीटें मिलने का अनुमान है. जबकि यूपीए को शून्‍य से दो सीटें मिलती दिख रही हैं.
  • ABP न्यूज का कहना है कि झारखंड की 14 सीटों में से आठ सीटें एनडीए को और छह सीटें यूपीए को मिलती दिख रही हैं.
  • इंडिया टीवी का कहना है कि झारखंड की 14 में से 13 सीटें बीजेपी के खाते में जा सकती है. जबकि यूपीए को एक ही सीट मिलने का अनुमान है.
  • सी-वोटर का कहना है कि झारखंड में बीजेपी यूपीए से पिछड़ रही है. सी-वोटर का अनुमान है कि सिर्फ छह सीटें बीजेपी को और बाकी की आठ सीटें यूपीए के खाते में जा सकती हैं.
  • सीएनएक्स के एग्जिट पोल की बात करें तो यहां बीजेपी को नौ, जेएमएम को तीन और कांग्रेस को दो सीट मिल सकती हैं.
  • NDTV के पोल ऑफ एग्जिट पोल्स (Poll of Exit Poll 2019) के अनुसार झारखंड की 14 लोकसभा सीटों में से बीजेपी औऱ आजसू की गठजोड़ को आठ सीटें मिलने का अनुमान है, तो वहीं कांग्रेस, झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) समेत अन्य गठबंधन के खाते में 5 सीटें आ सकती हैं.
  • India News और Polstrat के एग्जिट पोल के अनुसार एनडीए को 8 और महागठबंधन को 5 सीटें मिल सकती हैं.

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जानें क्या है एग्जिट पोल

एग्जिट पोल एक तरह का सर्वे होता है, जिसे कुछ कंपनियां और संस्थान मिल कर कराते हैं. वोट देकर निकलने के ठीक बाद मतदाताओं से पूछा जाता है कि उन्होंने किसे वोट दिया. ठीक उसी तरह जैसे ओपीनियन पोल में जनता से यह पूछा जाता है कि वह किसको वोट देनेवाले हैं. एग्जिट पोल हमेशा ठीक नहीं होते हैं. कई बार एग्जिट पोल गलत भी साबित हुए हैं. एक्जिट पोल इस धारणा के तहत किये जाते हैं कि व्यक्ति जब वोट देकर निकलता है तो वह सही बोलता है. एक समय तो यह धारणा एक हद तक सही थी, लेकिन समय के साथ लोगों का रुख-रवैया बदला है. वोटर समझदार हो गये हैं. वे मुश्किल से ही सच बयान करते हैं.

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कब हुई शुरुआत

1996 के लोकसभा चुनाव के समय भारत में पहला एक्जिट पोल हुआ. इसे दूरदर्शन पर दिखाया गया. दूरदर्शन को एंकर टीवी टुडे ने मुहैया कराये. दूरदर्शन ने ये एक्जिट पोल सीएसडीएस से करवाया था. अगला एक्जिट पोल 1998 में हुआ. जिसे चार कंपनियों ने किया. ये वही समय था, जब प्राइवेट न्यूज चैनल्स उभर रहे थे.

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