न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

#LIC की जमापूंजी भी लुटने की कगार पर, ढाई माह में हुआ 57000 करोड़ का नुकसान

14,250

Girish Malviya

भारतीय जीवन बीमा निगम देश के सबसे बड़े संस्थागत निवेशकों में शुमार है, रिजर्व बैंक के बाद एलआईसी सबसे ज्यादा मुनाफा कमाने वाली सरकारी कंपनी है. लेकिन मोदी सरकार के राज में भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) का इस्तेमाल दुधारु गाय की तरह होता है

Jmm 2

खबर आई है कि पिछले ढाई महीने में ही LIC को शेयर बाजार में निवेश से 57,000 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है. एलआईसी ने जिन कंपनियों में निवेश किया है कि उनमें से 81 फीसदी के बाजार मूल्य में गिरावट आई है.

एलआईसी ने सबसे ज्यादा आईटीसी में निवेश कर रखा है, उसके बाद एसबीआई, ओएनजीसी, एलऐंडटी, कोल इंडिया, एनटीपीसी, इंडियन ऑयल और रिलायंस इंडस्ट्रीज में निवेश है.

बिजनेस स्टैंडर्ड के मुताबिक, जून तिमाही के अंत तक शेयर बाजार में लिस्टेड कंपनियों में एलआईसी का निवेश मूल्य 5.43 लाख करोड़ रुपये का था, लेकिन अब यह घटकर महज 4.86 लाख करोड़ रुपये रह गया है. इस तरह महज ढाई महीने एलआईसी के शेयर बाजार में निवेश को 57,000 करोड़ रुपये की चपत लग चुकी है…..

Bharat Electronics 10 Dec 2019

इसे भी पढ़ें – 13 माह का वेतन देने के फैसले से गुस्से में हैं राज्य के 58 हजार जवान, पढ़ें, क्या कह रहें हैं जवान..

RBI के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च 2019 तक एलआईसी ने अब तक कुल मिलाकर 26.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है. जिसमें से अकेले पब्लिक सेक्टर की कंपनियों में 22.6 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया है, और लगभग 4 लाख करोड़ रुपये निजी क्षेत्र में लगाए गए हैं.

पब्लिक सेक्टर की सरकारी कम्पनियों की हालत तो मोदी राज में बहुत खराब हो गयी हैं, लेकिन अब तो निजी क्षेत्र भी पिटा रहा है.

एलआईसी से ऐसी कई कंपनियों में निवेश करवाया गया है, जो दिवालिया होने की कगार पर हैं। ऐसी कई कंपनियों की याचिका राष्ट्रीय कंपनी कानून ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) द्वारा दिवालियापन की प्रक्रिया (आईबीसी) के तहत स्वीकार कर ली गयी हैं, इस सूची में आलोक इंडस्ट्रीज,एबीजी शिपयार्ड, अम्टेक ऑटो, मंधाना इंडस्ट्रीज, जेपी इंफ्राटेक, ज्योति स्ट्रक्चर्स, रेनबो पेपर्स और ऑर्किड फार्मा जैसे नाम शामिल हैं. Lic को सबसे बड़ा नुकसान IL&FS में झेलना पड़ रहा है.

इसे भी पढ़ें – धनबाद विधानसभा सीट के लिए #BJP ने शॉर्टलिस्ट किये पांच नाम, सीटिंग MLA की छुट्टी संभव

इस कंपनी में एलआईसी की 25.34 फीसदी की हिस्सेदारी है. आईएलएंडएफएस समूह पर कुल 91,000 करोड़ रुपये से अधिक का कर्ज है और उसे धन की भारी कमी से जूझना पड़ रहा है। कंपनी पिछले अगस्त के बाद से ही लगभग डिफाल्टर की स्थिति में है.

पिछले साल LIC को सरकार के दबाव में आईडीबीआई बैंक में 51 फीसदी हिस्सेदारी खरीदने के लिए 12 हजार 600 करोड़ रुपये का भुगतान करना पड़ा है. IDBI बैंक देश के बीमारू सरकारी बैंकों में सर्वाधिक एनपीए अनुपात वाला बैंक माना जाता है.

एलआईसी में देश की अधिकांश जनता की जमा-पूंजी है और वह प्रतिवर्ष अपनी बचत से हजारों-लाखों रुपये निकालकर एलआईसी की पॉलिसी में डालता है. इस पैसे के सहारे उसका और उसके परिवार का भविष्य सुरक्षित रहता है.

मोदी राज में तो बहुत पहले से इस पैसे की लूट शुरू हो गयी थी. पहले भी समय-समय पर लेख लिखकर आपको LIC की बिगड़ती स्थिति के बारे में आगाह किया है पर अब तो पानी सर तक आ गया है…

इसे भी पढ़ें – #NarendraModi की पत्नी ने परिजनों के साथ कल्याणेश्वरी मंदिर में की पूजा-अर्चना

(लेखक आर्थिक मामलों के सलाहकार हैं, ये इनके निजी विचार हैं)

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like