न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

छह माह से सदर अस्पताल में नहीं है जीवन रक्षक दवाईयां, मरीजों को भेजा जाता है बाहर

लगभग 300 मरीज रोजाना आते हैं इलाज कराने, 450 करोड़ की लागत से किया गया था नए भवन का निर्माण

1,426

Ranchi:  मरीजों को अत्याधुनिक सुविधाएं देने के वायदे के साथ 450 करोड़ की लागत से सदर अस्पताल नये भवन का उद्घाटन किया गया. लेकिन यहां अत्याधुनिक सुविधाएं क्या, यहां तो मरीजों को दवाईयां भी नहीं मिलती. अस्पताल परिसर स्थित दवाईखाने में पिछले छह महीने से जीवन रक्षक दवाईयों की सप्लाई नहीं हुई है. जिससे मरीजों को ये दवाई नहीं मिल पाती है. अलग-अलग विभागों को छोड़ दे तो और सिर्फ ओपीडी को देखें. तो यहां प्रतिदिन लगभग 250 से 300 मरीज आते हैं. ऐसे में यहां दवाईयों की मांग अधिक होती है. कुछ नर्सों ने जानकारी दी कि कई बार मरीज दवाई नहीं मिलने की शीकायत लेकर आते हैं. लेकिन दवाई नहीं होने के कारण उन्हें बाहर से लेने की सलाह दी जाती है.

क्या होती है जीवन रक्षक दवाईयां

Trade Friends

जीवन रक्षक दवाईयां ऐसी दवाईयों को कहा जाता है जो मेडिकल इमरजेंसी में इस्तेमाल की जाती हैं. इससे न सिर्फ आपातकाल में रोगी को बचाया जा सकता है, बल्कि आने वाली स्वास्थ्य संबधी समस्याओं के निदान में भी सहायता मिलती है. वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन के अनुसार, ये दवाईयां कैंसर, एचआईवी जैसी बीमारियों में काम आती है. इन लाइफ सेविंग ड्रग्स की संख्या कम से कम 74 है.

जन औषधि की हालत भी खस्ता

अस्पताल परिसर में स्थित दवाखाना

इसी भवन परिसर में जन औषधि केंद्र भी है. लेकिन यहां भी मात्र 50 से 60 दवाईयां उपलब्ध रहती हैं. ऐसे में मरीजों को न ही अस्पताल के दवा केंद्र और न ही जन औषधि केंद्र से ही दवाई मिल पाती है.

गर्भवती महिलाओं को नहीं मिल रही कैल्शियम की दवाई

WH MART 1

अस्पताल में बुंडू, कांके, नगड़ी, अनगड़ा समेत दूरस्थ क्षेत्रों से गर्भवती महिलाएं आती है. लेकिन दवाईयों की कमी के कारण महिलाओं को कैल्शियम तक की दवाई नहीं मिलती. कई महिलाओं से बात करने से जानकारी हुई कि कुछ दवाईयां तो मिल जाती हैं. लेकिन जब भी इलाज के लिए आते तो दवाई लेने बाहर ही जाना पड़ता है.

ईयर और आई ड्रॉप की जगह एंटीबायोटिक

यहां आंख और कान दिखाने एक दिन में लगभग 80 मरीज आते हैं. जिसमें अलग-अलग समस्या के मरीज आते हैं. यहां स्थित दवाखाना में लंबे समय से ईयर और आई ड्रॉप की सप्लाई नहीं हुई. जिससे मरीजों को परेशानी होती है. खुद डॉक्टर अंशु टोप्पो ने जानकारी दी कि मरीजों को यहां से ड्रॉप्स तो नहीं मिल पाता. ऐसे में उन्हें एंटीबायोटिक दिया जाता है. उन्होंने बताया कि तीन-तीन माह में दवाई लाने की सूचना तो दी जाती है.

सूची के हिसाब से आती है दवाईयां

इस संबध में जब सिविल सर्जन डॉ विजय बहादुर प्रसाद से बात की गई तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि जीवन रक्षक दवाई नहीं है. हां, कुछ दवाईयों की कमी है. जिसके लिए सरकार के पास राशि आवंटन के लिए आवेदन दिया गया है. अस्पताल में एक सूची है इसी के हिसाब से दवाईयां आती है. ईयर और आई ड्रॉप के बारे में उन्होंने कहा कि दवाईयां आती हैं.

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

kohinoor_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like