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आसनसोलः #FDI श्रमिक संगठनों की हड़ताल को विफल करने में जुटा प्रबंधन

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ASANSOL:  श्रम संगठनों की कोयला उद्योग में 23 सितंबर से होने वाली हड़ताल को देखते हुए कोयला सचिव सुमंत चौधरी ने प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र लिखा है. कहा है की हड़ताल के दौरान जो कोयला कर्मी काम  पर जाना चाहते हैं, उन्हें समुचित सुरक्षा उपलब्ध करायी जाये. कोल सचिव ने हड़ताल से कोयला उत्पादन व डिस्पैच नहीं होने की स्थिति में पॉवर प्लांट्स का उत्पादन प्रभावित होने की संभावना जतायी है.

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प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के खिलाफ आक्रोश

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मालूम हो की कोयला उद्योग में केंद्र सरकार ने सौ फीसदी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी FDI की मंजूरी दी है. सरकार के इस फैसले से श्रम संगठनों में नाराजगी है. इधर भारतीय मजदूर संघ ने 23 से 27 सितंबर तक पांच दिवसीय हड़ताल का ऐलान किया है. वहीं संयुक्त ट्रेड यूनियन इंटक, एचएमएस, एटक तथा सीटू ने 24 सितंबर को एक दिवसीय हड़ताल करने का निर्णय लिया है.

हड़ताली मजदूरों का वेतन काटने की धमकी

ट्रेड यूनियनों ने हड़ताल नोटिस कोयला सचिव को दिया है. सरकार ने ट्रेड यूनियनों की हड़ताल टालने के लिए रीजनल लेबर कमिश्नर, संयुक्त सचिव आशीष उपाध्याय, कोयला मंत्री प्रहलाद जोशी के साथ ट्रेड यूनियनों की बैठक रखी गयी है.

परंतु सभी श्रम संगठन के प्रतिनिधियों ने सभी के साथ होने वाली बैठक में जाने से इनकार कर दिया और हड़ताल करने पर अडिग रहे. इधर कोल इंडिया के चेयरमैन अनिल कुमार झा ने अपील जारी कर कर्मचारियों से हड़ताल में शामिल नहीं होने का आग्रह किया है.

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उन्होनें हड़ताल को गैर कानूनी बताया है. कहा की काम नहीं तो वेतन नहीं मिलेगा. इस तरह की धमकी से श्रम संगठनों में और गुस्सा भड़क उठा. श्रम संगठनों का कहना है की एक तरफ तानाशाही रवैया अपना रही है केंद्र सरकार तो दूसरी तरफ कोल इंडिया प्रबंधन धमकी दे रहा है.

कोयला मजदूरों की चट्टानी एकता के सामने केंद्र सरकार को घुटने टेकने पड़ेंगे. इधर इसीएल में हड़ताल को विफल करने के लिए प्रदेश की सरकार ने कमर कस ली है. कोयला खदान श्रमिक कांग्रेस के अध्यक्ष एवं महामंत्री से कहा गया की पश्चिम बंगाल की सभी कोयला खानों को खुला रहना चाहिये. सभी कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में मुस्तैद रहकर काम करेंगे.

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