न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

आतंकी अजहर की ढाल बने चीन से नाराज UNSC सदस्यः कहा- कोई और कदम उठाने को हो सकते हैं मजबूर

अमेरिका की ओर से यूएनएससी में कड़ा बयान दिया गया कि अगर चीन लगातार इस तरह की अड़चन बनता रहा, तो जिम्मेदार देशों को कोई और कदम उठाना पड़ेगा.

653

Washington: जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने की भारत की कोशिशों पर चीन ने फिर से पानी फेर दिया है. संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा समिति की बैठक में चीन ने अपने वीटो पावर का इस्तेमाल कर भारत की कोशिशों को धूमिल कर दिया. चीन के इस कदम पर जहां भारत ने कड़ी आपत्ति दर्ज करायी है. वहीं मसूद अजहर को ग्लोबल आतंकी घोषित करने के मार्ग को चीन के चौथी बार बाधित करने से नाराज संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्यों ने चेतावनी दी कि यदि चीन अपनी इस नीति पर अड़ा रहा तो जिम्मेदार सदस्य परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं.

इसे भी पढ़ेंःयोगी के मंत्री का तंज,  भाजपा का राष्ट्रवाद चुनावी दांव,  गरीब राष्ट्रवाद क्या जाने

JMM

UNSC सदस्यों में नाराजगी

सुरक्षा परिषद के एक दूत ने चीन को असामान्य कड़ी चेतावनी देते हुए पीटीआई से कहा, ‘ यदि चीन इस कार्य में बाधा पैदा करना जारी रखता है, तो जिम्मेदार सदस्य देश सुरक्षा परिषद में अन्य कदम उठाने पर मजबूर हो सकते हैं. ऐसी स्थिति उत्पन्न नहीं होनी चाहिए.’ दूत ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह कहा.

सुरक्षा परिषद में एक अन्य दूत ने पीटीआई के सवाल का जवाब देते हुए कहा, ‘चीन ने चौथी बार सूची में अजहर को शामिल किए जाने के कदम को बाधित किया है. चीन को समिति को अपना वह काम करने से रोकना नहीं चाहिए, जो सुरक्षा परिषद ने उसे सौंपा है.’

ज्ञात हो कि संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंध समिति में होने वाला विचार- विमर्श गोपनीय होता है. और इसलिए सदस्य देश सार्वजनिक रूप से इस पर टिप्पणी नहीं कर सकते. इसलिए दूतों ने भी अपनी पहचान गोपनीय रखे जाने का आग्रह किया.

इसे भी पढ़ेंःममता की पीएम मोदी को चुनौती, यदि हिम्मत है, बंगाल से चुनाव लड़ कर दिखायें…

Related Posts

#Gujarat : पर्यटकों के मामले में स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी से आगे निकली स्टेच्यू ऑफ यूनिटी

अनावरण के सालभर बाद ही स्टेच्यू ऑफ यूनिटी को रोजाना देखने आने वाले पर्यटकों की संख्या अमेरिका के 133 साल पुराने स्टेच्यू ऑफ लिबर्टी  के पर्यटकों से ज्यादा हो गयी है.

दूत ने कहा, ‘‘चीन का यह कदम आतंकवाद के खिलाफ लड़ने और दक्षिण एशिया में क्षेत्रीय स्थिरता को बढ़ावा देने के उसके स्वयं के बताए लक्ष्यों के विपरीत है.’’ उन्होंने पाकिस्तान की जमीन पर सक्रिय आतंकवादी समूहों और उसके सरगनाओं को बचाने के लिए चीन पर निर्भर रहने को लेकर पाकिस्तान की भी आलोचना की.

अमेरिका ने भी जताई आपत्ति

अमेरिकी कांग्रेस के सदस्य ब्रैड शेरमैन ने चीन के इस कदम को अस्वीकार्य करार दिया और कहा, ‘ चीन ने एक बार फिर संयुक्त राष्ट्र को उस जैश-ए-मोहम्मद के सरगना मसूद अजहर पर प्रतिबंध लगाने से रोक दिया, जिसने फरवरी में भारत में पुलवामा हमला किया था. मैं चीन से अपील करता हूं कि वह संयुक्त राष्ट्र को अजहर पर प्रतिबंध लगाने दे.’’ हेरिटेज फाउंडेशन के जेफ स्मिथ और अमेरिकन इंटरप्राइज इंस्टीट्यूट के सदानंद धूमे समेत अमेरिकी थिंक टैंक के कई सदस्यों ने भी चीन के इस कदम की निंदा की.

पाकिस्तान के साथ चीन

उल्लेखनीय है कि मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने की भारत की कोशिश को बुधवार को उस समय एक और झटका लगा, जब चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में उसे वैश्विक आतंकी घोषित करने वाले प्रस्ताव पर तकनीकी रोक लगा दी. फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की ‘‘1267 अल कायदा सैंक्शन्स कमेटी’’ के तहत अजहर को आतंकवादी घोषित करने का प्रस्ताव 27 फरवरी को पेश किया था.

गौरतलब है कि 14 फरवरी को जम्मू कश्मीर के पुलवामा में जैश-ए-मोहम्मद के आत्मघाती हमलावर ने सीआरपीएफ के काफिले पर हमला किया था, जिसमें 40 जवानों की मौत हो गई थी. इस हमले के कारण भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है.

इसे भी पढ़ेंःराफेल मामले में पुनर्विचार याचिकाओं के साथ दाखिल दस्तावेज राष्ट्रीय सुरक्षा के लिये संवेदनशील :…

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like