न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

मनरेगा मजदूरों से बंधुआ मजदूरी करा रही है सरकारः जेम्स हेरेंज

मनरेगा कानून के 13 साल पूरे होने पर ग्राम स्वराज मजदूर संघ व झारखंड नरेगा वॉच के बैनर तले मनिका में रैली निकाली गयी

1,682

Manika: मनरेगा कानून के 13 साल पूरे हो गये हैं. इस मौके पर सात सूत्री मांगों को लेकर ग्राम स्वराज मजदूर संघ व झारखंड नरेगा वॉच के बैनर तले मनिका प्रखंड मुख्यालय स्थित हाई स्कूल के मैदान से हर हाथ को काम दो, काम का पूरा दाम दो नारे के साथ रैली निकाली गयी. साथ ही प्रखंड परिसर में जागरूकता सम्मेलन किया गया. इसमें मनरेगा को लेकर सरकार की शिथिलता और इसमें व्याप्त भ्रष्टाचार को लेकर आक्रोश व्यक्त किया गया. सम्मेलन में रखंड नरेगा वॉच के राज्य संयोजक जेम्स हेरेंज ने कहा कि दुनिया में चर्चित राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी कानून 20005 की बुनियाद भारत में रखी गयी थी. जिसमें ग्रामीण क्षेत्र के सभी अकुशल श्रमिकों को साल में 100 दिन गारंटीयुक्त रोजगार देने की बात कही गयी थी. झारखंड जैसे गरीब राज्य के लिए यह कानून वरदान साबित हो सकता है. लेकिन यहां के लचर सरकारी तंत्र और राजनीतिक प्राथमिकता के अभाव में कानून का पूरा लाभ राज्य के किसानों एवं श्रमिकों को नहीं मिल पा रहा है. कहा कि राज्य भर में प्रखंड कार्यक्रम अधिकारी के कुल 413 पद स्वीकृत हैं, जिसमें 171 पद खाली हैं. सहायक अभियंताओं के 261 स्वीकृत पदों में सिर्फ 123 कार्यरत हैं. कनीय अभियंता के लिए 846 पद स्वीकृत हैं, जिसमें से मात्र 481 ही कार्यरत हैं. कम्प्यूटर सहायकों के लिए 261 में सिर्फ 142 कार्यरत हैं. इसी प्रकार लेखा सहायकों के 261 पद सृजित हैं और 157 कार्यरत हैं. ग्राम रोजगार सेवकों के 585 पद खाली पड़े हैं. ऐसे में मनरेगा के कार्यान्वय काफी मुश्किल से किया जा रहा है.

मजदूरों को 71 रुपये कम मिल रही है मजदूरी

श्री हेरेंज ने कहा कि मजदूरी दर कानून की धारा 6 (1) के कहता है. न्यूनतम मजदूरी अधिनियम, 1948 में किसी बात के होते हुए भी, केन्द्रीय सरकार इस अधिनियम के प्रयोजनों के लिए अधिसूचना द्वारा मजदूरी दर विनिर्दिष्ट करेगी. राज्य के मनरेगा श्रमिकों के  लिए यह दूसरा साल है, जिसमें 168 रूपये मनरेगा मजदूरी का प्रावधान है. जबकि राज्य की न्यूनतम मजदूरी दर 239 रूपये है. इस हिसाब से मनरेगा श्रमिकों को 71 रूपये प्रतिदिन कम भुगतान किया जा रहा है. यह सरकार एक प्रकार से श्रमिकों के साथ बंधुआ मजदूरी करा रही है. जगरूकता सम्मेलन के बाद मजदूरों द्वारा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और झारखंड के मुख्यमंत्री को प्रखंड विकास पदाधिकारी के द्वारा 7 सूत्री मांग प्रत्र सौपा गया.

Jmm 2

संघर्ष के बाद मिला है मनरेगा कानून

सम्मेलन में शामिल मनरेगा मजदूरों शांति देवी ने कहा कि मनरेगा कानून बहुत संघर्ष के बाद मिला. आज हम लोगों ने 13 साल पूरा किया है. मगर वहीं सरकार मजदूरों के साथ अन्याय कर रही है. आज 13 वर्षों के बाद भी मात्र 168 रुपये मजदूरी ही मिल पा रही है. उन्होंने कहा कि मनरेगा में कम से कम 300 रुपये मजदूरी और 15 दिन के अंदर भुगतान होना चाहिए.  क्योंकि मनरेगा ही ऐसा कानून है, जो गांव व मजदूरों को खुशहाल बना सकता है. उन्होंने कहा कि सरकारी तंत्र में फैले भ्रष्टाचार के कारण मनरेगा में लूट मची है. उन्होंने यह भी कहा कि एक साजिश के तहत मनरेगा को तकनीकि मकड़जाल में फंसा कर कमजोर किया जा रहा है.

सम्मेलन में इनका रहा योगदान

सम्मेलन में ग्राम स्वराज मजदूर संघ के अध्यक्ष कमलेश  उरांव,  शांति देवी,  सुख्मणी देवी,  सुमित्रा देवी,  नेमी देवी, शिला देवी सहित सौकड़ों की संख्या में मनरेगा मजदूरों ने भाग लिया. कार्यक्रम को सफल बनाने में आश्रिता तिर्की, एनसीडीएचआर से मिथिलेश कुमार, ग्राम स्वराज मजदूर संघ व नरेगा सहायता केंद्र से पचाठी सिंह, अमरदयाल सिंह, नन्हकू सिंह, कलवती कुमारी, मनोज कुमार सिंह, दिलीप रजक, राजेंद्र सिंह, जितेंद्र सिंह, महादेव सिंह, बालकी सिंह, आश्रिता तिर्की सहित कई अन्य का सहयोग रहा. कार्यक्रम को संचालन लालबिहारी सिंह ने किया.

इसे भी पढ़ेंः अजीम प्रेमजी यूनिवर्सिटी बेंगलुरू के छात्रों सर्वेक्षण में खुलासा, झारखंड के प्रज्ञा केंद्रों में हो रही है अधिक वसूली

Bharat Electronics 10 Dec 2019

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like