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कंपनियों के निजीकरण की दिशा में मोदी सरकार का बड़ा कदम, BPCL, जहाजरानी निगम, कॉनकार में बेचेगी हिस्सेदारी 

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New Delhi: सरकार ने बुधवार को निजीकरण की दिशा में बड़ा कदम उठाया. मोदी सरकार ने तीन बड़ी कंपनियों के निजीकरण करने का फैसला लिया है. इन तीनों कंपनियों में सबसे अहम है भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लि. (बीपीसीएल) जो कि लंबे समय से घाटे में चल रही थी. जिसे सरकार ने बेचने का फैसला किया है.

वहीं इसके अलावा पोत परिवहन कंपनी भारतीय जहाजरानी निगम (एससीआई) और माल ढुलाई से जुड़ी कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (कॉनकार) में सरकारी हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी. साथ ही चुनिंदा सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों में हिस्सेदारी को 51 प्रतिशत से नीचे लाने को मंजूरी दी है.

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BPCL में सरकार की 53.29% हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार शाम को हुई मंत्रिमंडल की आर्थिक मामलों की समिति (सीसीईए) की बैठक के बाद वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र की देश की दूसरी सबसे बड़ी रिफाइनरी कंपनी बीपीसीएल से नुमालीगढ़ रिफाइनरी को अलग किया जायेगा. उसके बाद प्रबंधन नियंत्रण के साथ बीपीसीएल में सरकार की 53.29 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को मंजूरी दे दी गयी.

मंत्रिमंडल ने एससीआइ में सरकार की पूरी 63.75 प्रतिशत हिस्सेदारी और कंटेनर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में 30.9 प्रतिशत हिस्सेदारी बेचने को भी मंजूरी दे दी. सरकार की कॉनकार में फिलहाल 54.80 प्रतिशत हिस्सेदारी है.

मंत्री ने कहा कि इसके अलावा सरकार टीएचडीसी इंडिया और नार्थ ईस्टर्न इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन लि. (एनईईपीसीओ) में सरकार की हिस्सेदारी को सार्वजनिक क्षेत्र की एनटीपीसी लि. को बेच दिया जायेगा.

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सरकार ने IOC में अपनी हिस्सेदारी 51% से नीचे लाने को दी मंजूरी

सरकार ने इसके साथ ही इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आइओसी) जैसे चुनिंदा सार्वजनिक उपक्रमों में अपनी हिस्सेदारी 51 प्रतिशत से नीचे लाने को मंजूरी दे दी. हालांकि, इनमें प्रबंधन नियंत्रण सरकार अपने पास ही रखेगी. विनिवेश की जाने वाली कंपनी की हिस्सेदारी दूसरे सार्वजनिक उपक्रमों को बेचे जाने के आधार पर सरकार का उस इकाई में प्रबंधन नियंत्रण होगा.

सरकार की फिलहाल आइओसी में 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी है. इसमें 25.9 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक क्षेत्र की एलआइसी के पास और ऑयल एंड नेचुरल गैस कॉरपोरेशन (ओएनजीसी) व ऑयल इंडिया लि. के पास है. सरकार 26.4 प्रतिशत हिस्सेदारी करीब 33,000 करोड़ रुपये में बेच सकती है.

सीतारमण ने कहा कि नुमालीगढ़ रिफाइनरी को सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनी को सौंपा जायेगा. पूर्वोत्तर में निजीकरण की पहल को लेकर चिंता को दूर करते हुए यह कदम उठाया गया है.

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