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 धर्मांतरण विरोधी कानून लाने पर विचार कर रही है मोदी सरकार, अगले सत्र में ला सकती है  बिल

देश के कई राज्यों में हिंदू पहले ही अल्पसंख्यक हो चुके हैं. इसके बावजूद बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है.

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NewDelhi : भारत विरोधी शक्तियां धर्म परिवर्तन के माध्यम से पूरे भारत में  हिंदुओं को अल्पसंख्यक बनाना चाहती हैं. धर्मांतरण कराने वाली संस्थाएं नब्बे के दशक तक गांव के गरीब किसान, मजदूर, दलित शोषित और पिछड़ों को टारगेट करती थीं, लेकिन आजकल इन्होंने कस्बों और शहरों में भी अपना जाल बिछा लिया है. यह भाजपा नेता व सुप्रीम कोर्ट के अधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय का कहना है. खबर है कि तीन तलाक बिल और जम्मू-कश्मीर से आर्टिकल 370 हटाने के बाद अब मोदी सरकार धर्मांतरण विरोधी बिल  लाने की तैयारी में हैं.

सूत्रों के अनुसार सरकार अगले सत्र में इस बिल को सदन में रखने पर विचार कर रही है.  जान नें कि भाजपा से जुड़े थिंक टैंक के लोग बहुत पहले से इस विषय को उठाते रहे  हैं. धर्मांतरण की खबरें पूर्वोत्तर, केरल और यूपी से अक्सर सामने आतीं हैं, जहां डराकर, धोखे या लालच देकर गरीब अशिक्षित लोगों का धर्म परिवर्तन कराने की बात सामने आयी हैं.  खबर है  कि मोदी सरकार अगले सत्र में धर्मांतरण विरोधी कानून ला सकती है.

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उपाध्याय ने धर्मांतरण  विरोधी कानून  के लिए पीएम मोदी को पत्र  लिखा है

जान लें कि पिछली सरकार में संसदीय कार्य मंत्री रहे वेंकैया नायडू ने सभी दलों से धर्मांतरण पर एक राय से कानून बनाने की अपील की थी, लेकिन ऐसा हो नहीं पाया था. अब दोबारा चुन कर आयी मोदी सरकार इस बिल को पेश करने की सोच रही है. भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट केअधिवक्ता अश्विनी उपाध्याय ने धर्मांतरण  विरोधी कानून के लिए लंबी मुहिम चलाई है और इसके लिए उन्होंने पीएम मोदी को पत्र भी लिखा है.

इस संबंध में अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि जिस प्रकार से   सुनियोजित ढंग से धर्म परिवर्तन हो रहा है यदि उसे नहीं रोका गया तो आने वाले 10 वर्षों में स्थिति अत्यधिक भयावह हो जायेगी. उन्होंने कहा, देश के कई राज्यों में हिंदू पहले ही अल्पसंख्यक हो चुके हैं. इसके बावजूद बड़े पैमाने पर धर्म परिवर्तन हो रहा है.

कहा कि  उत्तर पूर्व के राज्यों में धर्मांतरण कराने के लिए हिंदू नहीं बचे हैं इसलिए वे अब उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में गरीबों का धर्मांतरण कर रहीं हैं. पिछले 10 साल में इन्होंने हरियाणा और पंजाब जैसे राज्यों में भी किसान, मजदूर, दलित शोषित और पिछड़ों को टारगेट करना शुरू कर दिया है.

कानून के अभाव में पुलिस  कुछ कर नहीं पाती है

दिल्ली  में भी  सुनयोजित तरीके से अंधविश्वास द्वारा धर्मांतरण का खेल चलाया जा रहा है. धर्मांतरण कराने वाले लोग अंधविश्वास और चमत्कार के सहारे लोगों को अपने झांसे में लेते हैं. कानून के अभाव में पुलिस  कुछ कर नहीं पाती है.. अश्विनी उपाध्याय ने कहा कि हमारे वेद, पुराण, गीता, रामायण और अन्य धार्मिक ग्रंथों में कर्म को ही प्रधान बताया गया है.

संविधान के आर्टिकल 51A के अनुसार सभी नागरिकों की यह  कर्तव्य है कि वे अपनी रीति-रिवाजों को वैज्ञानिक तरीके से सोचें और आवश्यकतानुसार उसमें सुधार करें, लेकिन कानून के अभाव में धर्मांतरण कराने वाले जादू-टोना और अंधविश्वास को बढ़ावा दे रहे हैं.

अश्विनी उपाध्याय ने बताया कि कुछ राज्यों ने धर्मांतरण विरोधी और अंधविश्वास विरोधी कानून बनाया है, लेकिन ऐसे कानून बहुत ही कमजोर हैं. यही कारण है कि धर्मांतरण और अंधविश्वास की बढ़ती घटनाओं के बावजूद आज तक किसी को सजा नहीं हुई. इसलिए आप वर्तमान संसद सत्र में कठोर धर्मांतरण विरोधी कानून और एक प्रभावी अंधविश्वास विरोधी कानून बनाने के लिए गृह मंत्रालय और कानून मंत्रालय को निर्देश दें.

कहा कि जब तक धर्मांतरण कराने वालों और अंधविश्वास फैलाने वालों की  संपत्ति जब्त कर इन्हें आजीवन कारावास नहीं दिया जायेगा तब तक धर्म परिवर्तन और अंधविश्वास को रोकना मुश्किल है.

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