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अडानी पावर प्लांट के लिए बेरहमी से हथिया ली गयी 10 किसानों की 16 बीघा से अधिक जमीन

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Ranchi : राज्य सरकार की कथित शह पर निजी कंपनी की क्रूर कार्रवाई से गोड्डा के किसान त्रस्त हैं. सरकार एक ओर दावा करती है कि जमीन हड़पनेवालों को जेल भेजा जायेगा, वहीं गोड्डा की कहानी कुछ और ही बयां कर रही है. वहां अडानी पावर प्लांट के लिए गरीब संतालों की जमीन छीनी जा रही है. उन्हें घसीटकर मारा जा रहा है. गोड्डा जिला के पोड़ैयाहाट प्रखंड स्थित माली गांव में 10 संथाल आदिवासी किसानों की 16 बीघा 16 कट्ठा और 7 धुर जमीन हथिया ली गयी. उस जमीन पर लहलहाती धान की फसल को कंपनी के अधिकारियों ने चार पोकलेन लगाकर नष्ट कर दिया. इससे भी बात नहीं बनी, तो संतालों के धार्मिक स्थल जंग बाहा को भी ध्वस्त कर दिया. 4000 से अधिक पेड़ भी काट दिये गये. रोते-बिलखते आदिवासी किसानों को उनकी जमीन से खदेड़ने का भी काम किया गया. इस बेरहम कार्रवाई से गांव की महिलाओं का रो-रोकर बुरा हाल है.

अडानी पावर प्लांट के लिए बेरहमी से हथिया ली गयी 10 किसानों की 16 बीघा से अधिक जमीन
कंपनी के लोगों ने समूल नष्ट कर दिये हजारों पेड़.

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ग्रामीणों का दावा- हमने नहीं दी है अडानी पावर प्लांट को अपनी जमीन

ग्रामीणों का दावा है कि पोड़ैयाहाट थाना क्षेत्र के माली मौजा में जमाबंदी नंबर 42 में 16 बीघा 16 कट्ठा 7 धुर जमीन उन्होंने अडानी पावर प्लांट को नहीं दी है. न ही उन लोगों ने किसी भी बैठक में भाग लिया. इस संबंध में ग्रामीणों ने राज्यपाल, मुख्यमंत्री, उपायुक्त, भू-अर्जन पदाधिकारी, अंचलाधिकारी सहित तमाम पदाधिकारियों को इसकी लिखित जानकारी भी दी है. इन भूखंडों पर रैयतों ने धान रोपा था, लेकिन अडानी पावर प्लांट के अधिकारियों द्वारा धान को बर्बाद कर दिया गया, जिसको लेकर ग्रामीणों में आक्रोश है.

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कंपनी कह रही- हम अधिग्रहण की गयी जमीन पर ही कर रहे हैं दावा

इधर, अडानी पावर प्लांट के अधिकारियों का कहना है कि उनके पास सरकार द्वारा जिला प्रशासन का एलपीसी है और उसी एलपीसी के तहत जमीन पर कब्जा करने वे लोग जाते हैं. वे लोग गैर कानूनी काम नहीं कर रहे हैं, बल्कि भूमि अधिग्रहण कानून के तहत जो जमीन सरकार ने अधिग्रहीत की है, उसी जमीन पर वे लोग अपना दावा कर रहे हैं. ऐसे में ग्रामीणों को चाहिए कि जमीन को स्वेच्छा से खाली कर दें.

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ग्रामीणों का अरोप- कंपनी को झारखंड सरकार और जिला प्रशासन का मिल रहा साथ

इस क्रूर कार्रवाई में जिला प्रशासन ने भी कंपनी के लोगों का साथ दिया. किसानों का कहना है कि यह जमीन उनकी आजीविका से जुड़ी है. इसे किसी भी कीमत पर नहीं देंगे. कंपनी द्वारा चार पोकलेन लगाकर करीब 4000 पेड़ों को नष्ट किया गया. गोड्डा जिला के उपायुक्त से जब ग्रामीणों ने मदद की गुहार लगायी, तो उपायुक्त का सीधा कहना है कि झारखंड सरकार का दबाव है, यहां किसी भी कीमत पर अडानी का पावर प्लांट लगेगा ही. 31 अगस्त से ही कंपनी द्वारा माली गांव की जमीन पर कब्जा करने का प्रयास किया जा रहा था. कंपनी द्वारा घेराबंदी करने के क्रम में वैसी जमीन पर भी घेराबंदी का प्रयास हो रहा है, जिस जमीन का मुआवजा रैयतों ने नहीं लिया है. रैयतों द्वारा कंपनी के अधिकारियों के समक्ष रोने-गिड़गिड़ाने का भी किसी पर किसी तरह का कोई असर नहीं पड़ा रहा है. वहीं, ग्रामीणों का आरोप है कि जमीन अधिग्रहण कराने में स्थानीय जिला प्रशासन पूरी तरह कंपनी का साथ दे रहा है.

जिन्होंने मुआवजा नहीं लिया, उनकी जमीन भी  हथिया रही कंपनी : मेरी नीसा हांसदा

गोड्डा की ही सामाजिक कार्यकर्ता मेरी नीसा हांसदा का कहना है कि अडानी कंपनी के लोगों द्वारा वैसे किसानों की फसल नष्ट की जा रही है, जिन्होंने किसी तरह का मुआवजा नहीं लिया है. 31 अगस्त को गोड्डा के माली गांव में 10 परिवारों की 16 बीघा 16 कट्ठा 7 धुर जमीन में लहलहाती धान की फसल को कंपनी के चार पोकलेन द्वारा नष्ट कर दिया गया. इस पूरी घटना को कवरेज करने गये स्थानीय मीडियाकर्मियों का कैमरा भी छीनने की कोशिश हुई. कंपनी का इस कदर मीडिया पर भी दबाव है कि मीडिया वाले इस विषय पर लिखने से बच रहे हैं. गौरतलब है कि झारखंड में अमूमन एक फसली खेती की जाती है. इसी पर झारखंड के ज्यादातर किसानों की आजीविका निर्भर करती है. खेती के साथ-साथ पशु और फलदार वृक्षों के सहारे किसान आय अर्जित करते हैं. जब किसानों की फसल नहीं हो पती, तो मजबूरी में राज्य से पलायन करते हैं. ऐसे में कंपनी द्वारा जबरन जमीन लूटने की कोशिश पूरी मानवता को और लोकतांत्रिक व्यवस्था को शर्मसार कर रही है. इस संबंध में कई वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.

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जंगबाहा को भी कर दिया गया नष्ट

धान की फसल बर्बाद करने के साथ पावर प्लांट की घेराबंदी के क्रम में संतालों के पवित्र स्थान को भी नष्ट कर दिया गया. माली गांव के संताल आदिवासी समुदाय की बसाहट के करीब ही उनके शव दफनाने का स्थान है, जिसे संताल समुदाय जंगबाहा कहता है, कंपनी के लोगों ने उसे भी नष्ट कर दिया.

माली गांव के युवा को घर से बहार सोने पर पीटती है पुलिस

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आरोप है कि माली गांव में गश्त करती पुलिस भी संताल आदिवासियों पर अत्याचार करने से नहीं चूकती है. पुलिस घर के बाहर सोने पर पाबंदी लगा रखी. माली गांव में ज्यादातर संताल आदिवासी रहते हैं, जिनकी अजीविका कृषि पर निर्भर है. वे अपने मवेशियों को घर के बाहर रखते हैं, जिनकी रखवाली करने के लिए वर्षों से घर के बाहर कुछ युवा सोते रहे हैं. लेकिन, ग्रामीणों के घर के बाहर सोने पर पुलिस द्वारा पाबंदी लगा दी गयी है. ग्रामीण अगर पुलिस की बात नहीं मानते हैं, तो ग्रामीणों की जमकर पिटाई की जा रही है. पुलिस युवाओं को रात में पीटती है. हाल यह है कि डरे-सहमे ग्रामीण अब भीख मांगने को बेबस हैं.

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जान दे देंगे, लेकिन जमीन नहीं देंगे : ग्रामीण

वहीं, ग्रामीण मैनेजर हेंब्रम का कहना है, “हमलोगों ने अडानी को जमीन नहीं दी है, न ही हमलोगों को किसी तरह का नोटिस दिया गया है. चार दिन पहले तक बोला गया कि तुमलोगों की जमीन नहीं लेंगे. एकाएक शुक्रवार (31 अगस्त) की दोपहर से अडानी पावर प्लांट के लोग सैकड़ों की संख्या में पुलिस फोर्स साथ लेकर आये और हमलोगों की जमीन पर लगे धान को जेसीबी से बर्बाद कर दिया. पेड़ उखाड़ दिये गये और जोर-जबरन जमीन को घेरने का प्रयास किया जा रहा है.” भगत हेंब्रम ने कहा, “हमलोगों ने इसको लेकर उपायुक्त को कई बार आवेदन दिया है. एसपी से फोन पर बात की, तो उन्होंने कहा कि थाना में जाकर बात करो. थाना को फोन करते हैं, तो थाना हमलोगों की बात नहीं सुनता है. थाना सिर्फ अडानी के लोगों की ही बात सुनता है. ऐसे में हमलोग क्या करें? हमलोग जान दे देंगे, लेकिन जमीन किसी भी शर्त पर जाने नहीं देंगे.”

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