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देश भर में 5.2 करोड़ वोटरों के नाम मतदाता सूची से गायब

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  • तीन करोड़ से अधिक मुस्लिम मतदाताओं के नाम नहीं हैं मतदाता सूची में
  • आधार कार्ड से मतदाता पहचान पत्र की लिंकिंग में हुई है गड़बड़ी

Deepak

Ranchi : देश भर में 5.2 करोड़ मतदाताओं के नाम मतदाता सूची से गायब हो गए हैं. निर्वाचन आयोग भी मतदाता सूची से नाम गायब होने के मामले पर सशंकित है. मुख्य निर्वाचन आयुक्त सुनील अरोड़ा ने जनवरी 2019 में यह घोषणा की थी कि कुल योग्य मतदाताओं की संख्या 17वीं लोकसभा चुनाव को लेकर 93.1 करोड़ होना चाहिए था. पर इनमें से 87.8 करोड़ के नाम ही मतदाता सूची में अंकित हैं.

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सूची से नाम गायब होने के मामले में महिलाओं के नाम सबसे अधिक

मतदाता सूची से नाम गायब होने वालों में महिलाओं के नाम सबसे अधिक हैं. सूत्रों का कहना है कि इसमें तीन करोड़ से अधिक मुसलिम मतदाताओं के नाम शामिल हैं. शेष में जनजातीय और पिछड़ी आबादी शामिल है.

लोकसभा का चुनाव 11 अप्रैल से सात चरणों में शुरू होगी, जो 19 मई तक चलेगी. जानकारी के अनुसार तेलांगना, उत्तरप्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, तमिलनाडू में मतदाताओं के नाम सबसे अधिक गायब हुए हैं.

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Bharat Electronics 10 Dec 2019
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जानकारी के अनुसार महिला रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत नावाडीह पंचायत क्षेत्र की निवासी थी.  महिला की पुत्री ने बताया कि उसकी मां सोमवार शाम चार बजे बाजार के लिए निकली थी

क्या है मामला

जानकारी के अनुसार निर्वाचन आयोग ने 2015 में मतदाता पहचान पत्र को आधार कार्ड से जोड़ने की कयावद शुरू की थी. यह सिलसिला चार महीने तक ही चल पाया. सुप्रीम कोर्ट के निर्देश के बाद अगस्त 2015 में आधार कार्ड से मतदाता पहचान पत्र को लिंक करने की बाध्यता पर रोक लगा दी थी.

इसके बाद से यह काम रोक दिया गया था. तत्कालीन मुख्य चुनाव आयुक्त ओपी रावत ने अपने बयान में कहा था कि 32 करोड़ मतदाताओं का ही पहचान पत्र आधार से जोड़ा जा सका था. 54 करोड़ मतदाताओं के पहचान पत्र को आधार कार्ड से लिंक नहीं किया जा सका था.

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आयोग की ओर से नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर के डाटा बेस से आधार कार्ड लिंकेज की प्रक्रिया शुरू की गयी थी. इसमें डीएसडीभी सॉफ्टवेयर को उपयोग में लाया गया था, जिससे मतदाताओं के नाम का वेरिफिकेशन मतदाता सूची से किया जाता था.

इसमें यह भी पाया गया कि 11 प्रतिशत सिंगल वोटरों के नाम मतदाता सूची से हटा दिए गए थे. क्योंकि उनमें आधार कार्ड लिंकेज से लेकर सामाजिक बैकवर्डनेस और साक्षरता की कमी थी.

कहां कितने मतदाताओं के नाम सूची में नहीं

यह आंकड़े 2011 की जनगणना और मतदाता सूची (2019) में अंतर के आधार पर तय किए गए हैं.

हरियाणा -12.98
आंध्रप्रदेश -11.97
पंजाब -11.51
केरल -7.86
मध्यप्रदेश -7.5
बिहार -5.34
गुजरात -5.27
ओड़िशा -4.47
पश्चिम बंगाल -4.18
दिल्ली 2.25
तेलांगना 1.2
तमिलनाडू -1.03
उत्तरप्रदेश -1.77
महाराष्ट्र -2.24
(स्त्रोत : अंगरेजी अखबार-द मिंट और इलेक्शन कमीशन के आंकड़े के अनुसार)

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