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एक महीने तक बायोमेट्रिक से अटेंडेंस नहीं बनाया, नप गयीं राज्य प्रशासनिक सेवा की अफसर

मासिक वेतन निकासी से पहले बायोमेट्रिक अटेंडेंस का सत्यापन जरूरी: सीएस

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Ranchi: बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं करनेवाले अफसरों-कर्मियों के खिलाफ अब सरकार सख्त कार्रवाई करेगी. इसके लिए अब कोई बहानेबाजी भी सरकार सुनने को तैयार नहीं है. इसी कड़ी में झारखंड प्रशासनिक सेवा की अधिकारी इंदु गुप्ता को निंदन की सजा दी गई है. उनपर पदस्थापित जगह से बिना सूचना दिए अनुपस्थित रहने का आरोप था. इसे लेकर उनसे कारण पूछा गया था, लेकिन उन्होंने संतोषप्रद जवाब नहीं दिया. इसके बाद उन्हें झारखंड सरकारी सेवक नियमावली, 2016 के नियम 14(र) के तहत निंदन की सजा दी गई है.

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जिला पंचायती राज पदाधिकारी हैं इंदु गुप्ता

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इंदु गुप्ता वर्तमान में जिला पंचायती राज पदाधिकारी, देवघर के पद पर हैं. उनपर आरोप था कि उन्होंने 15 जनवरी 2016 को प्रधान सचिव कोषांग, ग्रामीण विकास विभाग में योगदान की तिथि से लेकर 16 फरवरी 2016 तक आधार आधारित बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं किया. उक्त अवधि में उन्होंने आकस्मिक अवकाश या मुख्यालय छोड़ने का कोई आवेदन भी विभाग को नहीं दिया. अनधिकृत रूप से पदस्थापन की जगह से अनुपस्थित रहने को गंभीरता से लेते हुए उनके खिलाफ प्रपत्र (क) गठित किया गया. आरोपित पदाधिकारी ने जवाब में लिखा कि बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करने की उन्हें जानकारी नहीं थी. उनके इस गैरजिम्मेदाराना व्यवहार के लिए उन्हें राज्य सरकार द्वारा निंदन की सजा दी गई है.

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बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज करना अनिवार्य: मुख्य सचिव

मुख्य सचिव डॉ डीके तिवारी ने अपने अर्द्धसरकारी पत्रांक संख्या 263, दिनांक 3.4.2019 के द्वारा सभी विभागों के प्रमुख को निर्देश दिया है कि राज्य में बायोमेट्रिक सिस्टम के आधार पर उपस्थिति दर्ज कराना सभी के लिए अनिवार्य है. उन्हें यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी कर्मी और पदाधिकारी निर्धारित समयावधि में कार्यालय में रहें. साथ ही सभी निकासी व व्ययन पदाधिकारी मासिक वेतन निकासी के पहले बायोमेट्रिक उपस्थिति का सत्यापन जरूर करें. वहीं पत्र में कहा गया है कि कोई भी पदाधिकारी सक्षम प्राधिकार की अनुमति के बगैर मुख्यालय से बाहर नहीं जाएंगे. इसका पालन नहीं करनेवालों पर कार्रवाई होगी. साथ ही पत्र के माध्यम से यह भी स्पष्ट किया गया है कि प्रत्येक स्तर पर अनुशासन के साथ समय पर कार्यों का निष्पादन ही संबंधित पदाधिकारी के कार्यों के मूल्यांकन का आधार होगा.

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