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82 एकड़ में प्रस्तावित EMC दे सकता है 30 हजार रोजगार, केंद्र से 319 करोड़ का इंतजार, नहीं हुआ काम

एक साल में बन जाना था इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर, फंड के अभाव में कुछ नहीं हुआ

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Abinash Mishra

Jamshedpur : आदित्यपुर इंडस्ट्रियल एरिया में इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर (ईएमसी) बनाने की घोषणा साल भर पहले हुई थी. उस वक्त तय की गयी समय सीमा के मुताबिक इसे अब तक पूरा हो जाना चाहिए था. लेकिन झारखंड इसके लिए केंद्र से घोषित 319 करोड़ रुपये के फंड का इंतजार ही कर रहा है.   

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बता दें कि 82 एकड़ में ईएमसी बनाने का एलान केंद्र सरकार ने किया था. उस वक्त के आइटी मंत्री रहे रविशंकर प्रसाद ने यूपी और झारखंड को इसके लिए चुना था. मोदी सरकार के इस ड्रीम प्लान को साल भर के अंदर पूरा करने का दम भरा गया था. दावा किया गया था था कि ये क्लस्टर पूर्वोत्तर भारत का चौथा बड़ा क्लस्टर होगा जो साल भर के भीतर बनेगा.

बिहार, बंगाल, ओडिशा व छत्तीसगढ़ से नजदीकी और औद्यगिक क्षेत्र में मौजूद मजबूत संरचना और बेहतर सुविधाएं देखते हुए इस क्लस्टर के लिए आदित्यपुर औद्यगिक क्षेत्र को चिन्हित किया गया था. लेकिन फंड के अभाव में चर्चा केवल फाइलों में ही अटकी है.

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मंदी में जमशेदपुर को ईएमसी की जरुरत

मंदी के दौर में आदित्यपुर औद्योगिक क्षेत्र के 25 इंडक्शन फर्नेस कंपनियों में ताले लगे हैं. टाटा मोटर्स में छंटनी हुई है जिससे करीब 35000 लोग बेरोजगार हो गये हैं. साल भर पहले की घोषणा पर 6 महीने पहले भी काम शुरू हुआ रहता तो जिनकी नौकरी गयी है उनके पास अपने ही शहर में आज विकल्प का अभाव न होता.

एक महीने पहले हो चुकी है हाई प्रोफाइल बैठक

आदित्यपुर में ईएमसी बनाने को लेकर शहर में हाई प्रोफाइल बैठकें समय-समय पर हुई हैं. महीने भर पहले ही केंद्रीय सूचना एवं तकनीकी मंत्रालय के संयुक्त सचिव संजय कुमार राकेश ने बैठक में हिस्सा लिया था.

बैठकों में जल्द से जल्द फंड एलॉट कराने की बात होती है मगर उसके बाद फाइल कहां चली जाती है यह या तो किसी को पता नहीं होता या बैठक ही औपचारिक्ता के लिए की जाती है.

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क्या कहती है जियाडा

झारखंड इंडस्ट्रियल एरिया डेवलपमेंट अथॉरिटी (जियाडा) का कहना है कि चर्चा लंबे समय से  चल रही है. फंड का इंतजार सभी को है. इस बार की बैठक में पक्का आश्वासन मिला है कि जल्द से जल्द फंड एलॉट कर सूचित किया जाएगा.

राज्य के उद्योग सचिव के रवि कुमार और जियाडा के क्षेत्रीय निदेशक रविशंकर शुक्ला भी बैठकों में हिस्सा लेते है लेकिन खुछ ठोस बोल नहीं पाते है.

क्या है इलेक्ट्रॉनिक मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर

ये परियोजना दरअसल इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में निवेशकों को आकर्षित करने के लिए तैयार की गयी है. इसमें मोबाइल फोन बनाने वाली कंपनी, डेटा केबल, यूएसबी और पावर बैंक समेत कई उपकरण बनाने वालों को बेहतर सुविधा मुहैया करायी जानी है.

सरकार का दावा है कि इस क्लस्टर के तैयार होने से करीब 3000 करोड़ के निवेश को आकर्षित किया जा सकता है जिसके तहत कम से कम 30,000 लोगों को सीधा रोजगार मिलेगा.

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