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#NobelLaureate अभिजीत ने कहा, ज्यादा से ज्यादा पैसा पीएम किसान योजना में खर्च करें, मनरेगा की मजदूरी दर बढ़ायें   

कॉरपोरेट सेक्टर पहले से ही ढेर सारे कैश पर बैठा हुआ है. वह निवेश इसलिए नहीं कर रहा, क्योंकि उसके पास पैसे नहीं है, बल्कि इसलिए नहीं कर रहा, क्योंकि उसके पास डिमांड नहीं है.

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NewDelhi : प्रसिद्ध अर्थशास्त्री  नोबेल पुरस्कार विजेता डॉक्टर अभिजीत बनर्जी ने कहा है कि  मोदी सरकार द्वारा कॉरपोरेट टैक्स में कटौती उचित कदम नहीं कहा जा सकता. द हिंदू की रिपोर्ट के अनुसार अभिजीत  बनर्जी ने यह विचार व्यक्त किये हैं. उन्होंने कॉरपोरेट टैक्स में कटौती करने के बजाय  जनता की खरीद क्षमता को बढ़ाने की बात कही है.

अभिजीत बनर्जी ने द हिंदू को दिये साक्षात्कार में पीएम किसान योजना में भूमिहीन किसानों को भी शामिल करने की बात कही है. साथ ही मनरेगा में मिलने वाली मजदूरी दर बढ़ाने की बात कही.

अभिजीत  बनर्जी ने कहते हैं कि मैं कॉरपोरेट टैक्स में कटौती नहीं करता. हालांकि, वे कहते हैं कि  इसे अब दोबारा बदलना काफी महंगा साबित होगा. लेकिन, इस पर कुछ विचार किया जा सकता है. क्योंकि, वित्तीय घाटे पर ज्यादा बोझ है. यह बेहतर होता कि ज्यादा से ज्यादा पैसा पीएम किसान योजना में खर्च किया जाता.  उन्होंने  मनरेगा की मजदूरी दर में इजाफा करने की बात कही. कहा कि  मनरेगा के जरिए पैसा उन लोगों के हाथ में जाता जो सही में इसे खर्च करते.

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कॉरपोरेट सेक्टर पहले से ही ढेर सारे कैश पर बैठा हुआ है

अभिजीत  बनर्जी के अनुसार  कॉरपोरेट सेक्टर पहले से ही ढेर सारे कैश पर बैठा हुआ है. वह निवेश इसलिए नहीं कर रहा, क्योंकि उसके पास पैसे नहीं है, बल्कि इसलिए नहीं कर रहा, क्योंकि उसके पास डिमांड नहीं है. डॉक्टर बनर्जी ने कहा कि भारत के पास जीएसटी के ऊचे स्लैब में अधिक आइटम होने चाहिए. क्योंकि, आप सिर्फ आय पर टैक्स बढ़ाकर जीडीपी अनुपात में सुधार नहीं कर सकते हैं.

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समर्थन मूल्य आंशिक रूप से श्रम की मांग बढ़ाता है

बनर्जी  ने कहा कि हायर टैक्स से जमा राशि  बड़े विजन वाली स्कीम्स  पीएम किसान योजाना आदि में इस्तेमाल किया जाना चाहिए. डॉक्टर अभिजीत बनर्जी ने  कहा, मुझे लगता है कि भूमिहीन मजदूरों को इससे बाहर किये जाने का कोई कारण नहीं बनता. खास तौर पर यदि आप इसे सपोर्ट प्राइस के विकल्प के रूप में देखते हैं .

बनर्जी के अनुसार समर्थन मूल्य आंशिक रूप से श्रम की मांग को बढ़ाता है, क्योंकि यह अधिक गेहूं उगाने के लिए अधिक लाभदायक है.  इसलिए  गेहूं काटने के लिए अधिक  मजदूरों को किराये पर लिया जायेगा.   उन्होंने उदाहरण दिया,  अगर मैं उत्पादन के लिए अतिरिक्त प्रोत्साहन राशि को हटाता हूं (पीएम किसान योजना के तहत पैसे देकर), तो यह श्रम की मांग को कम करने वाला होगा.

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