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एनआरएचएम अनुबंधकर्मियों की आरक्षण रोस्टर विसंगतियों में नहीं हुआ सुधार, हड़ताल जारी

मीरा ने कहा कि राज्य में एनआरएचएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह रुक गयी है. अधिकांश पीएचसी और सीएचसी में काम ठप्प है

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Ranchi :  स्वास्थ्य निदेशालय के निदेशक प्रमुख की ओर से पांच जुलाई तक एनआरएचएम अनुबंध कर्मचारियों के नियुक्ति आरक्षण रोस्टर संबधी विसंगितयों को दूर करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन शुक्रवार को इस संबध में निदेशालय की ओर से कोई सूचना जारी नहीं की गयी. हड़ताल पर बैठी एनआरएचएम अनुबंध कर्मियों ने इस पर विरोध जताया. इसकी जानकारी देते हुए झारखंड राज्य एनआरएचएम अनुबंध कर्मचारी संघ की अध्यक्ष मीरा कुमारी ने कहा कि निदेशक प्रमुख डा विजय शंकर दास ने शुक्रवार तक आरक्षण रोस्टर की विसंगतियां दूर करने की बात की थी. जो नहीं हुआ.

इसके लिए सभी सिविल सर्जनों से जिलावार आरक्षण रोस्टर की विसंगति दूर कर रिपोर्ट मांगी गयी थी. जबकि शुक्रवार को सिविल सर्जनों के साथ निदेशक प्रमुख ने बैठक भी की लेकिन इस संदर्भ में कोई चर्चा नहीं की गयी. मीरा ने कहा कि राज्य में एनआरएचएम कर्मियों के हड़ताल पर चले जाने से राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह रुक गयी है. अधिकांश पीएचसी और सीएचसी में काम ठप्प है.

चार हजार पदों का सृजन होना है

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मीरा ने जानकारी दी कि सरकार ने निर्णय लिया है कि सवर्ण रोस्टर जिला स्तर पदों के लिए लागू नहीं होगा. लेकिन अभी तक उसकी अध्यादेश जारी नहीं किया गया है. जिसके कारण नियुक्ति प्रक्रिया में पेंच फंसा हुआ है. आरक्षण रोस्टर की विसंगतियां समाप्त होने से पदों की संख्या बढ़ेगी. विभाग से आरक्षण की विसंगतियां दूर करने पर, कार्मिक विभाग को रिपोर्ट दी जायेगी, जिसके बाद जेएसएससी की ओर से नियुक्ति विज्ञापन निकाला जायेगा. लेकिन इस पर कोई पहल नहीं की जा रही है. पदों की संख्या बढ़ाने को लेकर अभी तक कोई विचार नहीं किया गया है. इन्होंने बताया कि इससे करीब 4,000 नये पदों को सृजन होना हैं. इस दौरान महिलाओं ने राजभवन से लेकर अल्बर्ट एक्का चौक तक कैंडल मार्च निकाला.

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अधियाचना भेजे जाने तक जारी रहेगी हड़ताल

  कार्यकारी महासचिव वीणा कुमारी ने कहा कि संघ की ओर से राज्यपाल या मुख्यमंत्री से जाकर मुलाकात की जा सकती है. लेकिन संघ की ओर से ऐसा नहीं किया जा रहा, क्योंकि पिछले कई दिनों से एनआरएचएम कर्मी राजभवन के समक्ष बैठी है लेकिन राज्य सरकार की ओर से कोई पहल नहीं की जा रही. जबकि हड़ताल में बैठने वाली महिलाएं है और सरकार भी जानती है कि राज्य की स्वास्थ्य सेवाएं किस हद तक प्रभावित है. ऐसे में जब तक कार्मिक विभाग की ओर से जेएसएससी को नियुक्ति अधियाचना नहीं भेजी जाती, तब तक हड़ताल जारी रहेगी.

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