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झारखंड का एक ऐसा गांव जहां पानी के अभाव में नहीं बजती है शहनाई, बूंद-बूंद पानी को तरस रहे लोग (देखें वीडियो)

बूंद बूंद के लिए तरसते है लोग, दूषित पानी से बुझाते हैं प्यास

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Kunda : गरीबी के कारण किसी गांव या किसी के घर में शादी की शहनाई ना बजे ये तो लोगों ने सुना होगा लेकिन पानी के अभाव में किसी गांव में शहनाई ना बजे ये बात एक बार सोचने को मजूबर जरूर करती है. आखिर ऐसी क्या किल्लत हो गयी पानी की जो गांव में शहनाई तक नहीं बज पा रही.

जी हां बात सुनने में तो अजीब है लेकिन सच है. झारखंड के कुंदा जिले में एक ऐसा गांव हैं जहां पानी के अभाव में शादियां नहीं होती है. लोग पानी की बूंद-बूंद को तरसते हैं. पानी के अभाव की वजह से लोगों को दिनचर्या के निष्पादन तक में परेशानी होती है. ऐसे में शादी जैसी रस्मों के लिए पानी कहां से लायेंगे ग्रामीण.

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सरकार सुदुरवर्ती इलाकों के विकास के लाख दावे कर ले लेकिन हकीकत इससे परे है. लोगों को शुद्ध पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार करोड़ो-लाखों रुपये खर्च कर रही है. लेकिन इसका लाभ लोगों तक नही पहुंच पा रहा है. लोग अभी भी पानी के लिए तरस रहे हैं.

गर्मी ने रही सही कसर भी कर दी पूरी

हम बात कर रहे हैं कुंदा जिले के अनुसूचित जनजाति बहुल प्रखंड सिंदुरी गांव की. जहां कि स्थिति भयावह है. इस गांव में करीब डेढ़ सौ घर हैं जहां लगभग पांच सौ की आबादी रहती है. लेकिन इस गांव में प्यास बुझाने के लिए एक भी सुगम साधन नहीं है.

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एक तो पहले से ही इस गांव में पानी की किल्लत, ऊपर से रही सही कसर भी गर्मी ने पूरी कर दी. ग्रामीणों ने निजी मद से कुआं खुदवाया, लेकिन गर्मी की वजह से जलस्तर नीचे चले जाने से यह पूरी तरह सूख चुका है. ऐसे में मुखिया मद से गड़वाया गया चापाकल इनका एक मात्र सहार था. लेकिन वह भी जवाब दे चुका है.

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इंसान और जानवर सभी एक चुएं पर निर्भर

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जानकारी के अनुसार महिला रामगढ़ प्रखंड अंतर्गत नावाडीह पंचायत क्षेत्र की निवासी थी.  महिला की पुत्री ने बताया कि उसकी मां सोमवार शाम चार बजे बाजार के लिए निकली थी

गांव में स्थित एक ढोढे में चुआं खोदकर किसी तरह लोग अपनी प्यास बुझा रहे हैं. स्थिति यह है कि सुबह होते ही गांव की महिलाएं व बच्चे घरों से खाली बर्तन लेकर ढोढे के नजदीक पहुंच जाते हैं और घंटो मशक्कत कर दो-चार बाल्टी पानी भरकर घर लाते हैं.

ग्रामीण इस पानी से अपनी प्यास बुझाते हैं और मवेशियों को भी पिलाते हैं. आश्चर्य की बात तो यह है कि जिस चुएं से ग्रामीण अपनी प्यास बुझाते हैं उसी चुएं में सुअर व अन्य मवेशी भी प्यास बुझाते हैं. ऐसे में ग्रामीणो की स्थिति का अंदाजा लगाया जा सकता है. वहीं चुएं का पानी इतना गंदा है कि देखकर रोंगटे खड़े हो जाए. स्थिति यह सोचने को मजबूर कर दे कि आखिर कैसे कोई इतना दूषित पानी पी सकता है.

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पानी की वजह से नहीं बजती शहनाई

पानी की परेशानी के बारे में ग्रामीण मनोज यादव ने बताया कि स्थिति इतनी भयावह हो चुकी है कि लोग पानी की बूंद-बूंद को तरस रहे हैं. पानी के अभाव में गांव में शादियों पर भी आफत आ गई है.

यहां के युवक व युवतियों की शादी पानी के अभाव में नहीं हो पा रही है. शादी की तारिख तय हो जाने के बाद भी पानी के अभाव में रश्मों की अदायगी टल जा रही है. बहुत से लोग पानी कि स्थिति देखकर गांव में शादी का रिश्ता नहीं करना चाहते हैं. यह कोई इस बार की बात नहीं हमेशा हमें इस तरह की परेशानी से गुजरना पड़ता है.

मनोज ने बताया कि दिनचर्या के निष्पादन में भी ग्रामीणों को परेशानियों से दो चार होना पड़ रहा है. वहीं गांव की मनवा देवी नाम की एक महिला ने बताया कि पानी की किल्लत से मवेशियों की मौत हो रही है. इतना ही नहीं कई ग्रामीण दूषित पानी पीने से गंभीर बीमारियों के चपेट में हैं. गंदा पानी पीने की वजह से स्वास्थ्य पर खराब असर पड़ रहा है.

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