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PMMVY का लाभ मात्र 25 प्रतिशत महिलाओं को, राज्य में हो रहा राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन : ज्यां द्रेज

ज्यां द्रेज ने  रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि झारखंड में कुपोषण की भयावह स्थिति है.  कुपोषण गर्भावस्था से शुरू होता है.

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Ranchi : PMMVY या प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना या प्रधानमंत्री गर्भावस्था सहायता योजना का लाभ झारखंड की महिलाओ को नहीं मिल पा रहा है. हाल ही में योजना को लेकर लिबटेक इंडिया राइट टू फूड अभियान  की ओर से राज्य के पांच जिलों में किये गये सर्वे से इस बात का खुलासा हुआ है. जिन माताओं ने PMMVY में तीनों किस्त के लिए आवेदन किया,  उसमें से 76 प्रतिशत माताओं को किसी प्रकार का लाभ योजना से नहीं मिला है , वही मात्र 16 प्रतिशत माताओं को पहली किस्त मिली है. जबकि मात्र 8 प्रतिशत माताओं को ही योजना का लाभ मिल सका है.

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क्या है प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना

यह योजना 2010 में केंद्र के द्वारा इंदिरा गांधी मातृत्व सहयोग योजना के रूप में शुरू की गयी थी. इसे 2014 में मातृत्व सहयोग योजना और 2017 में PMMVY,  प्रधानमंत्री मातृत्व वंदना योजना के रूप में नामित किया गया. इस योजना के तहत सरकार पहले बच्चे के जन्म के लिए गर्भवती और स्तनपान कराने वाली महिलाओं के लिए 6000 सहायता राशि तीन किस्तों में प्रदान करनी है.

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राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम के 6 साल बाद भी राज्य की 76 प्रतिशत महिलाएं वंचित

रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में खाद्य सुरक्षा अधिनियम का उल्लंघन है हो रहा है,  खाद्य सुरक्षा अधिनियम को ताक पर रखते हुए राज्य में पहले जीवित बच्चे तथा लाभ को सीमित कर और नकद राशि को घटाकर 5000 कर देना अधिनियम का उल्लंघन है. वही राज्य में 60% गर्भवती महिलाओं को मातृत्व पात्रता के लाभ से वंचित कर दिया गया है.

झारखंड में जिन महिलाओं ने आवेदन किया है, उन्हें  लाभ नहीं मिल रहा है.  अध्ययन में 202 आवेदनों को शामिल किया गया है, इनमें से मात्र 25% से कम महिलाओं को योजना के तहत पहली किस्त मिल पायी है.  वहीं तीनों किस्त मिलने वालों की संख्या मात्र 8% है.

सर्वे रिपोर्ट में कहा गया है बसिया प्रखंड  की सभी आंगनवाड़ी केंद्र के द्वारा कुल 276 आवेदन इस योजना के तहत लिये गये. पिछले 2 वर्षों में  मात्र 45 महिलाओं को ही पहली किस्त मिल पायी है. वहीं दूसरी किस्त 23 महिलाओं को एवं तीसरी किस्त मात्र 13 महिलाओं को मिली है. मनिका प्रखंड में किये गये सर्वे में 771 आवेदकों की स्थिति का आकलन किया गया.

पिछले 2 वर्षों में मात्र 2 महिलाओं को पहली किस्त,  1 महिला को दूसरी किस्त एवं तीसरी किस्त किसी भी महिला को नहीं मिल सकी है . प. सिहभूम के सोनुआ  में 156 महिलाओं का सैंपल लिया गया,  जिसमें 76 महिलाओं को मात्र पहली किस्त , 55 महिलाओं को दूसरी किस्त एवं तीसरी किस्त मात्र 45 महिलाओं को ही मिली.

झारखंड के बच्चे गर्भवस्था से ही कुपोषण का शिकार होते हैं

ज्यां द्रेज ने  रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि झारखंड में कुपोषण की भयावह स्थिति है.  कुपोषण गर्भावस्था से शुरू होता है.  सर्वे के दौरान हमने देखा कि गरीब महिलाओं को अच्छा खाना नहीं मिल पाता ,वह आराम नहीं कर पाती. कई गरीब महिलाएं  गर्भावस्था के अंतिम दिनों तक काम करती रहती हैं .

कहा कि गर्भावस्था और प्रसव बहुत ही खर्चीला हो गया है.  इस आर्थिक क्राइसिस से बचने के लिए मातृत्व योजना का लाभ कानून के तहत दिया गया है .  झारखंड में योजना का आवेदन करने का कार्य आंगनबाड़ी सेविकाओं को दिया गया है. फार्म को काफी जटिल बना दिया गया है.  रिपोर्ट जारी करने के दौरान  सकीना धोराजीवाला (लिबटेक इंडिया), वनिता लिआह फाल्को (किंग्स कॉलेज, लंदन) और सहायता केन्द्र से सुलेखा देवी और अंजलि कुमारी ने भी प्रेस को संबोधित किया.

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