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राज्य कैसे बने एजुकेशन हब, उच्च शिक्षा पाने वाले 640 अल्पसंख्यक छात्रों को ही 2018-19 में मिली छात्रवृत्ति

अल्पसंख्यक छात्रों को प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति 39,898 को मिली, जबकि राज्य में 85,000 कोटा है

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Chhaya

Ranchi: अल्पसंख्यक छात्रों के लिए विशेष तौर पर छात्रवृत्ति योजना चलायी जाती है. जो केंद्र सरकार की योजना है. प्री मैट्रिक, पोस्ट मैट्रिक और मेरिट कम मेंस सभी छात्रवृत्ति इस योजना के अंतर्गत आते हैं. प्री मैट्रिक में झारखंड के लिए 85,000 कोटा तय किया गया है. लेकिन पिछले कुछ सालों को देखें तो कोटा का लाभ छात्रों को नहीं मिल पा रहा. साल 2018-19 में प्री मैट्रिक के लिए राज्य में एक लाख 39 हजार 402 छात्रों ने आवेदन दिया. लेकिन इसमें से मात्र 39 हजार 8 सौ 98 छात्रों को ही छात्रवृत्ति का लाभ मिल पाया. जबकि लगभग एक लाख छात्र इस योजना से वंचित हुए. कोटा के अनुसार लगभग 45 हजार एक सौ दो छात्रों को छात्रवृत्ति मिलती. बड़ी संख्या में छात्रों को छात्रवृत्ति नहीं मिलने का मुख्य कारण जिला कल्याण पदाधिकारी, जो अल्पसंख्यक छात्रवृत्ति के नोडल पदाधिकारी भी होते हैं, की ओर से आवेदनों को वेरिफाई नहीं करना है. प्री मैट्रिक छात्रवृत्ति अल्पसंख्यक छात्रों को दी जाती है. जो कक्षा एक से लेकर दसवीं में पढ़ते हैं.

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 69 हजार 59 आवेदन वेरिफाई नहीं किये गये

प्री मैट्रिक के तहत स्कूलों और जिला नोडल पदाधिकारी की ओर से आवेदन वेरिफाई किये जाते हैं. लेकिन साल 2018-19 के लिए 52 हजार 396 आवेदन वेरिफाई नहीं किये गये. जामताड़ा, चतरा, पश्चिमी सिंहभूम जैसे जिलों में एक भी आवेदन वेरिफाई नहीं किये. जबकि चतरा में 2,245, जामताड़ा में 627 और पश्चिमी सिंहभूम में 1263 आवेदन किये गये. कुछ जिले ऐसे भी हैं, जहां खानापूर्ति की गयी. जिसमें गढ़वा में 1567 छात्रों ने आवेदन भरा था. जिसमें मात्र 2 आवेदन वेरिफाई किये गये. वहीं देवघर में 1251 में 10, लातेहार में 10783 में 48, पलामू में 2333 में आवेदन वेरिफाई किये गये. 22, 438 छात्रों के आवेदन को रद्द कर दिया गया. 8010 छात्रों के आवेदन को डिफेक्टिव में डाल दिया गया.

उच्च शिक्षा पाने वाले मात्र 640 अल्पसंख्यक छात्रों को छात्रवृत्ति

हैरान करने वाली बात है कि राज्य सरकार सूबे को एजुकेशन हब बनाने की दलीलें देती है. लेकिन छात्रवृत्ति का लाभ तक छात्रों को नहीं मिल पा रहा. केंद्र सरकार की ओर से ही अल्पसंख्यक के लिए मेरिट कम मेंस छात्रवृत्ति दी जाती है. छात्रवृत्ति उच्च शिक्षा लेने वाले छात्रों को दी जाती है. साल 2018-19 में 8, 779 छात्रों ने आॅनलाइन आवेदन किया. इसमें से मात्र 640 छात्रों को ही इसका लाभ मिला. सभी छात्र छात्रवृत्ति से वंचित रह गये.

पोस्ट मैट्रिक में 9,358 आवेदन वेरिफाई ही नहीं किये गये

अल्पसंख्यक छात्रों को ही पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति देने का प्रावधान है. 2018-19 में 34 हजार 5 सौ 49 छात्रों ने आवेदन किया. इसमें से 9 हजार 3 सौ 58 छात्रों के आवेदन वेरिफाई ही नहीं किये गये. जिला नोडल पदाधिकारी और राज्य स्तर पर 9  हजार 8 सौ 35 छात्रों के आवेदन वेरिफाई किये गये. लगभग 24 हजार 7 सौ 14 छात्र इस कोटा में वंचित हो गये. जिला नोडल पदाधिकारियों की ओर से एक भी आवेदन वेरिफाई नहीं होने के कारण छात्र अपने अधिकार से वंचित हैं.

अल्पसंख्यक छात्रों के साथ हो रहे ऐसे कार्यों की जांच हो

यूनाइटेड मिल्ली फोरम के महासचिव अफजल अनीस ने कहा कि अल्पसंख्यक छात्रों को मिलने वाले छात्रवृत्ति में पिछले कुछ सालों से लगातार गिरावट देखी जा रही है. ऐसा लग रहा है जैसे जान बूझ कर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है. यह जांच का विषय है. केंद्र सरकार की यह योजना 2008 से चलायी जा रही है. कोटा के बावजूद वेरिफाई नहीं होने के कारण छात्र अपने अधिकार से वंचित हो रहे हैं. इसका जवाबदेह कौन है. राज्य में अल्पसंख्यक मामले देख रहे मंत्री और अल्पसंख्यक वित एंव विकास निगम के निदेशक से जांच की मांग है.

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