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लिव इन में रह रही प्रेमिका बनी दो बच्चों की मां, सात वर्ष बाद महिला की ‘जनी पंचायत’ ने करायी शादी

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Palamu : प्रेमी जोड़े का लिव इन रिलेशनशिप में रहना बड़े शहरों में आम बात है, लेकिन अब गांव भी इससे अछूता नहीं रहा. पलामू जिले के चैनपुर प्रखंड अंतर्गत चांदो के डोकरा-सेमराहाट गांव में कुछ इसी तरह का मामला सामने आया है.

यहां एक प्रेमी जोड़ा पिछले सात साल से बिना शादी विवाह किए साथ रह रहे थे. लड़की ने कई बार लड़के पर शादी के लिए दबाव बनाया, लेकिन लड़का हर बार टालता गया. इस तरह यह सिलसिला करीब सात वर्षों तक चला और इस दौरान लड़की ने दो बच्चों को जन्म भी दे दिया.

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गर्भवती होने पर परिजनों ने घर से निकाल दिया था बाहर

शुरूआत में जब लड़की गर्भवती हुई और इसकी जानकारी उसके परिजनों को हुई तो उन्होंने उसे घर से बाहर निकाल दिया. हालांकि गांव वालों ने उस दौरान पहल करते हुए लड़की को लड़के के घर में जगह दिला दिया.

हालांकि उस दौरान ग्रामीणों ने कहा कि जब बच्चा हो जायेगा तो लड़की और लड़के की शादी करा दी जायेगी. लेकिन ऐसा नहीं हो सका और पांच वर्ष का लंबा समय बीत गया. इसी बीच लड़की फिर से गर्भवती हो गयी और उसने दूसरे बच्चे को जन्म दे दिया.

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महिलाओं की ‘जनी पंचायत’ ने सुनी फरियाद 

लड़की पुनीता कुमारी कुंवारी मां बनकर लगातार प्रेमी के घर रह रही थी. समाज और परिवार के तानों से लड़की परेशान रहती थी. इस बीच लड़की द्वारा चैनपुर के बेसिक फाउंडेशन-द अल्टरनेट स्पेस की जनी पंचायत में शिकायत की और यौन शोषण करने का आरोप लगाया.

जनी पंचायत से जुड़ी महिलाओं ने मामले में गंभीरता दिखायी और दोनों पक्षों के साथ पंचायती की. प्रेमी संतोष भुइयां ने दोष स्वीकारा गया और पंचायत से शादी कराने का आग्रह किया.

दोनों पक्षों की सहमति के बाद गत 7 अप्रैल को उनकी शादी मंदिर में करायी गयी. साथ ही कोर्ट से शादी का निबंधन कराने का सुझाव भी दिया.

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महिलाओं ने की पंचायती 

पंचायत में दोनों पक्षों के रिश्तेदार के अलावा जनी पंचायत की न्याय सखी निशु देवी, गीता देवी, रीना देवी, मंजू देवी लड़के के पिता नन्द देव भुइयां, वंदना कुमारी, नेहा कुमारी और पत्रकार अभिषेक जौरिहार भी शामिल थे.

संस्था की पलामू जिला कॉडीनेटर श्रीमति वंदना कुमारी ने कहा कि महिलाएं घरेलु हिंसा की शिकार ज्यादा होती हैं. महिलाओंं में कानून की जानकारी का आभाव रहने के कारण अपने उपर होने वाली हिंसा को रिवाज मान लेती हैं. लेकिन समय बदल गया है. महिलाओं को अपने ऊपर हो रहे हिंसा के खिलाफ आवाज उठानी चाहिए.

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