न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

’24 तारीख की सुनवाई में रोक हटी तो लाखों आदिवासी परिवार हो जायेंगे बेघर’

सुप्रीम कोर्ट के आदेश से प्रभावित होने वाले वन क्षेत्रों के हजारों लोगों ने जताया अपना आक्रोश

1,098

Ranchi/Palamu : वनाधिकार कानून 2006 को सख्ती से लागू कराने की मांग को लेकर और सोनभ्रद्र में हुए जनसंहार व वन कानून 1927 के संशोधन के विरोध में जगह-जगह मानव श्रृंखला बनाकर जल, जंगल, जमीन पर अपना हक मानव शृंखला व जुलूस निकाला गया.

केंद्रीय जन संघर्ष समिति के बैनर तले नेतरहाट फील्ड फायरिंग रेंज, पलामू व्याघ्र परियोजना व वाइल्डलाइफ कॉरीडोर से प्रभावित लोगों ने गुमला, लातेहार और पलामू जिले के कई इलाकों में मानव श्रृंखला बनाकर आक्रोश प्रकट किया.

JMM

समिति ने कहा कि वन्यजीव संरक्षण के नाम पर 13 फरवरी 2019 को माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जंगलों में रहने वाले आदिवासियों एवं अन्य वन निवासियों को अतिक्रमणकारी कहकर 27 जुलाई 2019 से जंगलों से हटाने का आदेश राज्य सरकारों को दिया है.

इसे भी पढ़ें : स्कूल जाने के लिए रोज जान जोखिम में डाल रेलवे लाइन पार करते हैं 200 से ज्यादा बच्चे

Bharat Electronics 10 Dec 2019

’23 राज्यों के 23 लाख आदिवासी परिवारों को बता दिया अतिक्रमणकारी’

समिति के अनुसार, इस आदेश से 23 राज्यों के 23 लाख से भी अधिक आदिवासी व अन्य वन निवासी परिवारों को अतिक्रमणकारी बता दिया गया है. राज्य सरकार के द्वारा वैसे लोगों का, जिनके वन भूमि के दावे खारिज कर दिये गये हैं, उसमें वन विभाग ने अपने मानमाने तौर पर साक्ष्य को नकारते हुए वन अधिकार कानून के विरुद्व काम किया है. हालांकि देशव्यापी विरोध के बाद सुप्रीम कोर्ट ने अपने 13 फरवरी के फैसले पर रोक लगा दी है. लेकिन अगर 24 तारीख की सुनवाई में ये रोक हटा दी गयी तो लाखों लोग विस्थापित होंगे.

जल-जंगल-जमीन की रक्षा के लिए प्रभावित इलाके के गुमला जिले के गुमला, टोंगो, चैनपुर, जारी, डुमरी एवं रजावल, विशुनपुर, लातेहार जिले के महुआडांड़, बोहटा, पकरी पाठ, विजयपुर, पंडरा में लोग तख्ती लेकर सड़कों पर पर उतरे और विरोध प्रकट किया.

‘झारखंड में प्रभावित होंगे 28 हजार परिवार’

Related Posts

सीएनटी-एसपीटी एक्ट उल्लंघन के हजारों मामले लंबित लेकिन नहीं बन सके चुनावी मुद्दा

डबल इंजन की सरकार ने एसआइटी गठित की थी लेकिन विभाग में धूल फांक रही रिपोर्ट, विधानसभा में लगातार एसआइटी की रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग होती रही, फिर भी नहीं हुई सार्वजनिक

पलामू के जिला मुख्यालय मेदिनीनगर में झारखंड वनाधिकारी मंच के बैनर तले रैली निकाली गयी. टाउन हाॅल से रैली शुरू होकर प्रमंडलीय आयुक्त के कार्यालय के पास पहुंच कर सभा में तब्बदील हो गयी. सभा में गढ़वा, पलामू और लातेहार के विभिन्न गांवों से हजारों की संख्या में आदिवासी व अन्य परंपरागत वन निवासियों ने भाग लिया.

मंच के पदाधिकारियों ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश से झारखंड में 28000 से उपर परिवार इस आदेश से प्रभावित होंगे.

सभा को संबोधित करते हुए मानिकचंद करोवा ने कहा कि सरकार व कंपनियां एक साजिश के तहत जंलग से आदिवासियों को बेदखल कर दोहन करना चाहती है. जेम्स हेरेंज ने कहा कि हमारे पूर्वजों जंगल को बचाया और इसी से हम अपनी जीविका चला रहे हैं. मगर वन विभाग द्वारा जंलग बचाने के नाम पर दोहन कर रहा है.

इसे भी पढ़ें :  भाजपा ने साध्वी प्रज्ञा ठाकुर को चेताया,  विवादास्पद बयानों से बचने को कहा

‘देश में अभी खराब चल रहा माहौल’

भाकपा माले के मो सरफराज ने कहा कि देश का माहौल अभी खराब चल रहा है. साजिश के तहत दलित, आदिवासी और मुसलमानों के उपर अत्याचार और दमनकारी नीति अपनायी जा रही है.

सभा को भुखन सिंह, जनेश्वर मिस्त्री, दिव्या भगत, संग्राम मोरचा अशोक पाल, राजन, आईसा के दिव्य भगत सहित कई लोगों ने संबोधित किया. धीरज के द्वारा सभा में गांव छोड़ नहीं…आदि गीत प्रस्तुत किये गये.

रैली व सभा में बलराम उरांव, अमरदयाल सिंह, खरीदन परहिया, धीरज कुमार, चंद्रदेव महतो, गणेश परहिया, राजेश्वर, राम रविदास, उमेश परहिया, जयमंगल सिंह, झरी सिंह, सुमणी कुंवर, नन्हकू सिंह, अर्जुन तिर्की, जितन भुइयां, सिताराम भुइयां मरदा और एनसीडीएचआर से मिथिलेश कुमार सिंह समेत हजारों की संख्या लोगों ने भाग लिया. सभा का संचालन अविनांश रंजन ने किया.

इसे भी पढ़ें : भाकपा माओवादी को सबसे ज्यादा लेवी झारखंड से, लालच में दूसरे राज्यों से आ रहे नक्सली

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like