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राजधानी रांची में हाल में हुई हत्या की कई घटनाओं में हत्यारों को अब तक नहीं पकड़ पायी है पुलिस

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Ranchi : राजधानी रांची में जमीन विवाद में हत्या होना आम बात हो गयी है. पिछले कुछ महीनों के दौरान हत्या की कई ऐसी घटनाएं हुई हैं, जिनमें हत्यारे को पुलिस गिरफ्तार करने में अब तक असफल रही है. हत्या के समय पुलिस मृतक के परिजनों को हत्यारे की गिरफ्तारी का आश्वासन देती है, लेकिन हत्यारे को गिरफ्तार करने में पुलिस असफल रही है. पिछले कुछ महीनों के दौरान राजधानी रांची में सामु उरांव, सामी मुंडा, अरुण किस्पोट्टा, अमित टोपनो और बुधु दास की हत्या हुई. अमित टोपनो की हत्या को छोड़कर बाकी लोगों की हत्या के पीछे जमीन विवाद का मामला सामने आया था, लेकिन इन सभी लोगों के हत्यारों को आज तक पुलिस गिरफ्तार नहीं कर पायी है.

जमीन विवाद में हुईं अधिकतर हत्याएं

राजधानी रांची में सामु उरांव, सामी मुंडा, अरुण किस्पोट्टा और बुधु दास की हत्या के पीछे जमीन विवाद का मामला सामने आया है. पत्रकार अमित टोपनो हत्याकांड का आज तक खुलासा नहीं हो पाया है कि उसकी हत्या क्यों हुई. इसमें किसी आरोपी की अब तक गिरफ्तारी नहीं हुई है. वहीं, सामु उरांव, सामी मुंडा, अरुण किस्पोट्टा और बुधु दास की हत्या जमीन विवाद में कर दी गयी, लेकिन इस मामले में अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं.

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रिंग रोड ने बढ़ायी जमीन की कीमत

राजधानी रांची और इसके आस-पास के क्षेत्रों में हुई हत्याओं के अधिकतर मामलों में जमीन पर वर्चस्व की लड़ाई सामने आयी है. कई कीमती भूखंडों पर जमीन माफिया अपनी नजर गड़ाये हुए हैं, जिसके चलते आये दिन हत्याएं हो रही हैं. रांची के चारों तरफ रिंग रोड के बनने से जमीन की कीमत आसमान छूने लगी है. रिंग रोड के आस-पास सैकड़ों एकड़ जमीन खाली पड़ी हुई है. इस खाली पड़ी जमीन का जमीन माफिया सौदा कर रहे हैं. अधिकांश भूखंड सीएनटी प्रभावित और विवादित भी हैं, इसके बावजूद जमीन माफिया जमीन की खरीद-बिक्री धड़ल्ले से कर रहे हैं और इसकी वजह से हत्याएं भी हो रही हैं.

रांची के कई इलाकों में जमीन माफिया खोलकर बैठे हैं अपना ऑफिस

राजधानी रांची के कई इलाकों में जमीन माफिया अपना ऑफिस खोलकर बैठे हुए हैं और वहीं से जमीन की सौदेबाजी भी करते हैं. जमीन की हेराफेरी के मामले में जमीन माफिया सक्रिय हैं. आदिवासी जमीन को बेचने और जबरन कब्जा करने में जमीन माफिया जुटे हैं. वे मोटी रकम का लालच देकर आदिवासियों से जमीन लेकर बड़े कारोबारियों के बीच बेच रहे हैं. इन भूखडों पर कब्जा करने में जो जमीन माफिया के रास्ते में रोड़ा बन रहा है, उसकी हत्या करवा दी जा रही है.

पिछले कुछ महीनों में ऐसी कई हत्याएं हुईं, जिनमें हत्यारे नहीं हो सके हैं गिरफ्तार

  • सात सितंबर 2018 को सीएम आवास के सामने सरेशाम पुलिस के पूर्व एसपीओ बुधु दास की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. हत्या के पीछे बुंडू में जमीन विवाद का मामला सामने आया था, लेकिन इस मामले में हत्यारे की गिरफ्तारी नहीं हो पायी है.
  • दो दिसंबर 2018 को पंडरा ओपी क्षेत्र के बजरा स्थित मुंडा चौक के पास एक बाइक पर सवार होकर आये दो अज्ञात अपराधियों ने सामी मुंडा को गोली मार दी. उसके बाद 15 दिसंबर को सामी मुंडा की रिम्स में मौत हो गयी थी. इस मामले में भी अभी तक हत्यारे की गिरफ्तारी नहीं हुई है.
  • आठ दिसंबर 2018 को तोरपा निवासी अमित टोपनो की बंडा थाना क्षेत्र में गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस मामले में भी अब तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो पायी है.
  • 29 दिसंबर 2018 को डोरंडा थाना क्षेत्र के बड़ा घाघरा में जमीन विवाद के चलते अरुण किस्पोट्टा नाम के व्यक्ति को गोली मार दी गयी. उसे घायलावस्था में रिम्स में भर्ती कराया गया, जहां अगली सुबह उसकी मौत हो गयी. इस मामले में भी पुलिस हत्यारे को गिरफ्तार नहीं कर पायी है.
  • आठ जनवरी 2019 को डोरंडा के कुसई घाघरा में छह हथियारबंद अपराधियों ने रात के करीब 10 बजे दो लोगों पर ताबड़तोड़ फायरिंग की. इसमें सामू उरांव की मौत हो गयी और उनके दोस्त शंकर सुरेश उरांव गंभीर रूप से घायल हो गये. इस मामले में भी अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं.

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