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मॉब लिंचिंग पर राजनीति दुखद, देश की सबसे बड़ी लिंचिंग 1984 की घटना : राजनाथ

संसद के मानसूत्र सत्र में मंगलवार को पांचवें दिन लोकसभा में देशभर में मॉब लिंचिंग और महिलाओं के साथ बढ़ रही छेड़छाड़ की घटनाओं पर हलचल मची रही.

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 NewDelhi : संसद के मानसूत्र सत्र में मंगलवार को पांचवें दिन लोकसभा में देशभर में मॉब लिंचिंग और महिलाओं के साथ बढ़ रही छेड़छाड़ की घटनाओं पर हलचल मची रही. विपक्ष ने एकजुट होकर सरकार से जवाब मांगा. राजद और कांग्रेस के सांसदों ने मुजफ्फरपुर में रेप की घटना पर चर्चा के लिए स्थगन प्रस्ताव को नोटिस दिया. वहीं सीपीएम ने लोकसभा में पश्चिम बंगाल और त्रिपुरा में हिंसा को घटनाओं पर चर्चा के लिए शून्य काल का नोटिस दिया है. उधर कांग्रेस पीएम मोदी और रक्षा मंत्री सीतारमन के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव लाने पर विचार कर रही है.

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बता दें कि आज विपक्ष द्वारा मॉब लिंचिंग का मुद्दा उठाये जाने पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने जवाब दिया. अपने जवाब में कहा कि देश में लिंचिंग की घटनाएं कोई पहली बार नहीं हो रही हैं और ऐसी घटनाओं पर राजनीति करना बहुत दुखद है. कहा कि ऐसा नहीं होनी चाहिए. कांग्रेस पर हमलावर होते हुए कहा कि देश की सबसे बड़ी लिंचिंग 1984 की घटना थी. ऐसी कई घटनाएं मैंने भी देखी हैं.  मॉब लिंचिंग  पर सरकार ने कई कदम उठाये हैं और एक उच्चस्तरीय कमिटी का भी गठन किया गया है.  कमिटी की सिफारिशों के बाद ऐसे मामलों पर कठोर कार्रवाई करने के लिए कदम उठाए जायेंगे.  अगर कानून की जरूरत होगी तो सरकार वह भी लाने के लिए तैयार है.

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गृह मंत्री के नेतृत्व में जीओएम भी बनाया गया

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इस क्रम में राजनाथ सिंह ने बताया कि गृह सचिव राजीव गोबा की अध्यक्षता में समिति का गठन किया गया है जो 15 दिन के अंदर अपनी रिपोर्ट देगी.  गृह मंत्री ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के निर्देश पर उनकी  अगुवाई में एक मंत्रिसमूह (जीओएम) भी बनाया गया है जो जल्द से जल्द अपनी रिपोर्ट देगा. जीओएम में राजनाथ सिंह के अलावा विदेश मंत्री, कानून मंत्री, सड़क एवं परिवहन मंत्री, जल संसाधन मंत्री और सामाजिक न्याय मंत्री शामिल होंगे. जीओएम अपनी रिपोर्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सौंपेगा.

देशभर में पिछले दिनों सामने आये भीड़ द्वारा हत्या के मामलों की पृष्ठभूमि में सरकार ने यह कार्रवाई की है. बता दें कि केंद्र सरकार मॉब लिंचिंग को दंडनीय अपराध के तौर पर परिभाषित करने के लिए भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) में संशोधन कर सकती है .

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