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निजी स्कूलों को लेनी होगी फिर से मान्यता, झारखंड के 12,16,398 बच्चों के भविष्य पर संकट

झारखंड सरकार ने शिक्षा का अधिकार अधिनियम में किया है संशोधन

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Ranchi: झारखंड सरकार ने इस वर्ष शिक्षा का अधिकार अधिनियम में संशोधन किया है. इस संसोधन के बाद अब राज्य में जितने भी प्राइवेट स्कूल हैं, उन्हें नयी नियमावली के तहत मान्यता लेनी होगी.

इस नियमावली से 12 लाख से अधिक विद्यार्थियों के भविष्य पर संकट आ गया है. गौरतलब हो कि वर्ष 2018 की रिपोर्ट के अनुसार राज्य में निजी विद्यालयों की संख्या 5245 है. इसमें से लगभग 4740 विद्यालय ऐसे हैं जो किसी भी बोर्ड से मान्यता प्राप्त नहीं हैं.

वर्ष 2018-19 में इन विद्यालयों में 12,16,398 विद्यार्थी नामांकित हैं. पिछले छह साल में ऐसे विद्यालयों में पढ़नेवाले बच्चों की संख्या में 4,81,210 की बढ़ोतरी हुई है.

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वर्ष 2013-14 में गैर मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों में 73,5,188 विद्यार्थी नामांकित थे. आज यह संख्या बढ़कर 12,16,398 हो गयी है.

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गलत है सरकार का यह आदेश

इस संबंध में प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अध्यक्ष आरपी तिवारी बताते हैं कि सरकार का यह आदेश गलत है. इस आदेश में एकरूपता नहीं दिखती है.

शिक्षा विभाग की ओर से संशोधित नियमावली का आदेश जारी होने के बाद विभिन्न जिला के जिला शिक्षा पदाधिकारियों ने आवेदन पत्र जारी करते हुए फिर से मान्यता लेने को कहा है. प्राइवेट स्कूल इसका विरोध कर रहे हैं.

रांची के जिला के प्राइवेट स्कूलों को 30 नवंबर 2019 तक आवेदन जमा कर देना है. प्राइवेट स्कूल एसोसिएशन के अनुसार शिक्षा विभाग के आदेश की मानें तो 90 फीसदी स्कूलों को मान्यता नहीं मिल पायेगी. मान्यता लेने के लिए स्कूलों का फिर से निर्माण कराना होगा.

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क्या है नयी नियमावली में

विभाग की ओर से जारी नियमावली में बड़ा पेंच स्कूलों की जमीन को लेकर है. नयी नियमावली में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी (कक्षा एक से पांच) व माध्यमिक (कक्षा छह से आठ) स्कूलों के संचालन के लिए जमीन के विस्तार को बढ़ा दिया गया है.

अब ग्रामीण क्षेत्रों में प्राइमरी स्कूल के संचालन के लिए 60 डिसमिल व शहरी क्षेत्रों में संचालन के लिए 40 डिसमिल जमीन अनिवार्य है. इसी तरह ग्रामीण क्षेत्रों में माध्यमिक स्कूल संचालन के लिए 1 एकड़ व शहरी क्षेत्रों में संचालन के लिए 0.75 एकड़ जमीन जरूरी है.

राज्य में संचालित हो रहे प्राइवेट स्कूलों में लगभग 50 फीसदी स्कूलों के पास जमीन विस्तार को लेकर समस्या है. यह समस्या शहरी क्षेत्र के प्राइवेट स्कूलों में ज्यादा है. इसके अलावा नयी शिक्षा नियमावली में क्लास रूम के साइज को तय किया गया है.

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प्राइवेट स्कूलों का कहना है, ऐसे में तो हमें फिर से क्लास रूम बनाने पड़ेंगे. वहीं कुल जमीन का दो तिहाई हिस्सा स्पोटर्स व अन्य गतिविधियों के लिए रखने को कहा गया है.

शहरी क्षेत्र में संचालित हो रहे स्कूलों में नयी नियमावली के अनुसार ऐसा करना संभव नहीं हो पा रहा है. प्राइवेट स्कूलों की मानें तो संशोधित नियमावली की कई बातें अव्यावहारिक हैं. स्कूल प्रबंधकों का मानना है कि नयी शर्तों को पूरा नहीं किया जा सकता है.

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