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पुलवामा हमला :  राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को सर्वदलीय बैठक होने के संकेत

केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सीसीएस की बैठक के बाद जानकारी दी कि गृहमंत्री फिलहाल श्रीनगर जा रहे हैं और वहां कई बैठकों में हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा कि वापस आकर उनकी अध्यक्षता में शनिवार को सर्वदलीय बैठक हो सकती है,

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NewDelhi : जम्मू- कश्मीर के पुलवामा में गुरुवार को हुए आतंकी हमले को लेकर शुक्रवार को सुरक्षा मामलों की कैबिनेट कमेटी (सीसीएस) की बैठक हुई. बैठक में जिसमें कई अहम फैसले लिये जाने की खबर हैं. बता दें कि  बैठक में एक सर्वदलीय बैठक बुलाने पर भी सहमति बनी है. खबरों के अनुसार  केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में शनिवार को बैठक होने की संभावना है. केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने सीसीएस की बैठक के बाद जानकारी दी कि गृहमंत्री फिलहाल श्रीनगर जा रहे हैं और वहां कई बैठकों में हिस्सा लेंगे. उन्होंने कहा कि वापस आकर उनकी अध्यक्षता में शनिवार को सर्वदलीय बैठक हो सकती है, ताकि देश के सभी राजनीतिक दलों को इस हमले की पूरी जानकारी दी जा सके.  जानकारों के अनुसार मोदी सरकार ने सर्वदलीय बैठक का फैसला लेकर एक बड़ा सियासी संदेश देने की कोशिश की है. बता दें कि तमाम विपक्षी दल जवानों की शहादत को लेकर पहले भी केंद्र सरकार पर निशाना साधते आये हैं. ऐसे में पुलवामा हमले के बाद सियासी हमले और तेज हो सकते हैं.  ऐसे में सरकार के लिए जरूरी है कि वह सभी दलों को विश्वास में ले,  ताकि उनके जरिए देश में आतंक के खिलाफ एक राय से कोई फैसला लिया जा सके. सूत्रों के अनुसार  सरकार इस सर्वदलीय बैठक में न सिर्फ राजनीतिक दलों को हमले की पूरी जानकारी देगी,  बल्कि उनकी राय और ऐसे हमले के निपटने के बारे में अन्य दलों के विचारों पर भी चर्चा करेगी.

देश के नाम पर सभी दल एक सुर में पहले भी खड़े दिखाई दिये हैं

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लोकसभा चुनाव में पूर्व सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच संसद से सड़क तक राजनीतिक आरोप-प्रत़्यारोप जारी है. विपक्षी नेता हर रोज मोदी सरकार पर निशाना साध हैं. मोदी सरकार की नीतियों की भी जम कर आलोचना की जा रही है. लेकिन देश के नाम पर सभी दल एक सुर में पहले भी खड़े दिखाई दिये हैं. सर्वदलीय बैठक में अगर आतंकवाद पर लगाम कसने के लिए किसी कदम पर सहमति बनती है तो यह पूरे देश का फैसला होगा, ऐसे में विपक्षी दलों की भी इसमें भागीदारी होगी और तब इस कदम के बाद सरकार को घेरना आसान नहीं रहेगा.  सरकार की कवायद है कि सर्वदलीय बैठक के जरिए उन सभी दलों को एक मंच पर लाया जाये, जो पूर्व से सरकार द्वारा  आतंक के खिलाफ उठाए गये कदमों को शक के दायरे में खड़ा करते रहे हैं.

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जानकार कहते हैं कि सर्वदलीय बैठक बुलाने के फैसले से प्रधानमंत्री मोदी का सियासी कद और भी बड़ा हो जायेगा. अक्सर विपक्षी दल सरकार पर आरोप लगाते रहे हैं कि पूरी सरकार सिर्फ एक शख्स चलाता है और वो हैं नरेंद्र मोदी. कैबिनेट तक को सरकार के फैसलों के बारे में जानकारी नहीं होती है. इन आरोपों के जवाब में सर्वदलीय बैठक बुलाना एक रणनीतिक कदम भी है क्योंकि इससे देश के हित में सबको साथ लेकर चलने वाले नारे को बल   मिलेगा.

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