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#Jharkhand_election  भाई-भाई, पति-पत्नी, देवरानी-जेठानी, मुख्यमंत्री-मंत्री…एक दूसरे के खिलाफ हैं मैदान में

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Ranchi :  चुनाव हो और ये सुनने को न मिले की सत्ता के लिए भाई-भाई, देवरानी-जेठानी एक दूसरे के खिलाफ चुनाव न लड़ें तो मामला अधूरा लगता है. पर झारखंड विधानसभा में तीन और ऐसे मामले हैं जो अमूमन देखने को नहीं मिलते.

राज्य की एक विधानसभा सीट से पति-पत्नी भी मैदान में हैं. वहीं सबसे ज्यादा ध्यान तमाड़ सीट खींच रहा है, जहां पिता की हत्या के बाद पुत्र, हत्या कराने का आरोपी और हत्या कराने का आरोपी, तीनों एक साथ चुनावी मैदान में हैं. वहीं सबसे हॉट सीट मानी जा रही जमशेदपूर पूर्वी में मुख्यमंत्री और उनके कैबिनेट के मंत्री एक दूसरे के आमने-सामने हैं.

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जमशेदपूर पूर्वी से मुख्यमंत्री के खिलाफ उन्हीं के मंत्री

जमशेदपूर पूर्वी से मुख्यमंत्री रघुवर दास के खिलाफ उन्हीं के कैबिनेट के हैविवेट मंत्री सरयू राय चुनाव लड़ रहे हैं. सरयू राय को भाजपा के टिकट मिलने में हो रही देरी के कारण टिकट लेने से मना कर मुख्यमंत्री के खिलाफ ही चुनाव लड़ने की बात कह दी.

सरयू राय मैदान में पूरे जोर शोर से लगे हैं और सीएम के भ्रष्टाचार की कहानी उजागर करने के बात के साथ मैदान में हैं. वहीं सीएम अपनी जीत को आसान बता रहे हैं. मीडिया में चल रहे सर्वेक्षण के हिसाब से जनता सरयू राय को उनके इस फैसले का स्वागत कर उनका साथ देने की बात कह रही है.

दूसरी तरफ सीएम अपने क्षेत्र से दूर दूसरे विधानसभा क्षेत्रों में पार्टी के लिए प्रचार कर रहे हैं.

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झरिया में एक ही परिवार की दो बहुएं आपस में लड़ेंगी

झारिया विधानसभा में एक ही परिवार की दो बहुएं एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में ताल ठोंक रही हैं. वर्तमान विधायक की पत्नी रागिनी सिंह भाजपा के सिंबल पर चुनावी मैदान में हैं तो उनके चचेरे भाई की पत्नी पूर्निमा सिंह कांग्रेस के टिकट से चुनावी मैदान में हैं.

पिछले चुनाव में इन दोनों के पति आपस में चुनाव लड़े थे. बाद में भाजपा के टिकट पर विधायक बने संजीव सिंह अपने खिलाफ चुनाव लड़े भाई नीरज सिंह की  हत्या के आरोप में जेल में बंद हैं. झरिया विधानसभा सीट पर सिंह मेंशन नाम से प्रसिद्ध इस परिवार का वर्चस्व रहा है.

मांडू में तीन भाइयों के बीच महामुकाबला

मांडू विधानसभा में एक दूसरे के खिलाफ राज्य के दिग्गज नेता स्व टेकलाल महतो के दोनों बेटे चुनावी मैदान में हैं. वर्तमान विधायक और जेएमएम से बगावत कर भाजपा के जयप्रकाश भाई पटेल के खिलाफ उनके ही बड़े भाई राम प्रकाश भाई पटेल झामुमो के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. इन दोनों के खिलाफ इनके अपने चचेरे भाई चंद्रनाथ भाई पटेल बाबूलाल मरांडी की पार्टी से चुनावी मैदान में हैं.

टेकलाल महतो ने अपने जीवित रहते ही अपने बड़े बेटे को राम प्रकाश भाई को 2005 में चुनाव लड़ाया था. पर वो हार गये थे. वहीं उनके मरने के बाद जयप्रकाश भाई पटेल पहली बार उपचुनाव जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. उसके तुरंत बाद 2014 के चुनाव में भी 50 हजार से अधिक वोटों से जीतकर विधानसभा पहुंचे थे. उन्होंने अपने चचेरे भाई को ही हराया था.

पर समीकरण इस बार अलग है. जयप्रकाश के खिलाफ उनके अपने ही बड़े भाई मैदान में हैं. उनके दलबदल से छवि थोड़ी धूमिल भी हुई है. उनके पिता टेकलाल महतो झामुमो के संस्थापक सदस्यों में से एक थे. इस बार मांडू क्षेत्र से आजसू के टिकट पर तिवारी महतो का भी आना समीकरण को बदल रहा है.

तमाड़ सीट अलग लड़ाई का बन रहा गवाह

एक के पिता की हत्या की गयी. पिता की हत्या का आरोपी और हत्या कराने का आरोपी और पुत्र, तीनों तमाड़ सीट से विधायक बनने के लिए एक दूसरे के खिलाफ चुनावी मैदान में हैं. वर्तमान विधायक विकास सिंह मुंडा के पिता पूर्व मंत्री रमेश सिंह मुंडा की हत्या एक सभा के दौरान कर दी गयी थी.

आरोप है कि राजा पीटर ने हत्या कुंदन पाहन से करायी थी. तीनों चुनावी मैदान में एक दूसरे के खिलाफ हैं. तमाड़ सीट पर इस बार झामुमो के टिकट पर विकास मुंडा लड़ रहे हैं. इन्हें महागठबंधन के उम्मीदवार होने का फायदा है. वहीं राजा पीटर और कुंदन पाहन जेल से चुनाव लड़ रहे हैं.

लोकतंत्र की इस आजादी में जीत का सेहरा किसके सर सजेगा ये देखना मजेदार होगा. फिलहाल विकास सिंह मुंडा मजबूत स्थिति में हैं.

भवनाथपुर में पति की लड़ाई पत्नी से

सात फेरे लेकर एक-दूसरे का साथ निभाने की कसम लेने वाले मनीष सिंह एवं उनकी पत्नी प्रियंका देवी भवनाथपुर सीट से आमने-सामने हैं. बतौर निर्दलीय प्रत्याशी दोनों ने बुधवार को नामांकन किया है. अब देखना रोचक होगा की वे अपने प्रचार के दौरान क्या करेंगे. इस सीट पर मुकाबला भानूप्रताप शाही और अनंत प्रताप देव के बीच ही है.

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