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रांची : रिम्स में लावारिस पड़े 40 शवों को दी गई मुखाग्नि

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Ranchi : रिम्स में रखे अज्ञात और लावारिस 40 शवों का मुक्ति संस्था ने अंतिम संस्कार किया. जिससे कि बेनाम शवों को एक साथ मुखाग्नि और पंचतत्व में विलीन होते ही मुक्ति मिल गई.

मुक्ति संस्था ने रांची के बूटी मोड़ स्थित जुमार पुल में में एक साथ 40 शवों का अंतिम संस्कार किया. गौरतलब है कि इन शवों की पहचान नहीं हो सकी थी. और पिछले तीन महीने से ये शव रिम्स के शव गृह में रखे हुए थे. मुक्ति संस्था की ओर से अबतक 799 लावारिस शवों अंत्योष्टि की जा चुकी है.

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मुक्ति संस्थान के द्वारा किया जाता है अंतिम संस्कार

ज्ञात हो कि पहले रिम्स के पोस्टमार्टम में कई महीनों से अज्ञात शव पड़े रहते थे. जिसकी स्थिति काफी दयनीय हो जाती थी मगर संस्था के आगे आने से शवों को आदर सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना किया जा रहा है.

रविवार को मुक्ति संस्था की ओर से झारखंड के सबसे बड़े अस्‍पताल रिम्स में महीनों से रखे 40 अज्ञात शवों का विधि-विधान से जुमार नदी के तट पर अंतिम संस्कार किया गया. सुबह नौ बजे ही संस्था के सदस्य रिम्‍स के शीत शव गृह पहुंच गए और इन शवों की पैकिंग शुरू कर दी.

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संयुक्त राष्ट्र की ओर से यह अवार्ड दुनिया भर के असाधारण युवाओं को दिया जाता है. इस वर्ष दुनिया भर में 10 युवाओं को इस अवार्ड से नवाजा गया है.

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आदर सम्मान के साथ की गयी शवों की अंत्योष्टि 

सभी शवों को ट्रैक्टर से जुमार नदी के घाट पर ले जाया गया. जहां चिता सजा कर प्रवीण लोहिया ने शवों को मुखाग्नि दी. पुष्प, चंदन, घी, कपूर इत्यादि सभी सामग्री अर्पित कर अंतिम संस्‍कार की तमाम रस्‍में पूरी की गईं.

कहा गया है किसी भी मरने वाले को मुखाग्नि देना बहुत ही पुण्य का काम होता है. मगर कई ऐसे लोग हैं जो विभिन्न दुर्घटनाओं में मौत हो जाने के बाद उनका शव उनके परिजनों को नहीं मिल पाती है.

ऐसे ही लावारिस शव राज्य के सबसे बड़े अस्पताल रिम्स के पोस्टमार्टम रूम में पड़े रहते हैं. शवों का कोई परिजन नहीं होता जो इन्हें अंतिम संस्कार कर आत्मा को शांति और मोक्ष की राह पर ले जाता है.

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