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मीठी क्रांति में खटास: CM की घोषणा 10 हजार किसानों को बांटेंगे मधु बॉक्स, हकीकत में मात्र 118 को ही मिलेगा

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दस हजार के आंकड़े साल-दर-साल घटते जा रहे

2018-19 में बांटे गये 1165 लाभुकों के बीच मधु बॉक्स, इस वित्तीय वर्ष 118 लाभुकों का है टारगेट

दस हजार लाभुकों का आंकड़ा सरकार के टारगेट में भी नहीं

साल 2019-20 के लिये एक करोड़ का बजटीय प्रावधान

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Ranchi: मीठी क्रांति का नाम देते हुए राज्य में मधुमक्खी पालन की शुरूआत की गयी. ग्रामीण किसानों के बीच इस क्रांति के तहत मधु पालन के लिये बॉक्स वितरण करना था. घोषणा तो 10 हजार किसानों के बीच 2.5 लाख मधु बॉक्स वितरण कि की गयी.

मुख्यमंत्री रघुवर दास ने इसकी घोषणा मीठी क्रांति के लॉन्चिंग के दौरान की. लेकिन साल-दर-साल मधु बॉक्स वितरण के टारगेट घटते जा रहे है. वित्तीय वर्ष 2018-19 की बात की जाये तो इस साल 1165 लाभुकों के बीच मधु बॉक्स बांटा गया.

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जबकि टारगेट मात्र 1207 किसानों का था. इस साल 24,140 बॉक्स और 24,140 छत्ते किसानों को देने थे. जबकि 23,300 ही बॉक्स और छत्ते बांटे गये. एक किसान को बीस-बीस बॉक्स बांटने का लक्ष्य रखा गया है.

खुद निदेशालय के सूत्रों से ही जानकारी मिली कि घोषणा दस हजार लाभुकों के बीच मधु बॉक्स वितरण करने की गयी. लेकिन टारगेट मात्र 1207 लाभुकों का रखा गया.

2019-20 के लिये 118 किसानों का टारगेट

दस हजार लाभुकों की घोषणा करने वाले मुख्यमंत्री के 2019-20 के टारगेट को देखें तो और भी हैरानी होगी. इस साल का टारगेट मात्र 118 रखा गया. ऐसे में मुख्यमंत्री की घोषणा कागजों पर आते आते धुमिल होती दिखीं.

गौरतलब है कि उद्यान निदेशालय की ओर से मीठी क्रांति के कार्यों का वहन किया जा रहा है. उद्यान निदेशालय के सूत्रों से जानकारी मिली कि मधु बॉक्स वितरण करने का कार्य लघु एवं कुटीर उद्यम विकास बोर्ड को दिया गया. बोर्ड के ब्लॉक संयोजकों की ओर से मधु बॉक्स का वितरण किया जा रहा है.

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साल 2018-19 के लिये गढ़वा में 42 लाभुकों के बीच बॉक्स वितरण करना था, लेकिन जिला में एक भी बॉक्स नहीं बांटे गये. वहीं राजधानी रांची में सबसे अधिक एक सौ लाभुकों के बीच बॉक्स वितरण किया गया.

फंड की हो रही कमी क्रांति कैसे होगी सफल

मिली जानकारी के मुताबिक साल 2019-20 के लिये सरकार ने सिर्फ एक करोड़ का बजटीय प्रावधान किया है. टारगेट 118, हर एक लाभुक को बीस बीस बॉक्स और छत्त के साथ मधु कंटेनर भी देना है.

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सूत्रों ने बताया कि क्रांति के सफल संचालन के लिये कम से कम सवा करोड़ रूपये की जरूरत होगी. साल 2018-19 के लिये भी सवा करोड़ रूपये का बजटीय प्रावधान किया गया.

जिसमें से मात्र 10 करोड़ ही निदेशालय को दिये गये. ऐसे में योजना के संचालन में काफी परेशानी हो रही है. कुछ लोगों ने मैन पावर की कमी को एक प्रमुख कारण बताया. क्योंकि निदेशालन के कर्मी जमीनी स्तर पर नहीं है.

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