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ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग के पास नहीं आदिम जनजातीय स्वास्थ्य सुविधाओं का आंकड़ा

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  • हो रहे संस्थागत प्रसव लेकिन नहीं मिल रहे 6000 रुपये
  • जननी सुरक्षा योजना के तहत प्रसव पश्चात मिलना है 6000 रुपये
  • आरटीआई के जरिये भी नहीं मिली योजनाओं की सही जानकारी

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Ranchi: आदिम जनजातियों को स्वास्थ्य सुविधाएं देने के लिए राज्य सरकार ने अलग-अलग योजनाएं बनायी हैं. साल 2016 में मुख्यमंत्री ने आदिम जनजातियों के लिए स्पेशल हेल्थ पैकेज, जिसकी लागत सालाना तीन करोड़ रूपये थी, लागू की. इसके बावजूद आदिम जनजातियों तक पहुंचने वाले स्वास्थ्य सुविधाओं का आंकड़ा विभाग नहीं रखती. इसकी जानकारी आरटीआई के जरिये ली गयी.

आरटीआइ के माध्यम से ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग से पूछा गया था कि साल 2011 से कितनी बिरहोर महिलाओं का संस्थागत प्रसव कराया गया. जिसमें विभाग की ओर से जवाब दिया गया कि झारखंड राज्य में संस्थागत प्रसव की उपलब्धि किसी विशेष समुदाय आधारित नहीं है. जवाब में विभाग की ओर से किसी भी आदिम जनजाति से संबधित आंकड़े नहीं दिए गए. जबकि आदिम जनजातिय बाहुल्य इलाकों में सरकार ने 2016 में स्वास्थ्य उपकेंद्रों की स्थापना की घोषणा की थी.

योजनाओं की सही जानकारी नहीं दी गई

इस आरटीआइ में कितनी बिरहोर महिलाओं को मातृत्व सुरक्षा योजना का लाभ मिला इसकी जानकारी मांगी गयी थी. लेकिन विभाग ने मातृत्व सुरक्षा योजना की जानकारी न देकर जननी सुरक्षा योजना की जानकारी दी. जबकि मातृत्व सुरक्षा योजना को 2016 में जबकि जननी सुरक्षा योजना को साल 2005 में लागू किया गया था.

जननी सुरक्षा योजना का समुचित लाभ नहीं

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इस आरटीआइ से स्पष्ट हुआ कि जननी सुरक्षा योजना के तहत महिलाओं को दी जाने वाली 6 हजार की राशि महिलाओं को प्रसव पश्चात नियमित नहीं मिल पा रही है. साल 2011 से 2018 के दिसंबर तक हुए संस्थागत प्रसव और जननी सुरक्षा योजना के लाभ के आंकड़ों में काफी अंतर पाया गया. आरटीआइ कार्यकर्ता ओंकार विश्वकर्मा ने जानकारी दी कि ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों में काफी अंतर है. संस्थागत प्रसव तो ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे है लेकिन योजनाओं को लाभ ग्रामीणों को नहीं मिल रहा.

क्या है मातृत्व सुरक्षा और जननी सुरक्षा योजना

मातृत्व सुरक्षा योजना- प्रधानमंत्री मातृत्व सुरक्षा योजना को साल 2016 में लागू किया गया. जिसका मुख्य उद्देश्य प्रसव पूर्व महिलाओं को उचित जांच और देखभाल मुहैया कराना है. इसके लिए गर्भधारण के चार माह बाद से गर्भवती को देखभाल और सही खान-पान के लिए न्यूनतम राशि दी जाती है. इसके साथ ही प्रत्येक माह की निश्चित तिथि को महिला की जांच की जाती है.

जननी सुरक्षा योजना- जननी सुरक्षा योजना 2005 में लागू की गई. जिसके तहत गर्भवती महिलाओं को प्रसव पश्चात 6000 रूपये दिए जाते हैं. यह राशि बैंक खाते में डाले जाते हैं. जो महिला की जरूरत और खान-पान को देखते हुए दिये जाते हैं.

ग्रामीण स्वास्थ्य विभाग द्वारा दिये गये आंकड़ें 

सालसंस्थागत प्रसव की उपलब्धिजननी सुरक्षा योजना का  लाभ
2010 से 20113 लाख 50 हजार 5542 लाख 10 हजार 716
2011-20123 लाख 68 हजार 5602 लाख 29 हजार 643
2012-20133 लाख 26 हजार 5252 लाख 74 हजार 536
2013 – 145 लाख तीन हजार 9292 लाख 88  हजार 265
2014-153 लाख 84 हजार 7152 लाख 54 हजार 942
2015-165 लाख 53 हजार 3162 लाख 43  हजार 570
2016-176 लाख 60 हजार 9462 लाख 99 हजार 209
2017-187 लाख 23 हजार 4754 लाख 21 हजार 428
2018 दिसंबर माह तक5 लाख 25 हजार 4743 लाख 3 हजार 364

 

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