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ममता सरकार को बर्खास्त कर उसे शहीद होने की सहानुभूति नहीं लेने देना चाहती मोदी सरकार

लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर है. जानकारों के अनुसार राजनीतिक हिंसा पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच जारी सियासी जंग के बावजूद अभी ममता सरकार की बर्खास्तगी के आसार नहीं हैं.

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Kolkata : लोकसभा चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा चरम पर है. जानकारों के अनुसार राजनीतिक हिंसा पर केंद्र और राज्य सरकार के बीच जारी सियासी जंग के बावजूद अभी ममता सरकार की बर्खास्तगी के आसार नहीं हैं. सूत्रों का कहना है कि मोदी सरकार नहीं चाहती कि राष्ट्रपति शासन के कारण ममता खुद को शहीद बताकर सहानुभूति हासिल करने में सफल हों.  माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने भी सोमवार को कहा कि पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था की स्थिति खराब है लेकिन राज्य में राष्ट्रपति शासन नहीं लागू करना चाहिए, क्योंकि हम हमेशा से इस कदम के खिलाफ रहे हैं.  उन्होंने कहा कि जमीन पर क्या हो रहा है, इसकी जानकारी के लिए ग्राउंड रिपोर्ट लेनी चाहिए.

जहां तक भाजपा की बात है तो, उसकी योजना तृणमूल से जुड़े छोटे-बड़े नेताओं को अपने पाले में कर पार्टी के जमीनी आधार खो देने का संदेश देने की है. बता दें कि  तृणमूल और भाजपा दोनों एक दूसरे पर हिंसा की राजनीति का आरोप लगा रहे हैं. केंद्र सरकार की ओर से पश्चिम बंगाल के लिए एडवाइजरी जारी करने और इसके अगले ही दिन राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी की पीएम मोदी और गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात के बाद केंद्र की ओर से सख्त कदम (बर्खास्तगी) उठाये जाने की अटकलें लगाई जा रही हैं.

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ममता गलतियां पर गलतियां कर रही हैं

राज्य की रणनीति से जुड़े भाजपा के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार  लोकसभा के नतीजे आने के साथ ही पश्चिम बंगाल में साफ संदेश गया है कि सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस गहरे संकट में है.  चिढ़ी हुई ममता गलतियां पर गलतियां कर रही हैं, जिसके कारण तृणमूल को और नुकसान हो रहा है. चुनावी नतीजे आने के बाद बड़ी संख्या में तृणमूल कार्यकर्ता और नेता भाजपा में शामिल हो रहे हैं, इससे यह धारणा बन रही है कि राज्य की राजनीति से तृणमूल की चला चली की बेला है.

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 रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार यूजर्स को अपनी केवाईसी करानी होगी. इसके लिए  यूजर्स पैन कार्ड, आधार कार्ड, वोटर आईडी कार्ड या फिर पासपोर्ट जैसे सरकारी डॉक्यूमेंट दे सकेंगे.

ऐसे में जब तृणमूल खुद जमीनी स्तर पर कमजोर हो रही है, तब राष्ट्रपति शासन लगाने से ममता जनता की सहानुभूति हासिल कर सकती हैं. जाहिर तौर पर भाजपा नहीं चाहती कि सियासी मोर्चे पर पार्टी के दांव से बुरी तरह घिर चुकी ममता को राष्ट्रपति शासन के रूप में एक बड़ा सियासी मुद्दा हाथ लग जाये.

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ममता बनर्जी का आरोप, सरकार गिराने की साजिश रची जा रही है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने आरोप लगाया है  कि केंद्र सरकार और भाजपा के कार्यकर्ता और नेता राज्य में हिंसा भड़काने का प्रयास कर उनकी सरकार गिराने की साजिश रच रहे हैं.  उन्होंने कहा कि पूरे देश में अकेली वही भाजपा के खिलाफ आवाज उठा रही हैं, इसलिए भाजपा उनकी आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है. राज्य सचिवालय में सोमवार को पहली बार पत्रकारों से बात करते हुए उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सोशल नेटवर्किंग साइटों के जरिए झूठी खबरें फैलाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है.  वह इसके जरिए राज्य में सांप्रदायिक तनाव फैलाना चाहती है.

कहा कि किसी राज्य में हिंसा या दंगे की स्थिति में राज्य सरकारों के साथ केंद्र की भी जिम्मेदारी होती है.  ऐसी स्थिति में केंद्र सरकार अपनी जिम्मेदारी से पल्ला नहीं झाड़ सकती.  ममता ने कहा, लोकसभा चुनाव में जीत के बाद भाजपा नेता बंगाल में अशांति फैलाने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन, इसमें उन्हें कामयाबी नहीं मिलेगी. उन्होंने कहा कि सरकार गिराने की साजिश के तहत ही केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से एडवाइजरी भेजी गयी थी लेकिन, विधानसभा चुनाव 2021 में ही होंगे.  उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि घायल बाघ मरे हुए बाघ से ज्यादा खतरनाक होता है.

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