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साहेबगंजः तीन दिन कैंप कर एनजीटी की उच्च स्तरीय टीम गयी वापस, पत्थर माफियाओं ने ली राहत की सांस

पूर्व की रिपोर्ट पर एनजीटी ने असंतुष्टि व्यक्त करते हुए विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का दिया है आदेश

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Sahebganj: जिले के ऐतिहासिक राजमहल पहाड़ के संरक्षण, संवर्धन व पर्यावरणीय क्षति के आकलन के लिए एनजीटी द्वारा गठित उच्च स्तरीय टीम गुरुवार से ही जिले में आयी हुई थी. शनिवार को देर शाम टीम वापस चली गयी.

तीन दिनों तक टीम के सभी पदाधिकारी व सदस्यों ने बरहरवा, पतना, कोटालपोखर, सकरीगली, महादेवगंज व मिर्जा चौकी के कई पत्थर खदानों व स्टोन क्रशरों का निरीक्षण किया.

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टीम जब तक जिले में रही लगभग सभी पत्थर खदान व स्टोन क्रशर बंद पाये गये. टीम के आगमन व भ्रमण से पत्थर माफ़ियाओं में साफ तौर पर दहशत व खौफ देखने को मिला.

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दूसरी ओर पर्यावरण प्रेमियों में टीम के आगमन से खुशी देखी गयी. टीम के निरीक्षण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था का पुख्ता इंतजाम था.

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जिले में टीम के रहने तक सभी पत्थर कारोबारियों ने अपने-अपने पत्थर खदानों व स्टोन क्रशरों को बंद रखने में ही भलाई समझी. टीम के रहने तक पत्थर खदानों व स्टोन क्रशरों में वीरानी छायी रही जबकि आम दिनों में यही पत्थर उद्योग गुलज़ार रहता था.

एनजीटी में दायर की गयी है याचिका

विदित हो कि जिले के सामाजिक कार्यकर्ता सह राजमहल विधान सभा क्षेत्र के पूर्व प्रत्याशी सैयद अरशद नसर ने ऐतिहासिक राजमहल पहाड़ को बचाने व पहाड़ पर रहनेवाली विलुप्त होती आदिम जनजाति पहाड़िया व पहाड़ की तलहटी में बसे संथाल आदिवासी व पहाड़ पर अवस्थित विलुप्त होते जीवाश्म, कीमती जड़ी-बूटी, हरे-भरे पेड़-पौधे, जीव-जंतु, प्राकृतिक झरनों व धरोहर के संरक्षण व संवर्धन के लिए एनजीटी में याचिका दायर की है.

मामले की सुनवाई लगातार चल रही है. सुनवाई के दौरान ही जिले के डीसी, एसपी व जिला खनन पदाधिकारी पर लापरवाही बरतने के चलते एनजीटी इनके विरुद्ध दो-दो लाख रुपये का जुर्माना व पचास-पचास हज़ार रुपये का जमानती वारंट भी निर्गत कर चुकी है.

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जिसका पालन इन अधिकारियों ने बीते दिनों एनजीटी कोलकाता जोन में सशरीर उपस्थित हो कर किया. नसर ने बताया कि जिले में वैध अवैध रूप से हजारों पत्थर खदान व स्टोन क्रशर जिले के भ्रष्ट पदाधिकारियों की मिली भगत से चल रहे हैं.

दूसरी ओर एनजीटी की टीम कोर्ट का हवाला देते हुए कुछ भी बताने से बचती रही. टीम तीन माह पूर्व भी जिले के पहाड़ों व स्टोन क्रशर का निरीक्षण कर अपनी गोपनीय रिपोर्ट एनजीटी को सौंप चुकी है.

14 अक्टूबर तक सौपी जानी है रिपोर्ट

जिसपर एनजीटी ने असंतुष्टि व्यक्त करते हुए विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का आदेश पारित किया है. उसी के आलोक में टीम ने पुनः तीन दिनों तक जिले में कैंप कर रिपोर्ट तैयार की. 14 अक्टूबर तक टीम को एनजीटी में रिपोर्ट सौंप देनी है.

टीम में रीता साह केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड नयी दिल्ली, वन पर्यावरण व जलवायु परिवर्तन मंत्रालय भुवनेश्वर के वरीय पदाधिकारी, सिया व झारखंड प्रदूषण बोर्ड के वरिय पदाधिकारी सहित जिला खनन पदाधिकारी विभूति कुमार भी शामिल थे.

इस मामले की सुनवाई अब 14 अक्टूबर को होनी है. जिस पर सभी की निगाहें टिकी हैं.

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