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#SC के अगले #CJI जस्टिस बोबडे ने कहा, देश में कुछ लोगों को बोलने की पूरी आजादी, कुछ हो जाते हैं हमलों के शिकार

ऐसा दौर कभी नहीं रहा, जब कुछ लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी का कोई दायरा तय रहा हो. कहा कि दूसरी तरफ कुछ लोगों को

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NewDelhi : देश के होने वाले  CJI  जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने अभिव्यक्ति की आजादी को लेकर कहा कि इसके दो पक्ष हैं.  कहा कि कुछ ऐसे लोग हैं, जो सार्वजनिक तौर पर और सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म्स पर कुछ भी कहकर बच निकलते हैं. इसके अलावा कुछ लोग ऐसे हैं, जिन्हें अपनी अभिव्यक्ति के चलते हमलों का शिकार होना पड़ता है.

जस्टिस  शरद बोबडे ने मंगलवार को यह बात कही. जान लें कि  नागपुर में जन्मे जस्टिस शरद अरविंद बोबडे देश के 47वें मुख्य न्यायाधीश के तौर पर 18 नवंबर को शपथ लेंगे. उनका कार्यकाल 23 अप्रैल, 2021 तक होगा.

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ऐसा दौर कभी नहीं रहा, जब  अभिव्यक्ति की आजादी का दायरा तय रहा हो

जस्टिस शरद अरविंद बोबडे ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, यह विवाद स्पष्ट है कि कुछ लोगों को अभिव्यक्ति की काफी आजादी है. ऐसा दौर कभी नहीं रहा, जब कुछ लोगों की अभिव्यक्ति की आजादी का कोई दायरा तय रहा हो. कहा कि दूसरी तरफ कुछ लोगों को बिना कहे ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है.

कहा कि संविधान के आर्टिकल 19 में नागरिकों को यह मूल अधिकार दिया गया है, जिसका पालन कराने में सुप्रीम कोर्ट ने आपातकाल के बाद से अब तक चार दशकों में अहम भूमिका अदा की है.

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उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों की संख्या बढ़े 

इस क्रम में महिला जजों की संख्या कम  होने के सवाल पर जस्टिस बोबडे ने कहा, मैं इस उद्देश्य से प्रयास करूंगा और बिना किसी पक्षपात के कोशिश करूंगा कि उच्च न्यायालयों और सुप्रीम कोर्ट में महिला जजों का चयन बढ़े. हालांकि समस्या उनकी उपलब्धता की भी है.  उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला जजों की संख्या कम होने की वजह किसी तरह का पूर्वाग्रह नहीं है. उन्होंने कहा कि इसकी बड़ी वजह उनकी कम उपलब्धता रही है. इसके अलावा भी कुछ कारण हो सकते हैं.

हाई कोर्ट में जज के रूप में महिलाओं की आयु

45 वर्ष होनी चाहिए 

हाई कोर्ट में जज के तौर पर उनकी 45 वर्ष आयु होनी चाहिए. इसलिए हम रातोंरात संवैधानिक अदालतों में महिला जजों की संख्या नहीं बढ़ा सकते. कहा कि यह सिस्टम के साथ ही होगा. मौजूदा चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की ओर से हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस और अन्य जजों की रिटायरमेंट उम्र को 65 वर्ष तक करने के प्रस्ताव का उन्होंने समर्थन किया.

वर्तमान में  यह उम्र सीमा 62 वर्ष की है. उन्होंने कहा, इससे सुप्रीम कोर्ट का जज बनने के लिए प्रतिस्पर्धा में कमी आयेगी. इसके अलावा 62 वर्ष की उम्र में कोई जज रिटायर होता तो यह एक तरह से उसके अनुभव का लाभ न लेने जैसा है.

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