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सांसद बने छह महीने बीत गये, लेकिन अब तक माननीयों ने आदर्श ग्राम योजना के लिये गांवों का नहीं किया चयन

2019 से 2024 तक हर साल एक-एक पंचायत को लेना है गोद, ग्रामीण विकास विभाग से मिली जानकारी अजुर्न मुंडा और निशिकांत दूबे की चल रही प्रक्रिया. अन्य सांसदों की जानकारी विभाग को नहीं.

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Chhaya

Ranchi: लोकसभा चुनाव हुए छह महीने बीत गये हैं. सांसदों ने अपना कामकाज भी शुरू कर दिया. लेकिन अभी तक किसी भी सांसद की ओर से आदर्श ग्राम योजना के तहत गांव गोद लिये जाने की घोषणा नहीं की गयी.

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सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत सांसदों को अपने क्षेत्र के एक पंचायत गोद लेकर गांवों का विकास करना है. झारखंड में 14 लोकसभा सीट है. लेकिन सांसद बनकर छह महीने बीत जाने के बाद भी अपने-अपने क्षेत्र के आदर्श ग्राम के लिये गांवों का चयन तक भी नहीं किया है.

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केंद्र सरकार की ओर से साल 2014 में सांसद आदर्श ग्राम योजना शुरू की गयी. सांसदों ने पंचायत गोद लिया और विकास कराया. हालांकि झारखंड में योजना तहत गोद लिये पंचायतों और गांवों में विकास कुछ एक जगहों पर ही देखने को मिली.

लेकिन इस बार चुनाव में जीतें सांसदों ने अब तक गांवों का चयन तक नहीं किया है. कुछ एक सांसद है, जो गांवों का चयन कर रहे हैं. लेकिन इस पर सहमति नहीं बनी है.

अजुर्न मुंडा और निशिकांत दूबे की प्रक्रिया चल रही

ग्रामीण विकास विभाग के अनुसार, खुंटी सांसद अजुर्न मुंडा और गोड्डा से निशिकांत दूबे द्वारा गांव गोद लेने की प्रक्रिया चल रही है. हालांकि विभाग ने सांसदों के गोद लिये गांव की जानकारी नहीं दी. बताया गया कि प्रक्रिया चल रही है. जब तक जिला उपायुक्त से इस संबध में पत्र नहीं आता, तब तक गांव के लिये कुछ नहीं कहा जा सकता.

विभाग की ओर से अन्य किसी भी सांसद के गांव गोद लेने की जानकारी नहीं दी गयी. वहीं रांची सांसद संजय सेठ से इस संबंध में बात की गयी. जिससे जानकारी मिली की हटिया विधानसभा क्षेत्र के कुछ गांवों को योजना के लिये चयनित किया गया है. लेकिन नाम पर सहमति नहीं बनी है. प्रक्रिया चल रही है. अन्य सांसदों से भी बात करने की कोशिश की गयी लेकिन संपर्क नहीं हो पाया.

2019 से 2024 तक हर साल एक-एक पंचायत को लेना है गोद

साल 2019 से केंद्र की ओर से सांसद आदर्श ग्राम योजना में बदलाव किया गया है. 2019 से 2024 तक प्रत्येक सांसद को अपने-अपने क्षेत्र में एक-एक पंचायत को प्रत्येक साल गोद लेना है. हालांकि विकास कार्य, ग्रामीण विकास विभाग की ओर से संचालित योजनाओं के तहत किया जाता है.

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सांसद चाहे तो अपने मद से भी गांवों का विकास कर सकते है. अब तक सिर्फ परिमल नाथवाणी ही ऐसे सांसद हुए हैं जिन्होंने अपने मद से गांव का विकास कराया. जिलों में डीसी इस योजना के नोडल पदाधिकारी होते है.

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अब तक सांसदों की ओर से गोद लिये गांव और उनका हाल

खूंटी के पूर्व सांसद कड़िया मुंडा ने तिलमा गांव को गोद लिया. जो खूंटी सांसद के क्षेत्र में स्थित. न्यूज विंग ने इसकी ग्राउंड रिपोर्टिंग भी की थी. जिसमें पूर्व सांसद कड़िया मुंडा के सारे दांवे खोखले साबित हुए थे. क्षेत्र की बदहाली पांच सालों बाद इस कदर है कि तीन- तीन टोलों में जलमीनार होने के बाद भी घर-घर तक पानी सप्लाई नहीं होती.

अप्रैल 2016 में आयोजित कार्यक्रम में पूर्व सांसद मुंडा ने पूरे तिलमा पंचायत को गोद लेने की बात की थी.
वहीं रांची के पूर्व सांसद रामटहल चौधरी ने हाहाप गांव को गोद लिया था. 2019 के चुनाव के पहले तक गांव की स्थिति यह थी कि यहां झोपड़ीनुमा स्वास्थ्य उपकेंद्र है. वो भी किराये के मकान में. क्षेत्र में नया स्वास्थ्य उपकेंद्र भी बनाया गया है लेकिन यह चालू नहीं हुआ था.

धनबाद सांसद पशुपति नाथ सिंह ने भी पांच साल पहले गोविंदपुर प्रखंड के रतनपुर पंचायत को गोद लिया था. क्षेत्र में पानी की समस्या दूर करने के लिये पानी टंकी तो बनायी गयी लेकिन सप्लाई के लिये पाइप लाइन नहीं बिछायी गयी. जमीन विवाद के कारण यह काम पूरा नहीं हो पाया. पांच साल बाद भी ग्रामीण जर्जर सड़कों पर ही चलते हैं.

क्या है सांसद आदर्श ग्राम योजना

योजना की शुरूआत 2014 में हुई. सबसे पहले प्रधानमंत्री ने 11 अक्टूबर 2014 को वाराणसी के जयनगर गांव को गोद लिया. योजना अनुसार पहचानी गईं ग्राम पंचायतों के समग्र विकास के लिए नेतृत्व की प्रक्रियाओं को गति प्रदान करना. ग्रामीणों के जीवन को गुणवत्तापूर्ण बनाना, बुनियादी सुविधाएं देना, आजीविका के बेहतर अवसर, असमानताओं को कम करना आदि है.

साल 2014 में सांसदों को एक ही पंचायत गोद लेना था. पांच साल के कार्यकाल में इन पंचायतों का विकास करना था. लेकिन 2019 में योजना में बदलाव किया गया. अब साल 2019 से 2024 तक के लिये सांसदों काे प्रत्येक साल एक-एक पचांयत गोद लेना है.

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