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जेपीएससी पर अब तक 33 करोड़ खर्च, फिर भी परिणाम गड़बड़झाला

गुजर गये 1095 दिन फिर छठी जेपीएससी परीक्षा प्रक्रिया अधर में

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नवंबर में जेपीएसी अध्यक्ष का भी कार्यकाल हो जायेगा पूरा, नहीं करा पाये परीक्षा की प्रक्रिया पूरी

Ranchi : आरोपों और विवादों से झारखंड लोक सेवा आयोग का गहरा नाता रहा है. जेपीएससी पर 33 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं. लेकिन एक भी रिजल्ट पाक-साफ नहीं निकला. 1095 दिन गुजर जाने के बाद भी छठी जेपीएससी परीक्षा की प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाई है. आयोग के अध्यक्ष के विद्यासागर का कार्यकाल भी नवंबर में समाप्त हो जायेगा. फिर नये अध्यक्ष की तलाश शुरू हो जायेगी. पांचवी जेपीएससी की परीक्षा प्रक्रिया पूरी होने में लगभग डेढ़ साल का समय लगा था. 18 साल में जेपीएससी सिर्फ पांच परीक्षा ही ले पाया है.

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17 अगस्त 2015 को जारी हुआ था छठी जेपीएससी का विज्ञापन

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जेपीएससी ने 17 अगस्त 2015 को छठी संयुक्त असैनिक सेवा प्रतियोगिता (प्रारंभिक) परीक्षा का विज्ञापन जारी किया था. फिर इसे वापस लेकर 30 अक्तूबर 2015 को फिर से 326 पदों के लिये विज्ञापन जारी किया. 18 दिसंबर 2016 को पीटी परीक्षा हुयी। 23 फरवरी 2017 को पीटी का रिजल्ट जारी किया गया. इसमें कुल 5,138 अभ्यर्थी सफल रहे. फिर 11 अगस्त 2017 को पीटी का संशोधित रिजल्ट निकला. इसमें 965 और अभ्यर्थियों को जोड़ा गया. इस हिसाब से कुल 6,103 अभ्यर्थी सफल रहे. फिर तीसरी बार छह अगस्त 2018 को संशोधित रिजल्ट जारी किया गया. इसमें 34,634 अभ्यर्थी सफल रहे.

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जेपीएससी का विवादों से रहा है गहरा नाता

जेपीएससी देश का पहला ऐसा आयोग है जिसके अध्यक्ष पद पर रहते ही कार्रवाई हुई. पहली सिविल सेवा, द्वितीय सिविल सेवा, व्याख्यता, बाजार पर्यवेक्षक, सहकारिता और जेट परीक्षा विवादों के घेरे में रही. काफी हंगामा के बाद निगरानी जांच का आदेश दिया गया. द्वितीय सिविल सेवा से चयनित 166 अफसरों को कार्यमुक्त भी किया गया. प्रथम सीमित प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करनी पड़ी. जेट परीक्षा का रिकॉर्ड भी गायब किया गया. इन सभी परीक्षाओं में अपने लोगों को लाभ पहुंचाने का आरोप है.

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