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#JharkhandElection : संथाल की 4 सीटों पर सोरेन परिवार लड़ सकता है चुनाव, दुमका से बसंत भी होंगे चुनावी दंगल में

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Pravin kumar

Ranchi : संथाल का एक दौर वह भी था जब दिशोम गुरू शिबू सोरेन के एक आह्वान पर गांव-गांव से लोग डुगडुगी-टामाक बजाते हुए हजारों की तादाद में हाथों में तीर-धनुष जमा हो जाते थे.

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गुरुजी को सुनने-देखने के लिए लोग पैदल कई किलोमीटर चल कर आते थे. गुरुजी के बुलावे पर उन्हें सुनने वैसे लोग भी आते थे जिनका पार्टी से कोई संबंध नहीं रहता था.

राजनीतिक जीवन में शिबू सोरेन को अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ा. कई बार पार्टी में टूट भी हुई लेकिन हर बार वे विजेता के रूप में उभरे.

लेकिन आज परिस्थिति बदल चुकी है. लोकसभा चुनाव में दुमका सीट से गुरुजी की हार और 2014 में पार्टी के कार्यकारी अध्यक्ष हेंमत सोरेन की हार के बाद संथाल परगना में झामुमो का गढ़ खिसकता जा रहा है.

इन स्थिति में सोरेन परिवार झामुमो के गढ़ संथाल को बचाने के लिए चुनाव मैदान में होगा. पार्टी उम्मीदवार के रूप में हेमंत सोरेन, सीता सोरेन के बाद अब बंसत सोरेन भी चुनावी दंगल में कूदेंगे.

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दुमका सीट पर बंसत सोरेन के चुनाव लड़ने की संभावना

शिबू सोरेन के छोटे पुत्र बसंत सोरेन के दुमका विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की संभावना है. बंसत पार्टी के युवा मोर्चा के केन्द्रीय अध्यक्ष के पद पर हैं.

दुमका सीट से 2014 में हेमंत सोरेन चुनाव लड़े थे. भाजपा की डॉ लुईस मरांडी से हेमंत को शिकस्त मिली.

सूत्रों के मुताबिक बसंत सोरेन ने दुमका से अपनी चुनावी तैयारी भी शुरू कर दी है. बंसत सोरेन आजकल दुमका में अधिक देखे जा रहे हैं.

बसंत ने अपनी इच्छा परिवार के सदस्यों के साथ-साथ अपने बड़े भाई हेमंत सोरेन को भी बता दी है. ऐसे में संभावना बन रही है कि सोरेन परिवार का सदस्य ही दुमका सीट से चुनाव लड़ेगा.

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पिछले पांच चुनावों में दुमका सीट से कौन बने विधायक

1995 के चुनाव में प्रो. स्टीफन मराण्डी झामुमो उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गये

2000 के चुनाव में प्रो. स्टीफन मराण्डी झामुमो उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गये

2005 के चुनाव में प्रो. स्टीफन मराण्डी निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गये

2009 के चुनाव में हेमंत सोरेन झामुमो उम्मीदवार के रूप में विधायक चुने गये

2014 के चुनाव में डॉ लुईस मरांडी भाजपा उम्मीदवार के रूप हेमंत सोरेन को चुनाव में शिकस्त दे कर जीतीं.

जामा विधानसभा सीट

सोरेन परिवार के संथाल परगना के गढ़ को बचाने के लिए परिवार की बहू जामा विधानसभा सीट पर चुनावी दंगल में होंगी.

जामा विधानसभा सीट से शिबू सोरेन के बड़े पुत्र स्वर्गीय दुर्गा सोरेन की पत्नी वर्तमान विधायक सीता सोरेन चुनाव लड़ेंगी.

इस सीट से 1995 और 2000 में  झारखंड मुक्ति मोर्चा उम्मीदवार के रूप में दुर्गा सोरेन चुनाव जीते जबकि 2009 और 2014 में सीता सोरेन चुनाव लड़ीं और जीतीं.

जामा विधानसभा सीट से 1980 के बाद से हुए चुनावों में 2005 को छोड़ हर बार झामुमो जीता है.

कब कौन किस दल से बने विधायक

1967 : एम. हसदा, निर्दलीय

1969 : मदन बेसरा, कांग्रेस

1972 : मदन बेसरा, कांग्रेस

1977 : मदन बेसरा, कांग्रेस

1980 : दीवान सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा

1985 : शिबू सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा

1990 : मोहरिल मुर्मू, झारखंड मुक्ति मोर्चा

1995 : दुर्गा सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा

2000 : दुर्गा सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा

2005 : सुनील सोरेन, भारतीय जनता पार्टी

2009 : सीता सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा

2014 : सीता सोरेन, झारखंड मुक्ति मोर्चा

बरहेट के साथ-साथ शिकारीपड़ा से लड़ सकते हैं हेमंत

झारखंड मुक्ति मोर्चा के कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन के संथाल की दो सीटों पर चुनाव लड़ने की संभावना है जिसमें बरहेट विधानसभा के साथ-साथ शिकारीपाड़ा सीट हो सकती है.

शिकारीपाड़ा विधानसभा सीट पर झारखंड मुक्ति मोर्चा का ही कब्जा है. इस सीट से पार्टी के वरीय नेता नलिन सोरेन विधायक हैं. नलिन सोरेन 1990, 1995, 2000, 2005, 2009, 2014 में झामुमो उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतते रहे हैं.

बरहेट विधानसभा में भाजपा का वोट शेयर है खतरे का संकेत

2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को उन विधानसभा क्षेत्रों में मिली बढ़त जो झामुमो के इलाके माने जाते हैं, अन्य इलाकों की रणनीति का आधार बने हुए हैं.

भाजपा ने दुमका और बरहेट को खास तौर पर निशाने पर लिया है. राजमहल लोकसभा क्षेत्र से झामुमो ने प्रभावी जीत दर्ज की है. लेकिन जिस तरह भाजपा ने अपना वोट शेयर बढ़ाया है, वह झामुमो के लिए खतरे का संकेत है.

2019 के लोकसभा चुनाव में दुमका विधानसभा में भाजपा को 78,623 वोट मिले, वहीं झामुमो को मात्र 57,271 वोट मिले.

वहीं, बरहेट विधानसभा जहां से हेमंत विधायक हैं, वहां भाजपा को 49,299 और झामुमो को 62,921 वोट मिले.

बरहेट से झामुमो को बढ़त मिली, लेकिन 2014 में विधानसभा में मिली बढ़त से करीब सात हजार कम रही. वहीं भाजपा ने बढ़त का अंतर कम किया.

इन चुनौतियों के बीच सोरेन परिवार संथाल के 18 विधानसभा सीटों में से चार सीटों पर परिवार के सदस्य के खड़े होने की प्रबल संभावना है.

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