न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

बिना सोचे-समझे दिये गये कर्ज से बिगड़े देश के आर्थिक हालात : नीति आयोग

547

New Delhi :  नीति आयोग के उपाध्यक्ष राजीव कुमार ने वित्तीय क्षेत्र में दबाव को अप्रत्याशित बताया है. उनका मानना है कि किसी ने भी पिछले 70 साल में ऐसी स्थिति का सामना नहीं किया जब पूरी वित्तीय प्रणाली में जोखिम है.

एक कार्यक्रम में राजीव कुमार ने कहा कि कोई भी किसी पर भी भरोसा नहीं कर रहा है. निजी क्षेत्र के भीतर कोई भी कर्ज देने को तैयार नहीं है, हर कोई नकदी लेकर बैठा है. ऐसे में सरकार को लीक से हटकर कुछ कदम उठाने की जरूरत है.

जिससे निजी क्षेत्र की कंपनियों की आशंकाओं को दूर किया जा सके. और वे निवेश के लिये प्रोत्साहित हों. आर्थिक नरमी को लेकर चिंता के बीच उन्होंने यह बात कही. उन्होंने वित्तीय क्षेत्र में बने अप्रत्याशित दबाव से निपटने के लिए लीक से हटकर कदम उठाने पर भी जोर दिया.

Trade Friends

इसे भी पढ़ें – तुपुदाना इंडस्ट्रीयल एरिया : बचे 100 कारखाने भी बंदी की कगार पर, सिर्फ पांच फीसदी ही हो रहा काम

निजी कंपनियों की आशंकाओं को दूर करना सबसे जरूरी

उन्होंने यह भी कहा कि निजी निवेश तेजी से बढ़ने से भारत को मध्यम आय के दायरे से बाहर निकलने में मदद मिलेगी. साथ ही कहा कि सरकार को ऐसे कदम उठाने की जरूरत है, जिससे निजी क्षेत्र की कंपनियों की आशंकाओं को दूर किया जा सके और वे निवेश के लिये प्रोत्साहित हों.

इस बारे में विस्तार से बताते हुए कुमार ने कहा कि वित्तीय क्षेत्र में दबाव से निपटने और आर्थिक वृद्धि को गति के लिये केंद्रीय बजट में कुछ कदमों की घोषणा पहले ही की जा चुकी है. वित्त वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत रही, जो 5 साल का न्यूनतम स्तर है.

ये 2009-14 में बिना सोचे-समझे कर्ज देने का नतीजा

वित्तीय क्षेत्र में दबाव से अर्थव्यवस्था में नरमी के बारे में बताते हुए नीति आयोग के उपाध्यक्ष ने कहा कि पूरी स्थिति 2009-14 के दौरान बिना सोचे-समझे दिये गये कर्ज का नतीजा है. इससे 2014 के बाद गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) बढ़ी है.

उन्होंने कहा कि फंसे कर्ज में वृद्धि से बैंकों की नया कर्ज देने की क्षमता कम हुई है. इस कमी की भरपाई गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) ने की. इनके कर्ज में 25 प्रतिशत की वृद्धि हुई.

एनबीएफसी कर्ज में इतनी वृद्धि का प्रबंधन नहीं कर सकती और इससे कुछ बड़ी इकाइयों में भुगतान असफलता की स्थिति उत्पन्न हुई. अंतत: इससे अर्थव्यवस्था में नरमी आयी.

इसे भी पढ़ें –NEWS WING IMPACT : पुराना कुआं दिखा बिचौलिये ने निकाल ली थी मनरेगा की राशि, FIR का आदेश

इस परिस्थिती का उत्तर आसान नहीं

कुमार ने कहा कि नोटबंदी और माल एवं सेवा कर तथा ऋण शोधन अक्षमता और दिवाला संहिता के कारण खेल की पूरी प्रकृति बदल गयी. पहले 35 प्रतिशत नकदी घूम रही थी, यह अब बहुत कम हो गयी है. इन सब कारणों से एक जटिल स्थिति बन गयी है. इसका कोई आसान उत्तर नहीं है.

सरकार और उसके विभागों द्वारा विभिन्न सेवाओं के लिए भुगतान में देरी के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह भी सुस्ती की एक वजह हो सकती है. प्रशासन प्रक्रिया को तेज करने के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है.

SGJ Jewellers

इसे भी पढ़ें – आर्थिक मंदी की चपेट में गिरिडीह का लौह उद्योग भी, 50 प्रतिशत तक घट गया उत्पादन

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

kohinoor_add

Get real time updates directly on you device, subscribe now.

You might also like