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राज्य सरकार ने केंद्र को सौंपी रिपोर्ट, कहा- एक भी मौत नहीं हुई भूख से

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Ranchi : झारखंड में भूख से मौत के मामले को राज्य के ग्रामीण विकास विभाग ने नकार दिया है. मनरेगा निदेशक, ग्रामीण विकास मंत्रालय, भारत सरकार को भेजी गयी रिपोर्ट में कथित भूख से मौत के मामले को सीधे तौर पर खारिज किया गया है. राज्य में वर्ष 2017-18 में लगभग 18 मौतें कथित रूप से भूख से हुई हैं. ग्रामीण विकास विभाग की ओर से भेजी गयी रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में एक भी मौत भूख से नहीं हुई है. क्षेत्रीय कार्यालयों और मनरेगा से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर विभाग ने मंत्रालय को यह रिपोर्ट भेजी है. हालांकि रिपोर्ट से पूर्व यह माना जा रहा था कि राज्य में 18 मौतें भूख से हुई हैं. इन मामलों पर यह है रिपोर्ट :

  • गढ़वा, कोरटा गांव निवासी प्रेमन कुंवर की मृत्यु 12.17 को हुई थी. उपायुक्त की ओर से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर विभागीय रिपोर्ट में बताया गया है कि 4.12.17 को मृतक का पोस्टमॉर्टम किया गया, जिसमें मृतक के अमाशय में 300 मिली भोजन मिला था. वहीं, परिवार के पास राशन कार्ड भी था. इस आधार पर मौत को भूख से संबंधित नहीं बताया गया है.
  • फरठिया गांव, गढ़वा के 40 वर्षीय सुरेश उरांव की मृत्यु 10.17 को हुई थी. उपायुक्त की ओर से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि मृतक टीबी रोगी था. राशन कार्ड भी पीड़ित परिवार के पास था, जिससे अक्टूबर 2017 तक राशन का उठाव किया गया. इस आधार पर बताया गया कि यह मृत्यु भूख की वजह से नहीं हुई.
  • 80 वर्षीय एतवरिया देवी सोनपुरवा गांव, गढ़वा की रहनेवाली थी, जिसकी मृत्यु 12.17 को हुई. उपायुक्त की ओर से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर विभागीय रिपोर्ट में बताया गया है कि परिवार को राशन कार्ड निर्गत किया गया था, जिससे 5.10.17 तक राशन उठाव किया गया. मृतका के परिजनों से बातचीत के आधार पर मौत को भूख से संबंधित नहीं बताया गया है.
  • देवघर स्थित भगवानपुर गांव के निवासी 75 वर्षीय रूपलाल मरांडी की मौत 10.17 को हुई. उपायुक्त की ओर से निर्गत रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि मृतक के कुलहे की हड्डी टूट गयी थी, जिससे वह लगातार बीमार रह रहा था. ऐसे में मौत को वृद्धावस्था से संबंधित बताया गया है.
  • 43 वर्षीय वैद्यनाथ दास नीचेघौरा, धनबाद के निवासी थे. 10.17 को उनकी मृत्यु हुई. खाद्य एवं उपभोक्ता मामले निदेशालय की रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि मृतक के दोनों बड़े भाइयों के पास राशन कार्ड था. पत्नी दूसरों के घरों में काम करती थी. इस आधार पर मौत भूख से नहीं हुई.
  • धोवाडांगाल, पाकुड़ में रहनेवाली 45 वर्षीय लुखी मुर्मू की मौत 1.18 को हुई थी. उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर विभागीय रिपोर्ट में बताया गया है कि लुखी मुर्मू कालाजार से पीड़ित थी. तीन-चार माह से बीमार थी. मृतक की बहन फुलीन मुर्मू ने जानकारी दी थी कि मृत्यु के दिन दाल-भात बनाकर खाया गया था. इस आधार पर कहा गया है कि मौत भूख से नहीं हुई.
  • बाड़ाटांड़, गिरिडीह निवासी बुधीन सोरेन की मौत 1.18 को हुई थी. रिपोर्ट में मृतक को चार-पांच साल से दम्मा से पीड़ित बताया गया है. मृत्यु के तीन दिन पहले उसकी तबीयत खराब हुई थी. परिवार के पास राशन कार्ड था. इस आधार पर कहा गया है कि भूख से मौत नहीं हुई थी.
  • सावित्री देवी की मौत 6.18 को हुई थी. खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के संयुक्त सचिव की अध्यक्षता में जांच दल का गठन किया गया था. जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि मृतक को मस्तिष्क संबंधी बीमारी थी. इनकी पुत्र वधुओं की जांच रेफरल अस्पताल में करायी गयी, जहां दोनों स्वास्थ्य मिले. इस आधार पर कहा गया कि भूख से मौत नहीं हुई थी.
  • सुदामा पांडेय की 70 वर्ष की उम्र में 5.18 को मौत हुई. उपायुक्त कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि मौत अधिक उम्र, कमजोरी और दिमागी बीमारी के कारण हुई है. इनके तीनों भाइयों का राशन कार्ड है. ऐसे मे मौत भूख से नहीं हुई.
  • 11 वर्षीय संतोषी कुमारी की मौत 10.17 को हुई थी. रिपोर्ट में उसे पहले से बीमार बताया गया है. चिकित्सक नारायण सिंह ने उसे मलेरिया का इंजेक्शन लगाया था. परिवार के पास राशन कार्ड होने की बात भी कही गयी है.
  • मीना मुसहर की मृत्यु 6.18 को हुई, जिसकी उम्र 50 वर्ष थी. रिपोर्ट में बताया गया है कि मृतक को टीबी था. घुमक्कड़ जीवनयापन करने के कारण इनका राशन कार्ड निर्गत नहीं हो सका. ऐसे में मौत को भूख से नहीं बताया गया है.
  • मांडू, रामगढ़ में 45 वर्षीय चिंतामन मल्हार की मृत्यु 14.6.18 को हुई थी. छप्पर से लू लगने के कारण चिंतामन की मौत हुई है. घुमक्कड़ जिंदगी जीने के कारण परिवार के पास राशन कार्ड उपलब्ध नहीं है. इस आधार पर मौत भूख से नहीं हुई.
  • 39 वर्षीय राजेंद्र बिरहोर की मृत्यु 6.18 को हुई. रिपोर्ट में मृतक को जॉन्डिस से पीड़ित बताया गया है. परिवार के पास तीन एकड़ जमीन होने की बात की गयी है. इस आधार पर मौत भूख से नहीं हुई.
  • कमारडीह, जामताड़ा निवासी, 58 वर्षीय मांगा बाउरी की मौत 8.18 को हुई. मौत का कारण पारिवारिक कलह बताया गया है. वहीं, मृतक को मानसिक रोगी बताया गया. परिवार के पास अंत्योदय कार्ड था. इस आधार पर मौत भूख से नहीं हुई.
  • 55 वर्षीय मोती महतो की मौत 11.18 को देवघर में हुई. परिवार के पास राशन कार्ड था. सत्तू पीने से मोती महतो की तबीयत खराब हुई, जिससे उनकी मौत हुई. उपायुक्त कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर परिवार के पास राशन कार्ड था. इस आधार पर मौत भूख से नहीं हुई.
  • लुंगट, गुमला निवासी 80 वर्षीय सीता देवी की मृत्यु 10.18 को हुई. उपायुक्त कार्यालय से प्राप्त रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि मौत अधिक उम्र, कमजोरी के कारण हुई. मृतक के पास राशन कार्ड था, लेकिन कोई परिजन नहीं होने के कारण ग्रामीण उसका ध्यान रखते थे. इस आधार पर मौत भूख से नहीं हुई.
  • महुआटांड़, दुमका निवासी 45 वर्षीय कालेश्वर सोरेन की मौत 11.18 में हुई. दुमका उपायुक्त की रिपोर्ट के आधार पर बताया गया है कि छप्पर से गिरने से कालेश्वर सोरेन दो साल से बीमार था. परिवार के पास 3.44 एकड़ जमीन थी, जिसमें खेती होती थी. इस आधार पर मौत भूख से नहीं हुई.
  • 12.18 को 86 वर्षीय बिरेन दिग्गी की मौत हुई, जो सोनुआ, पश्चिमी सिंहभूम निवासी थे. रिपोर्ट में बताया गया है कि ग्रामीण, मुखिया, पंचायत समिति ने कहा है कि मौत अधिक उम्र के कारण हुई है, भूख से नहीं.

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