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#JPSC की कार्यशैली पर लगातार प्रतिक्रिया दे रहे हैं छात्र, पढ़ें-क्या कहा छात्रों ने…. (छात्रों की प्रतिक्रिया का अपडेट हर घंटे)

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Ranchi: जेपीएससी ने 6th JPSC के लिए इंटरव्यू की तारीख तय कर दी है. 20 नवंबर 2019 से इंटरव्यू होना है. जबकि अभी इस मामले की सुनवाई हाई कोर्ट में चल ही रही है. हाई कोर्ट का फैसला आने से पहले इंटरव्यू की तारीख तय करने के कारण जेपीएससी पर सवाल उठ रहें हैं.

कुछ लोग इसे सरकार को राजनीतिक फायदा उठाने के लिये उठाया गया फैसला बता रहे हैं. छात्रों में गुस्सा है. गुस्से की एक वजह यह भी है कि वर्तमान सरकार के कार्यकाल में जेपीएससी ने अब तक एक भी परीक्षा नहीं ली. किसी की भी नियुक्ति नहीं की.

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न्यूज विंग ने छात्रों से इस पर प्रतिक्रिया मांगी थी. छात्र लगातार प्रतिक्रिया दे रहें हैं. छात्रों की प्रतिक्रिया को हम यह यहां हू-ब-हू प्रकाशित कर रहें हैं.

राजू कुमार

ये सब इसलिए हो रहा कि अभी नवंबर में विधानसभा का चुनाव होने वाला है. यदि ऐसा नहीं करता है तो बीजेपी और झारखंड के सीएम जनता के बीच क्या मुंह लेकर जाएंगे.

 

राजेश्वर कुमार शाह

झारखंड सरकार की खराब पॉलिसी के कारण झारखंड के युवा दूसरे स्टेट में मारे फिर रहे हैं. लेकिन झारखंड सरकार दूसरे स्टेट के युवाओं को 100 फीसदी सर्विस देने के लिए तैयार हैं. खेद है झारखंड सरकार से.

 

रमेश कुमार महतो

जेपीएससी भ्रष्ट नेताओं और भ्रष्ट नौकरशाही का केंद्र बन गया है. इन लोगों को तैयारी कर रहे छात्रों और देश के फ्यूचर से कोई मतलब नहीं है. अब तक जेपीएससी का परफॉर्मेंस स्टेट के साथ पूरे देश में भी खराब रहा है. अब जेपीएससी को भंग कर परीक्षा लेने की जिम्मेवारी यूपीएससी को दे देना चाहिए, ताकि लोगों के फ्यूचर के साथ-साथ देश के फ्यूचर को भी बताया जा सके. धन्यवाद जय हिंद, जय झारखंड.

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संजीत गाड़ी

नेचुरली इसमें खेल हुआ है नहीं तो प्रक्रिया को ताक में रखकर ये सब नहीं हुआ होता. ये तो हाई कोर्ट का भी बात नहीं मान रहा है.

DR NIKHIL CHANDRA  DAS 

यह छात्र हित में कभी नहीं हो सकता. जेपीएससी ऐसा कदम क्यों उठा रही है. उसकी कोई मजबूरी होगी. जो झारखण्ड के सरल विद्यार्थी कभी समझ नहीं पायेंगे. – – जनगण शक्ति मंच, भारत .

 

अनु सुमन

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झारखंड के लिए ये बहुत दुर्भाग्य की बात है कि 19 साल में मात्र 6 जेपीएससी उसमें भी एक भी ऐसा नहीं जिसमें नियुक्ति निर्विवाद हुआ हो. लेकिन 6ठी जेपीएससी ने तो सारे जेपीएससी घोटालों और विवादों का रिकॉर्ड ही तोड़ दिया. जिस तरह वर्तमान सरकार थरथराई पर उत्तरआई है लगता है गिनीज बुक में भ्रष्टाचार का रिकॉर्ड दर्ज करा के ही रहेगी.

चयन प्रक्रिया के हर स्टेप में विवाद, हर प्रक्रिया में छात्र कोर्ट की शरण लेते हैं, लेकिन कुछ विशेष नहीं होता. पीटी में मनमाने तरीके से 104 गुणा अभ्यर्थियों को सफल घोषित कर दिया जाता है. जब मेंस परीक्षा होती है तब तो और भी बड़ा कीर्तिमान स्थापित होता है कि जैसे ही मेंस परीक्षा की तिथि घोषित होती है, विशाल छात्र समूह सरकार और जेपीएससी पर भ्रष्टाचार और भाई भतीजावाद और कई संगीन आरोप लगाकर परीक्षा रद्द कराने के लिये आंदोलन और कोर्ट का सहारा लेते हैं.

परीक्षा के पहले दिन आधी रात तक छात्र जेपीएससी के सामने आंदोलन करते हैं. और जिस दिन मेंस परीक्षा का पहला दिन उस दिन तो अजीब सा मजाक होता है कुछ छात्र जिस परीक्षा का केस हाइकोर्ट में चल रहा था एक ओर उसकी सुनवाई चल रही थी, कुछ जेपीएससी के सामने धरना दे रहे थे, कुछ छात्र विधानसभा के शीतकालीन सत्र में अपनी आवाज और पीड़ा पहुंचाने के लिए नेताओं से अनुनय विनय कर रहे थे. वहीं कुछ छात्र जो आधी रात तक जेपीएससी के सामने धरना प्रदर्शन कर रहे थे, सरकार की उदासीनता और तिरस्कार से निराश होकर परीक्षा भवन में परीक्षा दे रहे थे.

तब भी सरकार हाइकोर्ट के फैसले का इंतजार किए बिना मनमाने तरीके से मेंस परीक्षा ले लेती है. अब भी वही होने जा रहा है, परीक्षा का परिणाम अभी आई नहीं है, कोर्ट ने परिणाम घोषित करने पर रोक लगा दी है और बिना रिजल्ट आए साक्षात्कार की तिथि तय हो जाती है. सरकार संविधान और न्याय व्यवस्था की न सिर्फ अवहेलना कर रही है बल्कि खुल्लमखुल्ला मजाक उड़ा रही है. जिस परीक्षा का हर कदम विवादित और कोर्ट में लटका है, उस परीक्षा को, उस विज्ञापन को ही रद्द कर दिया. नया विज्ञापन निकाल कर एक साफ सुथरा निर्विवाद परीक्षा करानी चाहिए. क्योंकि जेपीएससी से लोगों का विश्वास उठ चुका है. सभी सिविल सर्विसेस की परीक्षा हो या व्याख्याता नियुक्ति सब पर विवाद है और केस चल रहा है, सीबीआई जांच चल रहा है.

 

हर्ष कुमार

जेपीएससी इस पृथ्वी का भगवान है. जेपीएससी को हाईकोर्ट के डिसीजन के बारे में सब कुछ मालूम है. इसलिए वो इंटरव्यू का डेट निकाल दिया. वैसे भी यहां सभी डिसीजन जेपीएससी के फेवर में ही होता है.

 

अजय कुमार

ये सारा किया कराया सरकार का है और आयोग इसको खुलकर सहयोग प्रदान कर रहा है. पांचवीं जेपीएससी में भी सरकार ने गलत रिजल्ट देकर उसे पचा लिया. स्टूडेंट्स कुछ कर नहीं पाये. रघुवर की सरकार तानाशाही और भ्रष्ट हो चुकी है. जिस तरह यूपीएससी आयोग में जमकर हल्ला बोला गया. उसी तरह एकबार जेपीएससी में बहुत बड़े स्तर पर हल्ला बोलना होगा. ये ** ** वाली सरकार और भ्रष्ट आयोग हमें नहीं चाहिए. लोगों को इकट्ठा करें और एक बहुत बड़ा आंदोलन खड़ा करें, जिसमें झारखंड के सभी जगह से सारे पढ़े लिखे स्टूडेंट्स को इकट्ठा होने का आग्रह किया जाए.

अब लड़ेंगे हक के लिए जरुरी हुआ तो लाठी भी खाएंगे और गोली भी खा लेंगे लेकिन अपने आने वाले जेनरेशन के लिए अच्छा शाषण अब देकर रहेंगे. आने वाली पीढ़ी गलती के खिलाफ आपलोग उलगुलान क्यों नहीं किये थे.

 

सुरज मालपहाड़िया

सरकारी दफ्तर में लगभग 2 लाख सीट खाली है सरकार चाहे तो जेपीएससी मेंस परीक्षा देने वाले सभी को जॉब दे सकें. पर सरकार ऐसा करेगी नहीं. और जहां रिजल्ट का पता नहीं वहां पीआई पर्सनल इंटरव्यू  की बात थोड़ा शक के दायरे में आता है. बस सरकार से यह निवेदन है कि छात्र के हित में बात करें.

 

Anup Singh – JPSC’s move to conduct interview, while case is under hearing in the High court, is unethical & unconstitutional.

 

Dhiraj Kumar –  Its completely a election agenda to divert the failure of last 5 years to conduct these pending vacancies. We have filled a Application for Assistant Engineer in 2015 and they have not done anything till 4 yours. Now suddenly they are ready to conduct for the examinations of all previous exams within 2 months only, that also during the months of Elections. Its our bad fate that we have taken birth in such state, where only 6 exams of PSCs have been done in 19 years of time. Even those exams were conducted with so many irregularities like 6th JPSC. Well lets see, as a aspiring student we have to believe in these issues and prepare for the same. All the very best to all the aspirants as well as the JPSC itself. Thank You.

 

Anil Kumar Mehta – Nice one

 

शैलेंद्र कुमार- इस लोकतांत्रिक देश में विभिन्न प्रकार के नियमों को जनतांत्रिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए लागू किये जाते हैं. लेकिन झारखंड में नियमों की धज्जियां उड़ायी जाती हैं. इसका जीता-जाता उदाहरण जेपीएससी है. 18 साल बाद भी जेपीएससी अपने कार्यों को सही ढ़ंग से निष्पादित नहीं कर पा रही है. छठा जेपीएससी मामला कोर्ट में लंबित रहने के बाद भी जेपीएससी राजनीतिक इशारे पर छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. जिस बहुमत वाली सरकार से छात्रों की जो उम्मीद थी, वो नाकामयाब रही है.

पुरुषोत्तम कुमार- सर, हमें न्याय दिला दो.

प्रवीण कुमार सिंह- बहुत ही बेहतर काम, आवाज उठाते रहिए. मेरा साथ आपके साथ.

Dhiraj Kumar – Its completely a election agenda to divert the failure of last 5 years to conduct these pending vacancies. We have filled a Application for Assistant Engineer in 2015 and they have not done anything till 4 yours. Now suddenly they are ready to conduct for the examinations of all previous exams within 2 months only, that also during the months of Elections. Its our bad fate that we have taken birth in such state, where only 6 exams of PSCs have been done in 19 years of time. Even those exams were conducted with so many irregularities like 6th JPSC. Well lets see, as a aspiring student we have to believe in these issues and prepare for the same. All the very best to all the aspirants as well as the JPSC itself. Thank You.

Anil Kumar Mehta – Nice one.

 

शंकर मुंडा –  लोकतांत्रिक शासन प्रणाली का एक मूलभूत लक्षण है कि नीतियां एवं नियम मनमर्जी से नहीं बनाया जायेगा. साथ ही संस्थाओं को अपने निजी हित में इस्तेमाल नहीं किया जायेगा. लेकिन झारखंड में देखा जाए तो पिछले 19 वर्षों में यहां के शासकों ने JPSC का सिर्फ़ और सिर्फ अपने निजी स्वार्थों के लिए उपयोग किया.

JPSC से लेकर विधानसभा सचिवालय तक की नियुक्तियों में किस कदर लूट मचायी गयी यह जगजाहिर है. और सबसे दुखद पहलू यह है कि इस लूट और भ्रष्टाचार के खिलाफ बहुत सारे जिम्मेदार लोगों ने एक शब्द नहीं बोला, और यही झारखंडियों की बर्बादी की एक प्रमुख वजह भी है. मैं NEWSWING को इस गम्भीर मसले को आवाज देने के लिए धन्यवाद देता हूँ.

 

अमरदीप रावत- रस्सी जलने को है लेकिन बल कम नहीं गया है. इस घपलेबाज सरकार और जेपीएससी का इस प्रकार से इंटरव्यू की संभावित तिथि की घोषणा करना जबकि कोर्ट ने मेन्स के रिजल्ट पर पहले ही रोक लगा रखी है, को इनकी छटपटाहट ही माना जाना चाहिए, जो इनके साम-दाम-दण्ड-भेद की नीति को उजागर करती है.

ये नीति कोर्ट के समक्ष कितना टिकती है यह आने वाले समय में ही पता चल पायेगा. अतः हमें अपने लक्ष्य से भटकना नहीं है एवं कोर्ट के समक्ष मजबूती से अपना पक्ष आगे भी रखना है, जब तक कि छात्र हित की जीत सुनिश्चित न हो जाए.

 

विकास कुमार – परीक्षा का कैलेंडर UPSC द्वारा भी जारी किया जाता है, लेकिन उसमें इंटरव्यू के डेट का उल्लेख नहीं रहता है. राज्य लोक सेवा आयोग एक स्वतंत्र व संवैधानिक आयोग है, लेकिन जेपीएससी की कार्यशैली को देखकर ऐसा नहीं कहा जा सकता. जेपीएससी भारत का ऐसा पहला लोक सेवा आयोग है जिसके परीक्षा के कट ऑफ मार्क्स का निर्धारण सरकार द्वारा कैबिनेट में किया जाता है.

 

पुरष्त्तम पांडे- इसमें पूरा का पूरा दाल काला लग रहा है. राजनीतिक पार्टियां और व्यूरोक्रेट जम कर मनमानी कर रहे हैं. इसकी सीबीआई जांच होनी चाहिए.

 

Rajesh Prasad – Something is fishy between jharkhand govt and judiciary. It seems that students will continue to suffer if judiciary allows jharkhand goverment to release mains result. Lots of local student have not appeared in the mains exam considering arbitrary behaviour of jharkhand government. They should cancel 6th jpsc and should come with fresh recruitment notice so that rules and regulations ate duly followed to ensure fair selection of candidate in the exam.

 

संदीप रे- ये लोग परीक्षा होने ही नहीं दे रहे हैं. ये जेएमएम के कारण हुआ है. जेएमएम की आरक्षण तुष्टिकरण की नीति का परिणाम है कि हर बार इसे राजनीतिक रंग दिया गया. सरकार ने अब विवश होकर सभी को प्रारंभिक परीक्षा पास कर दी तो नौटंकी कर रहा है.

 

इंदरजीत सिंह – सरकार लीपा पोती का काम कर रही. कुछ अपनों को फायदा दिलाने के लिए ये जल्दबाजी में लिया गया निर्णय है. सब पैसे का खेल है. छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा.

 

इलीयास हेम्ब्रम – Jpsc is a corrupt institution. It’s very pathetic that I am from such a state where justice is denied.

 

अरविंद –  इसमें कोई शक नहीं है कि न्यूज विंग आज की तारीख में सूबे के मीडिया जगत में एक सशक्त आवाज बनकर उभरा है. जिसने कई कल्याणकारी समस्याओं पर मुखरता से अपनी बात रखी है. अगर जेपीएससी की बात करें तो इस विभाग का विवादों से गहरा नाता रहा है. कुछ साल पहले मंत्रियों, विधायकों और अधिकारियों की गठजोड़ की मदद से सूबे के बीडीओ, सीओ, एसडीपीओ और रजिस्ट्रार जैसे पदों को रिश्तेदारों में रेवड़ियों की तरह बांटा गया था.

सारे एविडेन्स होने के बाद भी कुछ नहीं हुआ, तो इस बार भी वही होगा जो सूबे के तथाकथित रहनुमा चाहेंगे. इस मसले पर जब केंद्र और राज्य सरकारें एक दशक बाद भी कुछ नहीं कर पाई तो जेपीएससी की प्रमाणिकता कुछ है ही नहीं. वह तो एक प्राइवेट लिमिटेड कंपनी बनकर रह गई है. सरकार अगर चाहे तो जेपीएससी के इन कलंक कथाओं से मुक्ति दिला सकती है लेकिन ऐसा नहीं लगता. क्योंकि उसके दामन भी उसके ही कुछ विधायकों ने दागदार कर दिये हैं.

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ललन कुमार- इंटरव्यू का डेट एक संभावित डेट है, जेपीएससी के साथ साथ हम छात्रों को भी उम्मीद है कि अगली तिथि (16 सितम्बर) को कोर्ट से इस मामले का निष्पादन हो जायेगा. जेपीएसी के द्वारा संभावित डेट देने में कोई बुराई नहीं है, नए अध्यक्ष की कोशिश है की सभी पेंडिंग परीक्षा को निपटाया जाये, ये अच्छी कोशिश है. हालांकि जल्दबाजी में छठ पर्व (3 नवंबर) के दिन भी कुछ परीक्षा की तिथि निर्धारित की गई है, शायद इस पर किसी का ध्यान नहीं गया है अभी.

 

अजय दुबे- हमेशा से विवादों में रहने वाला लोक सेवा आयोग में एक और विवाद जुड़ गया. यह सब होना अब आश्चर्य नहीं होता. यह सरकार पांच साल में भी परीक्षा नहीं करा पायी. हमारे जैसे कितने लोगों का उम्र खत्म हो गया. अब तो जेपीएससी के बारे में बात करने का भी मन नहीं करता.

 

पॉवेल कुमार –  झारखंड में सबसे ज्यादा 15 साल लगभग NDA की सरकार की रही है. जेपीएससी प्रत्येक वर्ष होना चाहिए था. लेकिन आज तक जितने भी हुए सभी दागदार हैं. कोई भी नियुक्ति न्यायसंगत नहीं रही. हर नियुक्ति कोर्ट के आदेश से हो रही है. सरकार की नियत में खोट है. वर्तमान के पांच वर्ष में एक भी बार रिजल्ट जारी नहीं होना सरकार की नाकामी को दर्शाता है. एक ही अधिकारी को कई चार्ज दिए गए हैं पर परीक्षा और परिणाम नदारद है.

 

रघुनाथ सिंह –  अब तक जेपीएससी ने कुल चार बार परीक्षा का कैलेंडर जारी किया है, जो हर बार फेल हुआ है. परीक्षा का कैलेंडर पूरे वर्ष के लिए बनाया जाता है, जबकि जेपीएससी का कैलेंडर अंतिम तीन महीनों के लिए है. वास्तव में, कोर्ट को गुमराह करने तथा आने वाले चुनाव में अपना हित साधने के लिए सरकार के इशारे पर यह कैलेंडर जारी किया गया है.

 

ज्योति सिंह – जेपीएससी ने हाल ही में जो परीक्षा का कैलेंडर जारी किया है, वह छात्रों के साथ सिर्फ मजाक है. किसी भी परीक्षा के कैलेंडर में इंटरव्यू के डेट का उल्लेख नहीं रहता बल्कि इंटरव्यू का डेट मुख्य परीक्षा के बाद घोषित किया जाता है. इससे पहले जब भी कभी जेपीएससी ने अपना कैलेंडर जारी किया है, उसमें कभी भी इंटरव्यू के डेट का उल्लेख नहीं किया है.

विदित हो कि छठी जेपीएससी पर पिछली सुनवाई चार सिंतबर को हुई थी और अगली सुनवायी की तिथि 16 सिंतबर निश्चित की गयी है. लेकिन सुनवाई के बीच इंटरव्यू का डेट जारी कर जेपीएससी यह संदेश देना चाह रहा है कि केस का फैसला उनके ही पक्ष में आने वाला है, जो की माननीय कोर्ट का अवमानना है.

 

पंकज यादव-  सरकार के दवाब में JPSC जल्दबाजी कर रही है

 

अनिल पन्ना- छठी जेपीएससी का मामला हाई कोर्ट में लंबित व रिजल्ट प्रकाशन पर है रोक. ऐसे में जेपीएससी ने जारी कर दी है इंटरव्यू की तिथि , क्या हाई कोर्ट से ऊपर है जेपीएससी? जब छ्ठी JPSC का मामला माननीय हाई कोर्ट में लंबित है,मुख्य परीक्षा के प्रकाशन पर रोक लगाया गया है और लगातार सुनवाई चल रही है. इसकी अगली सुनवाई 16 सितम्बर 2019 को तय है. तो ऐसे में आयोग द्वारा जल्दीबाजी में इंटरव्यू की तिथि घोषित करना उसके गलत मंशा को उजागर करता है.

इसको लेकर हाई कोर्ट में लड़ाई लड़ रहे छात्रों में जोरदार आक्रोश है. अभी तक सभी JPSC विवादों में है. विदित हो कि पहले से लेकर छठी जेपीएससी की सभी परीक्षा बिना विवादों के पूरी नहीं हो सकी है पहला JPSC और दूसरा JPSC का मामला अभी भी माननीय सुप्रीम कोर्ट में है. कई मामलों में माननीय न्यायालय ने कड़ी फटकार भी लगाई है.

छ्ठी JPSC को लेकर 3 साल से चल रहा है आंदोलन. छ्ठी JPSC में आरक्षण नियमावली व 15 गुणा कोटिवार रिजल्ट और अनिमियता को लेकर सड़क से सदन तक आंदोलन होते रहा. लेकिन अंततः जनवरी 2019 में मुख्य परीक्षा का आयोजन करा दिया गया. परीक्षा के दौरान हज़ारों की संख्या में अभ्यर्थियों ने मुख्य परीक्षा का बहिष्कार भी किया था.

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