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राजद की बागी ‘अन्नपूर्णा’ बीजेपी से ‘चतरा’ में देख रही हैं जीत का समीकरण, ‘कोडरमा’ से ‘प्रणव’ का हो सकता है रास्ता साफ

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Akshay Kumar Jha

Ranchi : पिछले दो दिनों से झारखंड की राजनीति में एक ऐसी शख्सियत की चर्चा सबसे ज्यादा हो रही है, जो अब तक लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पर्दे की पीछे थीं. लेकिन अब वो दिल्ली जाकर राजद के हरे रंग को छोड़ बीजेपी के भगवा रंग में रंग गयी हैं. जी हां बात हो रही है राजद से छह साल के लिए निष्कासित अन्नपूर्णा देवी की.

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झारखंड में दो खबर एक साथ चली पहली कि अन्नपूर्णा देवी और जनार्दन पासवान को राजद से निकाला गया और दूसरी कि दोनों ने बीजेपी का हाथ थाम लिया. इन सबके बीच वजह और कुछ नहीं बल्कि लोकसभा चुनाव के महासमर में उतरना है. महागठबंधन के समीकरण से साफ हो चुका था कि किसी भी हाल में अन्नपूर्णा चाह कर भी लोकसभा नहीं लड़ सकती थीं. इसलिए उन्होंने महागठबंधन ही नहीं बल्कि राजद को ही अलविदा कह दिया. इन सबके बीच अब सवाल यह है कि आखिर अन्नपूर्णा देवी चुनाव लड़ेंगी किस लोकसभा सीट से, कोडरमा या चतरा.

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अन्नपूर्णा तलाश रहीं हैं चतरा में जीत का समीकरण

अब से पहले अन्नपूर्णा चार बार कोडरमा से विधायक रह चुकी हैं. 2014 में उन्हें उनकी ही जाति विशेष की महिला नीरा यादव ने उन्हें शिकस्त दी. कोडरमा से मौजूदा सांसद रविंद्र राय का दोबारा कोडरमा से टिकट मिलने पर लगभग विराम लग चुका है. इससे पहली बार भूमिहार जाति के सांसद बने रविंद्र राय और उनके समर्थक नाराज चल रहे हैं. हालांकि खुद रविंद्र राय ने मीडिया में अभी तक किसी तरह की कोई पार्टी विरोधी बयान नहीं दी है. बहरहाल सवाल मौजूं है, कि अन्नपूर्णा देवी चुनाव कहां से लड़ने की इच्छा रखती हैं.

अन्नपूर्णा देवी के कुछ करीबियों का कहना है कि उनकी इच्छा है कि वो चतरा से लोकसभा का चुनाव लड़ें. उन्होंने यहां से जीतने का समीकरण भी बना लिया है. इससे पहले जिस तरीके से जेवीएम से चतरा लोकसभा की उम्मीदवार नीलम देवी बीजेपी में शामिल हुईं और सीएम आवास से अन्नपूर्णा की मौजूदगी में रविवार की रात खफा हो कर निकली, उससे साफ हो गया कि चतरा से नीलम को टिकट मिलना मुश्किल है.

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जनार्दन का साथ और बीजेपी का हाथ

अन्नपूर्णा देवी चतरा में दोहरे समीकरण से जीत की दिशा में आगे बढ़ना चाह रही है. पूर्व विधायक जनार्दन पासवान का चतरा में काफी प्रभाव है. उन्हें इस बात से दिक्कत भी नहीं है कि अन्नपूर्णा देवी को चतरा से टिकट मिले. वहीं अन्नपूर्णा देवी की भी पकड़ चतरा लोकसभा क्षेत्र में है. अन्नपूर्णा देवी की जाति विशेष का वोट वहां करीब दो लाख है.

बाकी चतरा लोकसभा में पांच विधानसभा आते हैं, जिसमें पांकी को छोड़ दी जाये तो बाकी सभी जगहों पर बीजेपी का पलड़ा भारी है. चतरा, मनिका और सिमरिया (जेवीएम से बीजेपी) में बीजेपी के विधायक हैं. लातेहार की बात जाए तो यह तय नहीं माना जाता है कि प्रकाश राम जेवीएम में होने के बावजूद किस पार्टी की मदद करेंगे.

कोडरमा से प्रणव वर्मा का हो सकता है रास्ता साफ

फिलवक्त यह कहना जल्दीबाजी होगी कि कोडरमा से किसको टिकट मिलना तय है. अन्नपूर्णा देवी अगर पार्टी की बात मान लेती हैं और कोडरमा से चुनाव लड़ती हैं, तो चतरा पर बीजेपी से सुनील सिंह, प्रणव वर्मा और रविंद्र राय टिकट का दबाव बनायेंगे. लेकिन पार्टी अगर अन्नपूर्णा देवी की बात से सहमत होती है तो कोडरमा से प्रणव वर्मा का रास्ता साफ हो सकता है.

प्रणव वर्मा 2014 में जेवीएम के टिकट से चुनाव लड़ते हुए करीब 1.60 लाख वोट लाये थे, अगर पार्टी में भीतरघात नहीं होता है तो प्रणव के पारिवारिक इतिहास को देखते हुए कोडरमा से उन्हें प्रबल दावेदार माना जा रहा है.

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