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कहानी एक ‘गांधी’ पसंद डायरेक्टर साहब की…

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Akshay Kumar Jha

एक डायरेक्टर साहब आजकल चर्चा में हैं. चर्चा उनके डायरेक्शन की प्रतिभा को लेकर है. अगर आप सोच रहे हैं कि वो फिल्म लाइन से ताल्लुक रखते हैं तो आप गलत हैं. वो फिल्म डायरेक्टर नहीं हैं, लेकिन डायरेक्शन उनका इतना कमाल का है कि कड़क, ईमानदार छवि के बड़े साहब भी उनके एक्शन बोलने का इंतजार करते हैं. यह अलग बात है कि डायरेक्टर साहब की वजह से बड़े साहब की बेदाग कमीज पर छीटें पड़ रहे हैं और उन्हें खबर ही नहीं. डायरेक्टर साहब के जिम्मे काम भी बहुत है. चीनी में मिठास के हिसाब से लेकर नमक में आयोडीन तक सारा कुछ उनके ही जिम्मे है.

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झारखंड की तीन चौथाई से अधिक आबादी का पेट पालने से लेकर गैस की बू जांचने तक सब वही करते हैं. डायरेक्टर साहब पक्के गांधीवादी हैं. इसलिए जहां कहीं भी गांधी जी की चर्चा होती है, वह वहां जरूर पाये जाते हैं. उन्हें गुलाबी वाले गांधीजी कुछ ज्यादा ही पसंद हैं. भोजन वाले विभाग में अभी हुए तबादलों में किरदारों को सही जगह फिट करने की उनकी कला की वाहवाही चारों तरफ हो रही है.

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भोजन-पानी वाले महकमे के साथ एक गोदाम वाला विभाग भी है. गोदामों में हिसाब-किताब रखने के लिए एजेंसी के मार्फत कुछ कंप्यूटर ऑपरेटर भी रखे गये हैं. अंदरखाने की बात यह है कि एजेंसी से लेकर कई सारे पात्रों का चयन डायरेक्टर साहब ने खुद किया है. वैसे इस एजेंसी को डायरेक्टर साहब ने धान खरीद के समय भी लगाया था, दरअसल साहब ने असली कला पर्दे के पीछे दिखायी है. लेकिन डायरेक्टर साहब पर कौन ऊंगली उठाये, जब बड़े साहब ही उनकी प्रतिभा के कायल हैं. इधर भोजन-पानी विभाग के लोग खुन्नस खाये बैठे हैं कि डायरेक्टर साहब की वजह से उन्हें कोई पूछता ही नहीं.

डायरेक्टर साहब के एक प्रिय सारथी भी हैं. उनका नाम कुछ ऐसा है जैसे तेलवाले एक देश के एक तानाशाह, अरे  वही जिन्हें अमेरिका ने निपटा दिया था, अब उनकी आत्मा उसी नाम से रांची में भटक रही है. भोजन-पानी वाले दुकानों पर घूमती है और आकर डायरेक्टर साहब को इत्तला करती है. इसके बाद डायरेक्टर साहब रेस हो जाते हैं. चालक की इतनी चलती है कि डायरेक्टर साहब कभी दुकानों पर छापा मारते दिखते हैं, तो कभी कहीं और. कहानियां कई और भी हैं. सूत्र बताते हैं कि डायरेक्टर साहब फिलहाल तबादलों की मलाई से तर मूंछों को चाट कर साफ करने में व्यस्त हैं. इसके बाद वे चीनी की फाइल में घुस कर खुद शकरपारा बन जायेंगे. जरा संभल कर रहियेगा बड़े साहब…

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