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जो बातें बीत गयीं, बीत गयीं, अब आगे देखने का समय, सबको साथ लेकर चलूंगाः मोदी

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New Delhi: लोकसभा चुनाव में भारी जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी के कार्यालय पहुंचे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे लोकतंत्र के इतिहास की सबसे बड़ी घटना बताया. उन्होंने कहा कि आजादी के बाद इतने चुनाव होने के बाद सबसे अधिक मतदान इस चुनाव में हुआ. और वह भी 40-42 डिग्री गर्मी के बीच में. यह अपने आप में भारत के मतदाताओं की जागरुकता, लोकतंत्र के प्रति प्रतिबद्धता दर्शाता है. पूरे विश्व को भारत के लोकतंत्र की शक्ति को पहचानना होगा. इसमें जिन लोगों ने बलिदान दिया है, जो लोग घायल हुए हैं उनके परिवारजनों के प्रति मेरी संवेदना है. लोकतंत्र के इतिहास में लोकतंत्र के लिए मरना यह मिसाल आनेवाली पीढ़ियों को प्रेरणा देती रहेगी. मैं चुनाव आयोग को, सुरक्षाबलों को, इस लोकतंत्र की व्यवस्था को संभालनेवाले हर किसी को बधाई देता हूं.

पीएम ने कहा- साथियों, जब महाभारत का युद्ध समाप्त हुआ, तब श्रीकृष्ण से पूछा गया कि आप किसके पक्ष में थे, मैं समझता हूं भगवान कृष्ण ने उस वक्त जो जवाब दिया था, वह आज की जनता ने श्रीकृष्ण के रूप में जवाब दिया है. श्रीकृष्ण ने जवाब दिया था कि मैं किसी के पक्ष में नहीं था, मैं तो सिर्फ हस्तिनापुर के पक्ष में खड़ा था. यह भारत के उज्ज्वल भविष्य की गारंटी है. मैं कह रहा था, कि चुनाव कोई दल नहीं लड़ रहा है, कोई नेता, कोई पार्टी नहीं लड़ रही है, जनता लड़ रही है. जिनके आंख-कान बंद थे उनके लिए मेरी बात समझना मुश्किल था, लेकिन आज मेरी उस भावना को जनता जनार्दन ने प्रकट कर दिया है. इसलिए अगर आज कोई विजय हुआ है तो हिंदुस्तान विजय हुआ है, लोकतंत्र विजय हुआ है, जनता विजयी हुई है. हम सभी भाजपा के कार्यकर्ता विनपूर्वक इस विजय को जनता के चरणों में समर्पित करते हैं. इस लोकसभा के चुनाव में जो विजयी हुए हैं, उन सभी विजेताओं को मैं हृदय से बधाई देता हूं. सभी विजयी, किसी भी दल से हों, देश के उज्ज्वल भविष्य के लिए प्रतिबद्धता के साथ भारत के उज्ज्वल भविष्य के लिए कंधे से कंधा मिला कर काम करेंगे, मेरा ऐसा विश्वास है.

चार राज्य में भी चुनाव थे. उन विधानसभाओं में जो प्रतिनिधि चुन कर आये हैं, उन्हें भी मैं बधाई देता हूं. उन्हें विश्वास दिलाता हूं, भाजपा भारत के संविधान के प्रति सर्मपित है, इसलिए इन चीजों को विजय प्राप्त करनेवाले लोगों को विश्वास दिलाता हूं, केंद्र सरकार राज्यों के विकास में उनके साथ कंधे से कंधा मिला कर साथ चलेगी.

भारतीय जनता पार्टी जनता का हर कार्यकर्ता बधाई का पात्र है, जिसने लोकतंत्र का झंडा उठाते हुए देश की जनता के लिए लोकतांत्रिक तरीके से लोकतंत्र के पर्व में शरीक होकर आन-बान-शान बढ़ाने में भूमिका निभायी है. भारतीय जनता पार्टी की विशेषता है कि हम कभी दो भी हुए लेकिन हम कभी अपने मार्ग से विचलित नहीं हुए. आदर्शों को ओझल नहीं होने दिया. न रुके, न थके. आज दोबारा आ गये. दो से दोबारा आने तक, इस यात्रा में अनेक उतार चढ़ाव आये. दो थे तब भी निराश नहीं हुए, दोबारा आये तो न नम्रता छोड़ेंगे, न संस्कार, न विनम्रता छोड़ेंगे.

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चुनाव नतीजों पर मेरा ध्यान नहीं था. कहां क्या हुआ, कैसे हुआ. लेकिन अध्यक्ष जी ने विस्तार से बताया. मैं रात में देखूंगा कि दिन भर क्या-क्या हुआ है. यह 21वीं सदी है, नया भारत है, चुनाव का विजय है. यह मोदी का विजय नहीं है. यह देश में ईमानदारी के लिए तड़पते हुए नागरिकों की आकांक्षा और आशा की विजय है, नौजवान की विजय है. यह विजय देश के उन किसानों की है जो पसीना बहा कर राष्ट्र के लोगों का पेट भरने के लिए अपने पेट को परेशान करता है. यह उन मजदूरों की भी विजय है, जिन्हें पेंशन योजना लागू करके सम्मान दिया है. उन्हें पक्का घर दिया है. यह विजय उन मध्यम वर्ग के परिवारों की है. जो कानून का पालन करता रहा, जो टैक्स देता रहा, न उसे कभी सम्मान मिला न ही कभी भरोसा हुआ कि जो टैक्स वह देता है क्या सचमुच देश के काम आता है क्या. मध्यम वर्ग को संतोष हुआ है, वह इस चुनाव में नजर आ रहा है. ईमानदारी को ताकत मिली है, इस बदलाव से यह परिणाम आया है.

सेक्युलिरजम नाम का टैक्स. कुछ भी करो, यह नाम ले लो. पूरी जमात ने बोलना ही बंद कर दिया. इस चुनाव में एक भी राजनीतिक दल ने सेक्युलरिज्म का नकाब पहन कर देश को गुमराह करने की हिम्मत नहीं की. ये बेनकाब हो गये. दूसरा भारत में कोई चुनाव ऐसा नहीं गया, जिसके केंद्र में महंगाई नहीं हो. यह चुनाव ऐसा है जिसमें एक भी विरोधी दल ने आरोप नहीं लगाया है. यह चुनाव ऐसा है जिसमें भ्रष्टाचार के मुद्दे से नहीं थे. यह पहला चुनाव था जिसमें पांच साल के शासन पर एक भी आरोप नहीं लगा पाया. पोलिटिकल पंडितों को समझ नहीं आ रहा था कि किस तराजू से तोला जाये. 21वीं सदी की मजबूत नींव बनायी है. जो देश का उज्ज्वल भविष्य, एकता और अखंडता, भारत की जनता ने इस चुनाव एक नया नेरेटिव सामने रख दिया है. सारे समाजशास्त्रियों को सोचने पर मजबूर कर दिया है. अब इस देश में सिर्फ दो जाति बची है. दो जाति ही रहनेवाली है और देश इन दो जाति पर ही केंद्रित होनेवाला है. 21वीं सदी में भारत में एक जाति है गरीबी और दूसरी जाति है देश को गरीबी से मुक्त करानेवालों की. इन दोनों को सशक्त करना है. ये दो शक्तियां देश से गरीबी के कलंक को मिटा सकती हैं.

यह चुनाव इस लिए महत्वपूर्ण है कि इसी कालखंड में प्रचंड मैनडेट विश्व को अचंभित करनेवाली घटना है. यही समय है जब देश महात्मा गांधी के 150 वर्ष मनायेगा. जब भारत की आजादी के 75 साल मनायेगा. 1942 से 47 तक देश का हर व्यक्ति जो भी करता था आजादी के लिए. हर कुछ आजादी के लिए करता था. एक जनांदोलन देश को आजादी दिलाने में बहुत बड़ी मदद की. 2019-24 का काल खंड महत्वपूर्ण है. हम 130 करोड़ हैं. संकल्प कर लें कि देश को सभी मुसीबतों से मुक्त करना है. एक विकसित भारत बना कर सांस लेना है. आवश्यतकाओं को पूर्ण करना है.

इस चुनाव को नम्रता से स्वीकारना है. सरकार बहुतम से बनेगी, जनता ने बना दी. लेकिन लोकतंत्र के संस्कार, स्पिरिट, इस बात की जिम्मेवारी देता है सरकार भले ही बहुमत से बनती है, पर देश सर्वमत से चलता है. चुनाव में क्या हुआ, कौन क्या बोला यह मेरे लिए वह बात बीत गयी. हमें आगे देखना है. सबको साथ लेकर चलना है. विरोधियों को भी साथ लेकर चलना है, देशहित के लए चलना है. प्रचंड बहुमत के साथ भी लोकतंत्र की मर्यादाओं के साथ चलना है, संविधान के भाव को पकड़ कर चलना है. भाजपा का कार्यकर्ता और नागरिक हमसे जुड़ेगा. देश ने हमें बहुत दिया है.

देशवासियों से कुछ कहना चाहता हूं, विश्वास दिलाना चाहता हूं, आपने इस फकीर को झोली तो भर दी, पर ये अपेक्षा के साथ भरी है. आशा आपके संकल्प से बहुत कुछ जुड़ा हुआ है. देश को कहूंगा आपने 2014 में मुझे ज्यादा जानते नहीं थे, 2019 में जानने के बाद और ज्यादा ताकत दी. मैं इसके पीछे की भावना को भली भांति समझता हूं. बहुत वर्षों के बाद एक चुनी हुई सरकार दूसरी बार पूर्ण बहुमत से जीत कर आयी. इसका मतलब देश की जनता का कितना भरोसा है, और भरोसा जितना बढ़ता है, जिम्मेवारी और बढ़ती है. मैं कहना चाहूंगा कि आपने जो दायित्व दिया है, हमारे एनडीए के साथियों ने समर्थन दिया है, एनडीए साथियों ने भी मिल कर मेहनत की है. तब जा कर मैं देशवासियों से आज जरूर कहना चाहूंगा. मेरा वादा मानिये, मेरा समर्पण मानिये, आपने जो फिर से मुझे काम दिया आनेवाले दिनों में भी मैं बद इरादे से बद नीयत से कोई काम नहीं करूंगा. काम करते हुए गलती हो सकती है, पर बद नीयत से कोई काम नहीं करूंगा.

मुझे इतनी बड़ी जिम्मेवारी दी है कि मैं मेरे लिए कुछ नहीं करूंगा. तीसरी बात मैं सार्वजनिक रूप से कहना चाहूंगा, मेरे समय का पल-पल, मेरे शरीर का कण-कण सिर्फ और सिर्फ देशवासियों के लिए है. मेरे देशवासी आप जब भी मेरा मूल्यांकण करेंगे इन तीन तराजुओं पर मुझे तौलते रहना, कभी कोई कमी रह जाये, तो टोकते रहना. लेकिन मैं विश्वास दिलाता हूं, मैं सार्वजनिक रूप से जो बात कहता हूं उसे जीने के लिए भरपूर प्रयास करूंगा.

राज्यों की टीम, पार्टी के पन्ना प्रमुख तक के लोग. पन्ना प्रमुख की ताकत क्या होती है, वह इस चुनाव में पता चल गया. पन्ना प्रमुख से लेकर राष्ट्रीय प्रमुख तक को धन्यवाद.

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