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2012 के बाद से नहीं हुई है थेरेपिस्ट और रिसोर्स शिक्षकों की नियुक्ति, अब बचे मात्र 98 थेरेपिस्ट

स्कूलों में नहीं आ रहे दिव्यांग बच्चे ड्रॉप आउट न करें इसलिये की गयी थी इनकी नियुक्ति

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Ranchi : दिव्यांग बच्चे स्कूल तक पहुंचें इसके लिये कई नियम और प्रावधान हैं. राज्य स्तर पर इसके लिये थेरेपिस्ट और रिसोर्स शिक्षकों की नियुक्ति की जानी है. लेकिन समय के साथ-साथ थेरेपिस्ट और रिसोर्स शिक्षकों की संख्या में कमी आ गयी है.

साल 2012 के बाद से राज्य में रिसोर्स शिक्षक और थेरेपिस्ट की नियुक्ति नहीं निकाली गयी है. रिसोर्स शिक्षकों और थेरेपिस्टों की नियुक्ति राज्य शिक्षा परियोजना परिषद् की ओर से की जानी है.

कई बार वर्तमान में कार्यरत रिसोर्स शिक्षकों और थेरेपिस्टों ने इसकी जानकारी शिक्षा परियोजना को दी लेकिन परियोजना की ओर से नियुक्ति नहीं निकाली गयी. साल 2011 में अंतिम बार थेरेपिस्ट और रिसोर्स शिक्षकों की नियुक्ति की गयी थी जिनकी संख्या लगभग 150 थी.

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हर ब्लॉक में एक थेरेपिस्ट और रिसोर्स शिक्षक चाहिए

फिलहाल राज्य में मात्र 98 थेरेपिस्ट हैं और रिसोर्स शिक्षकों की संख्या 230 है. जबकि राज्य के हर ब्लॉक में एक रिसोर्स शिक्षक और थेरेपिस्ट होने चाहिये. इसके अनुसार लगभग 165 थेरेपिस्टों की कमी है.

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थेरेपिस्ट की वर्तमान स्थिति ऐसी है कि एक ही ब्लॉक के थेरेपिस्ट दो-दो ब्लॉक देख रहे हैं. वहीं कुछ ब्लॉक ऐसे भी हैं जहां जहां रिसोर्स शिक्षक ही थेरेपिस्ट का काम भी कर रहे है. कुछ थेरेपिस्टों ने जानकारी दी कि रिसोर्स शिक्षक और थेरेपिस्टों के काम अलग-अलग हैं, लेकिन लोगों की कमी के कारण एक दूसरे का काम करना पड़ता है.

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सर्व शिक्षा अभियान के तहत की गयी थी नियुक्ति

सर्व शिक्षा अभियान के दौरान ही राज्य में थेरेपिस्ट और रिसोर्स शिक्षकों की बहाली की गयी. जिसका उद्देश्य स्कूलों में समान्य बच्चों की तरह दिव्यांग बच्चों को भी सामान्य शिक्षा देना है.

साल 2017 में केंद्र सरकार की ओर से थेरेपिस्ट के तीन पदों को समाप्त करते हुए मात्र एक पद थेरेपिस्ट रखा गया. जबकि इसके पहले फिजियोथेरेपिस्ट, ऑडियोलॉजिस्ट और आक्यिोपेशनल थेरेपिस्ट के पद प्रत्येक ब्लॉक में थे.

कुछ जिले के थेरेपिस्ट्स से बात करने से जानकारी हुई कि प्रखंड और स्कूल स्तर पर दिव्यांग छात्रों को सुविधाएं नहीं मिल पाने के कारण बच्चें ड्रॉप आउट हो जाते हैं.

क्या है थेरेपिस्ट और रिसोर्स शिक्षक में अंतर

थेरेपिस्ट का काम प्रखंड स्तर पर दिव्यांग बच्चों को चिन्हित कर, उनके स्वास्थ्य संबधी जानकारी देना, प्रखंड स्तर पर यथावत संसाधन उपलब्ध कराना, व्यायाम समेत अन्य जानकारी देना है.

वहीं रिसोर्स शिक्षकों का कार्य बच्चों को स्कूल में विशेष संसाधन उपलब्ध कराना, ब्लॉक स्तर के दिव्यांग बच्चों की स्कूल में उपस्थिति तय करना समेत अन्य कार्य हैं.

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