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मीडिया के लिए कोई गाइडलाइंस नहीं होनी चाहिए, खुद तय करे : सीजेआई

सीजेआई दीपक मिश्रा ने मंगलवार को इंटरनेशनल लॉ एसोसिएशन के कार्यक्रम में कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सभी तरह की स्वतंत्रता की मां समान होती है

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NewDelhi : सीजेआई दीपक मिश्रा ने मंगलवार को इंटरनेशनल लॉ एसोसिएशन के कार्यक्रम में कहा कि प्रेस की स्वतंत्रता किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सभी तरह की स्वतंत्रता की मां समान होती है और मीडिया को खुद पर नियंत्रण के लिए अपनी गाइडलाइंस बनानी चाहिए.  इसमें कोई शक नहीं कि यह संविधान में दिये गये सबसे मूल्यवान अधिकारों में से एक है. इसमें जानने का अधिकार और सूचित करने का अधिकार भी समाहित है. कार्यक्रम में सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एएम खानविलकर भी मौजूद थे.  सीजेआई दीपक मिश्रा अपनी राय दी कि मीडिया के लिए कोई गाइडलाइंस नहीं होनी चाहिए. उन्हें खुद अपनी गाइडलाइंस तैयार करने के लिए छोड़ देना चाहिए और मीडिया को उन्हीं के द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए.

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सोशल मीडिया को जांच के दायरे में लाना होगा

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सीजेआई ने कहा कि मीडिया को नागरिकों की भावना को भड़काने वाले मामलों की रिपोर्टिंग करते समय निष्पक्षता बनाये रखने की जिम्मेदारी उठानी चाहिए. उन्होंने कहा, देश में भीड़ द्वारा हत्या करने जैसी घटनाओं को बढ़ावा देने में सोशल मीडिया की बड़ी भूमिका है.  समाज में शांति और कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए सोशल मीडिया को जांच के दायरे में लाना होगा और यह जांच स्वयं देश के जागरूक नागरिक ही कर सकते हैं. जस्टिस मिश्रा ने कहा कि भीड़ द्वारा की जा रही हत्याओं की घटनाओं में पिछले कुछ दिनों में इजाफा हुआ है.  उन्होंने कहा, इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए पिछले दिनों खुद उन्होंने संसद से कड़ा कानून बनाने की सिफारिश की थी.

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सोशल मीडिया से बढ़ावा मिल रहा है मॉब लिंचिंग को

मॉब लिंचिंग की घटनाओं को सोशल मीडिया से बढ़ावा मिल रहा है.  सोशल मीडिया पर कोई अफवाह वायरल होती है और कुछ ही समय बाद कोई ना कोई भीड़ का शिकार हो जाता है. ऐसी घटनाओं से लोकतंत्र और जीवन दोनों की हानि हो रही है. सोशल मीडिया पर कंट्रोल नागरिक खुद करेंगे. उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया को कंट्रोल की जरूरत है और यह कंट्रोल कोई संस्था या सरकार नहीं बल्कि खुद इस देश के जागरूक नागरिक करेंगे.   कार्यक्रम में मशहूर विधिवेत्ता एनआर माधव मेनन ने भी अदालत, मीडिया और निष्पक्ष ट्रायल गारंटी विषय पर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि मीडिया कवरेज तीन पायदानों पर किसी भी मामले के निष्पक्ष ट्रायल को प्रभावित करती है.

ट्रायल से पहले, ट्रायल के दौरान और ट्रायल पूरा होने के बाद.  उन्होंने इशारा किया कि गवाहों और आरोपी की पहचान का खुल जाना कई तरीके से ट्रायल को प्रभावित कर सकता है. मेनन ने कहा, मीडिया की तरफ से समानांतर ट्रायल चलाये जाने से जांच एजेंसी को गिरफ्तारी करने के लिए प्रेरित कर सकता है और गवाहों के पलट जाने का भी कारण बन सकता है.  ट्रायल खत्म हो जाने के बाद यदि मीडिया किसी जज की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाता है तो इससे न्यायपालिका की स्वतंत्रता को भी खतरा पैदा हो सकता है.

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