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बीत गया यह भी साल, रिम्स अब भी बेहाल

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Ranchi : यह साल भी अब बीत गया, लेकिन राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था में कोई सुधार नहीं आया. राज्य के सबसे बड़े हॉस्पिटल में भी कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है. हां, मरीजों की संख्या में भले दिनोंदिन वृद्धि हो रही है. न तो नये डॉक्टरों की बहाली हुई और न ही नर्सों की. केंद्र द्वारा शुरू की गयी आयुष्मान भारत योजना का भी लाभ रिम्स में मरीजों को मिलता नहीं दिख रहा है. इलाज में होनेवाली देरी के कारण ज्यादातर मरीज पैसे देकर ही इलाज कराने को मजबूर हो जाते हैं. सालों भर रिम्स की कई मशीनें खराब रहती हैं, तो कई बगैर इस्तेमाल के कमरों में बस यूं ही पड़ी रहती हैं. मरीजों का दबाव भी इस हॉस्पिटल में लगातार बढ़ता जा रहा है. लेकिन, स्वास्थ्य के क्षेत्र में कोई विकास कार्य नहीं हो रहा है. लगभग 1500 मरीज हर दिन यहां इनडोर में भर्ती रहते हैं. वहीं, 300 से 400 मरीज प्रतिदिन ओपीडी में अपना इलाज कराने पहुंचते हैं, लेकिन स्थिति सुधरने के बजाय रिम्स अब भी बेहाल ही है.

रिम्स क्यों बना रहा सुर्खियों में, आइये डालते हैं एक नजर

संचालन के इंतजार में पड़ा है ट्रॉमा सेंटर

रिम्स परिसर में बना 50 बेड का ट्रॉमा सेंटर संचालन के इंतजार में पड़ा हुआ है. हर बार अलग-अलग पदाधिकारी इसका निरीक्षण करते हैं और भवन में बदलाव करने की सलाह देते हैं. इस बार भी नये निदेशक के आने के बाद इसी प्रक्रिया को दोहराया गया. हालांकि, नये निदेशक का कहना है कि नये साल में इसे अवश्य आरंभ कर दिया जायेगा. निदेशक डॉ डीके सिंह ने बताया कि छह माह में ट्रॉमा सेंटर चालू हो जायेगा. वहीं, नवनिर्मित ट्रॉमा सेंटर में कर्मचारियों की नियुक्ति की प्रक्रिया भी रुकी हुई है. नियुक्ति के लिए रोस्टर से संबंधित प्रस्ताव स्वास्थ्य विभाग को भेजा है. इस पर विभाग की मुहर लगने के बाद नियुक्ति प्रक्रिया में लगभग पांच महीने का वक्त लगेगा.

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काला अध्याय के रूप में  जाना जायेगा दो जून 2018, जूनियर डॉक्टरों और नर्सों ने की थी हड़ताल, 26 की गयी थी जान

रिम्स के लिए दो जून 2018 का दिन काला अध्याय के रूप में लिखा जायेगा. राज्य के सबसे बड़े सरकारी अस्पताल, जहां आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति अपना इलाज कराने आते हैं, लेकिन जब जीवन बचानेवाला ही हड़ताल पर चला जाये, तो उम्मीद किससे की जा सकती है. कुछ ऐसा ही दो जून 2018 की सुबह रिम्स में देखा गया. जूनियर डॉक्टर, पारा मेडिकलकर्मी, नर्स सभी अचानक हडताल पर चले गये. इससे जहां इमरजेंसी सेवा ठप हुई, वहीं ओपीडी और इनडोर में भी मरीजों का इलाज बंद हो गया. गंभीर मरीजों को इमरजेंसी में घुसने तक नहीं दिया गया. दर्जनों मरीज बिना इलाज के लौट गये. दो दिनों की इस हड़ताल में 26 मरीजों ने बगैर इलाज के ही दम तोड़ दिया था. वहीं, इससे पहले 11 फरवरी को भी रिम्स की लगभग 400 नर्सें हड़ताल पर चली गयी थीं, इससे भी मरीजों को ही परेशानी का सामना करना पड़ा था.

रिम्स में लालू प्रसाद हुए भर्ती, राजनीतिज्ञों का आना-जाना हुआ शुरू

एक मई 2018 को राजद सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव को रिम्स में भर्ती किया गया. लालू प्रसाद यादव चारा घोटाला में सजा काट रहे थे. लेकिन, दिल और गुर्दे से जुड़ी बीमारियों के इलाज के लिए उन्हें पहले एम्स में भर्ती किया गया, इसके बाद रांची के रिम्स में इलाज के लिए लाया गया. यहां डॉ उमेश प्रसाद की देखरेख में अब भी उनका इलाज जारी है. लालू प्रसाद को पहले रिम्स के सुपर स्पेशियलिटी विंग कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट में भर्ती किया गया, लेकिन बाद में उन्हें पेइंग वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया. लालू प्रसाद के रिम्स में भर्ती होने से इन दिनों रिम्स में राजनीतिज्ञों का आना-जाना भी काफी बढ़ गया है.

रिम्स ने देखा दो डॉक्टरों में कैसे होती है लड़ाई

जनवरी 2018 में हार्ट के दो डॉक्टरों में लड़ाई हो गयी. जाने-माने कार्डियोलॉजिस्ट डॉ हेमंत नारायण और डॉ प्रकाश के बीच हाथपाई हुई. रिम्स के लिए शायद यह पहला मौका था, जब उसके दो डॉक्टरों की लड़ाई को करीब से देखा गया. वैसे तो यहां मरीजों के परजिन और जूनियर डॉक्टरों के बीच लड़ाई होती रहती है, लेकिन इस बार दो डॉक्टर आपस में ही भिड़ गये. दोनों ने एक-दूसरे पर जमकर लात-घूंसे चलाये. यह घटना सुपरस्पेशियलिटी विंग के कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के ऑपरेशन थिएटर के पास घटी थी. रिम्स द्वारा इस मामले की जांच की गयी, जिसमें दोनों डॉक्टरों को दोषी मानते हुए उनके एक वर्ष के लिए वेतन वृद्धि पर रोक लगायी गयी.

Bharat Electronics 10 Dec 2019

रिम्स को मिला स्थायी निदेशक

लंबे इंतजार के बाद रिम्स प्रबंधन को अपना स्थायी निदेशक भी इसी साल मिला. इससे पहले प्रभारी निदेशक  के रूप में डॉ आरके श्रीवास्तव योगदान दे रहे थे. रिम्स के स्थायी निदेशक के पद पर डॉ. दिनेश कुमार सिंह के नाम के प्रस्ताव पर सहमति बनी. पांच दिसंबर को डॉ सिंह ने रिम्स निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया.

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